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सीएम योगी के आदेश बेअसर नहीं थम रही गोवंशों की मौत का सिलसिला, फर्रुखाबाद में 4 हरदोई में 3 गाय मरीं
Sat, 28 Sep 2019 09:31 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 28 Sep 2019 09:31 PM IST
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धूप में खड़े भूखे प्यासे गोवंश
- फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत सितवनपुर पिथू में शुक्रवार रात चार गाये मर गईं। जबकि बीमार तीन गोवंश अंतिम सांसें भर रहे हैं। बारिश में छाया की पर्याप्त व्यवस्था न होने से गोवंश कीचड़ में खड़े होकर गुजारा कर रहे हैं। कई स्थानों पर जलभराव भी है। चारे की व्यवस्था देखें तो काफी दिनों से दाना नहीं है, जबकि भूसा भी खत्म हो गया है। और तो और जिम्मेदार गोसदन देखने यदा-कदा ही पहुंचते हैं।
शासन से गोसंरक्षण पर भले ही करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर आदेशों का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पा रहा है। सीडीओ के आदेश के बावजूद सचिवों ने गोसदन वाली ग्राम पंचायतों में अपने आवास नहीं बनाए और न ही वह रोज गोसदन देखने जा रहे हैं। इससे व्यवस्थाएं दुरुस्त होने में अड़ंगा लग रहा है। ग्राम पंचायत सितवनपुर पिथू के मजरा हेकड़गंज में स्थायी गोसदन है।
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शासन से गोसंरक्षण पर भले ही करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर आदेशों का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पा रहा है। सीडीओ के आदेश के बावजूद सचिवों ने गोसदन वाली ग्राम पंचायतों में अपने आवास नहीं बनाए और न ही वह रोज गोसदन देखने जा रहे हैं। इससे व्यवस्थाएं दुरुस्त होने में अड़ंगा लग रहा है। ग्राम पंचायत सितवनपुर पिथू के मजरा हेकड़गंज में स्थायी गोसदन है।
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धूप में खड़े भूखे प्यासे गोवंश
- फोटो : अमर उजाला
इसमें 352 गोवंश रखे जा रहे हैं। पिछले तीन-चार दिन से मौसम बदलने के साथ बारिश भी हो रही है। इससे गोसदन परिसर में कई जगह जलभराव व कीचड़ है। टिनशेड छोटा होने से छाया की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इससे बारिश में भीगकर गोवंश बीमार पड़ रहे हैं। रात में चार गोवंश मर गए। उनका पोस्टमार्टम कराए बिना ही शव वहां से हटवा दिए गए।
गोसदन की रखवाली करने वाले गोरक्षक धर्मेंद्र ने बताया कि पिछले छह माह से उन्हें मानदेय न मिलने से उन्होंने काम छोड़ दिया है। जबकि ड्यूटी कर रहे किशोरीलाल, ओमवीर, विनय सिंह, रामराज व राजन ने बताया कि पिछले कई दिनों से गोसदन में दाना नहीं है। भूसा भी पर्याप्त नहीं दिया जाता।
प्रतिदिन 15 क्विंटल भूसे की खपत है, जबकि इतना दिया नहीं जाता। हालात यह हैं कि गोसदन में बमुश्किल ढाई क्विंटल ही भूसा बचा है। जिसे सभी गाय, बछड़ा व सांड़ों को थोड़ा-थोड़ा डाला जाएगा। रविवार को गोवंश के चारे का कोई इंतजाम ही नहीं है। एडीओ पंचायत विनय चौहान ने बताया कि चार गाय मरने की जानकारी मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी।
गोसदन की रखवाली करने वाले गोरक्षक धर्मेंद्र ने बताया कि पिछले छह माह से उन्हें मानदेय न मिलने से उन्होंने काम छोड़ दिया है। जबकि ड्यूटी कर रहे किशोरीलाल, ओमवीर, विनय सिंह, रामराज व राजन ने बताया कि पिछले कई दिनों से गोसदन में दाना नहीं है। भूसा भी पर्याप्त नहीं दिया जाता।
प्रतिदिन 15 क्विंटल भूसे की खपत है, जबकि इतना दिया नहीं जाता। हालात यह हैं कि गोसदन में बमुश्किल ढाई क्विंटल ही भूसा बचा है। जिसे सभी गाय, बछड़ा व सांड़ों को थोड़ा-थोड़ा डाला जाएगा। रविवार को गोवंश के चारे का कोई इंतजाम ही नहीं है। एडीओ पंचायत विनय चौहान ने बताया कि चार गाय मरने की जानकारी मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी।
हरदोई के टड़ियावां ब्लाक मुख्यालय पर स्थित गोशाला में शनिवार को एक मवेशी ने दम तोड़ दिया। वहीं सवायजपुर में मिरगावां और संझारा गोशालाओं में दो मवेशियों की मौत हो गई।
टड़ियावां ब्लाक मुख्यालय के निकट गोशाला में शनिवार को चन्नी में एक मवेशी की मौत हो गई। इससे ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों में खलबली मच गई तो पशु चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार लीपापोती में लग गए।
सीवीओ डॉ. जेएन पांडेय ने कहा कि टड़ियावां गोशाला में किसी भी मवेशी की मौत नहीं हुई है। चार दिन पहले सड़क पर घूम रहे बैल को एक वाहन ने टक्कर मार दी थी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं खंड विकास अधिकारी संध्या रानी ने बताया कि मवेशी आपस में लड़ रहे थे। इसी दौरान एक मवेशी घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।
टड़ियावां ब्लाक मुख्यालय के निकट गोशाला में शनिवार को चन्नी में एक मवेशी की मौत हो गई। इससे ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों में खलबली मच गई तो पशु चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार लीपापोती में लग गए।
सीवीओ डॉ. जेएन पांडेय ने कहा कि टड़ियावां गोशाला में किसी भी मवेशी की मौत नहीं हुई है। चार दिन पहले सड़क पर घूम रहे बैल को एक वाहन ने टक्कर मार दी थी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं खंड विकास अधिकारी संध्या रानी ने बताया कि मवेशी आपस में लड़ रहे थे। इसी दौरान एक मवेशी घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि गोशाला में भूसा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इस बारे में डीएम पुलकित खरे से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब उन्होंने नहीं दिया। उधर सवायजपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम संझारा के चौकीदार रामाधार ने बताया कि एक मवेशी की मौत हो गई है और दो मवेशी बीमार हैं। बीमार मवेशियों के बारे में पशु चिकित्सक को सूचना दी गई, लेकिन कोई नहीं पहुंचा।
संझारा गोशाला में दो दिन पहले एसडीएम कपिलदेव यादव ने निरीक्षण किया था, तब यहां 50 मवेशी बंद होने की बात कही थी। शनिवार को यहां सिर्फ 43 मवेशी ही थे, जिनमें एक की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से बीमार हैं। एसडीएम कपिलदेव यादव ने बताया कि पशु चिकित्सक को संझारा भेजा गया है। उधर दूसरी ओर मिरगावां में शनिवार को एक मवेशी ने दम तोड़ दिया। उक्त मवेशी भी दो दिन से बीमार था। मवेशी की मौत होने के बाद शनिवार शाम डॉ. बच्चा सिंह गांव पहुंचे। सीवीओ डॉ. जेएन पांडेय ने दोनों स्थानों पर मवेशियों की मौत होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया।
संझारा गोशाला में दो दिन पहले एसडीएम कपिलदेव यादव ने निरीक्षण किया था, तब यहां 50 मवेशी बंद होने की बात कही थी। शनिवार को यहां सिर्फ 43 मवेशी ही थे, जिनमें एक की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से बीमार हैं। एसडीएम कपिलदेव यादव ने बताया कि पशु चिकित्सक को संझारा भेजा गया है। उधर दूसरी ओर मिरगावां में शनिवार को एक मवेशी ने दम तोड़ दिया। उक्त मवेशी भी दो दिन से बीमार था। मवेशी की मौत होने के बाद शनिवार शाम डॉ. बच्चा सिंह गांव पहुंचे। सीवीओ डॉ. जेएन पांडेय ने दोनों स्थानों पर मवेशियों की मौत होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया।