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Kanpur News: 32 लाख के फर्जीवाड़े में चार संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त
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कानपुर। बिल्हौर ब्लॉक में मनरेगा के नाम पर हुए 32 लाख रुपये के फर्जीवाड़े में सख्त कार्रवाई की गई है। दो सचिवों के निलंबन के तीन महीने बाद जिलाधिकारी ने चार संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी है। कर्मियों में एपीओ प्रीति अग्निहोत्री, दीप सिंह और तकनीकी सहायक इंद्र कुमार व प्रदीप सिंह शामिल हैं। इन पर सैबसू और रहीमपुर-करीमपुर ग्राम पंचायतों में फर्जी कार्य दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट का आरोप साबित हुआ था।
सैबसू ग्राम पंचायत में करीब 20.58 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। कागजों में काम दिखाकर मजदूरी और निर्माण कार्यों के नाम पर रकम निकाल ली गई थी। इसी तरह रहीमपुर-करीमपुर ग्राम पंचायत में भी करीब 12 लाख रुपये की गड़बड़ी मिली। दोनों मामलों में दो सचिव, एपीओ और तकनीकी सहायकों की भूमिका शामिल थी। जांच में बीडीओ, सचिव रोहन कनौजिया और रवि यादव, प्रधान समेत 20 से अधिक लोग दोषी पाए गए थे। सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर सचिवों को तुरंत निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, संविदा कर्मियों पर कार्रवाई तीन महीने तक फाइलों में अटकी रही। दोषियों ने कार्रवाई से बचने के लिए जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों तक से सिफारिशें लगवाईं। परियोजना निदेशक आलोक कुमार ने बताया कि अब से कर्मी ब्लॉक में कोई काम नहीं कर सकेंगे।
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सैबसू ग्राम पंचायत में करीब 20.58 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। कागजों में काम दिखाकर मजदूरी और निर्माण कार्यों के नाम पर रकम निकाल ली गई थी। इसी तरह रहीमपुर-करीमपुर ग्राम पंचायत में भी करीब 12 लाख रुपये की गड़बड़ी मिली। दोनों मामलों में दो सचिव, एपीओ और तकनीकी सहायकों की भूमिका शामिल थी। जांच में बीडीओ, सचिव रोहन कनौजिया और रवि यादव, प्रधान समेत 20 से अधिक लोग दोषी पाए गए थे। सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर सचिवों को तुरंत निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, संविदा कर्मियों पर कार्रवाई तीन महीने तक फाइलों में अटकी रही। दोषियों ने कार्रवाई से बचने के लिए जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों तक से सिफारिशें लगवाईं। परियोजना निदेशक आलोक कुमार ने बताया कि अब से कर्मी ब्लॉक में कोई काम नहीं कर सकेंगे।
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