Kanpur: नामांतरण शुल्क को लेकर पूर्व पार्षदों का विरोध, शुरू किया व्हाट्सएप-चिट्ठी भेजो अभियान
Kanpur News: नामांतरण शुल्क के विरोध में पूर्व पार्षदों ने व्हाट्सएप, चिट्ठी भेजो अभियान शुरू किया है। पूर्व पार्षद फोरम वर्तमान पार्षदों के साथ पदेन सदस्य सांसद, विधायकों को भी अभियान में जोड़ रहा है।
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कानपुर में नामांतरण शुल्क के विरोध में पूर्व पार्षद फोरम ने स्थानीय सांसदों, विधायकों और पार्षदों को व्हाट्सएप, चिट्ठी भेजने के साथ ही घर-घर कुंडी खटखटाओ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। बुधवार को फोरम ने नगर निगम के पूर्व उप सभापति व भाजपा पार्षद को चिट्ठी भेजी। उधर, इस संबंध में शासन के रिपोर्ट तलब करने पर अफसर पसोपेश में हैं।
छह साल से की जा रही शुल्क वसूली उनके गले की हड्डी बन गई है। नगर निगम में भवन की कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क लिया जा रहा है। एमएलसी अरुण पाठक की ओर से इसे खत्म करने के लिए चलाई जा रही मुहिम के बीच पूर्व पार्षद फोरम ने भी आंदोलन शुरू कर दिया है। फोरम में शामिल पूर्व पार्षद ललित मोहन श्रीवास्तव, मदन लाल भाटिया, अशोक केशरवानी के अनुसार नगर निगम अधिनियम -1959 के विरुद्ध भवन स्वामियों से असंवैधानिक रूप से नामांतरण शुल्क वसूला जा रहा है।
लखनऊ और वाराणसी नगर निगम ने वसूली से संबंधित प्रस्ताव वापस ले लिए हैं। यहां भी यह प्रस्ताव वापस होना चाहिए। उन्होंने जनहित में 15 दिन में सदन बुलाने और नामांतरण शुल्क को खत्म करने की मांग की है। बताया कि पूर्व पार्षदों के साथ ही मौजूदा पार्षदों और नगर निगम सदन के पदेन सदस्य के रूप में सांसदों, विधायकों को इस आंदोलन से जोड़ा जा रहा है।
जल्द शुरू होगा घर-घर कुंडी खटखटाओ अभियान
इसके लिए रविवार से उन्हें व्हाट्सएप करना शुरू किया गया है। इसके साथ 20 पार्षदों को भी मैसेज किया गया है। वहीं, बुधवार को पूर्व पार्षद फोरम के संयोजक ललित मोहन श्रीवास्तव, पूर्व पार्षद मनीष शर्मा, संजीव शर्मा ने नगर निगम के पूर्व उप सभापति व भाजपा पार्षद संतोष साहू, अंजुली दीक्षित, अखिलेश बाजपेई को चिट्ठी दी। फोरम ने जल्द घर-घर कुंडी खटखटाओ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
सवाल- नगर निगम नामांतरण शुल्क क्यों वसूल रहा
उधर, एमएलसी अरुण पाठक और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने एक अगस्त को लखनऊ में नगर विकास मंत्री एके शर्मा व प्रमुख सचिव अमृत अभिजात से मिलकर नामांतरण शुल्क को नगर निगम अधिनियम के विपरीत बताते हुए इसे खत्म करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि बिना किसी अधिनियम, नियम, उपविधि या शासनादेश के आखिर कानपुर नगर निगम नामांतरण शुल्क क्यों वसूल रहा है