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Kanpur News: बोरी का दाम बढ़ने से आटा मिलों की एक शिफ्ट बंद, अस्थायी कर्मचारी हटाए

Tue, 17 Mar 2026 02:25 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 02:25 AM IST
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Flour mills shut down one shift due to increased sack prices, and temporary workers were removed.
कानपुर। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से कच्चा तेल महंगा होने, आयात वस्तुओं के दाम बढ़ने से और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति में 20 प्रतिशत कटौती करने के आदेश से आटा मिलों पर दोहरा संकट आ गया है। इन मिलों ने एक शिफ्ट का काम बंद कर दिया है। एक तो मांग घटने से उत्पादन प्रभावित हो गया है। दूसरा तैयार माल को भरने के लिए अलग-अलग प्रकार की बोरी नहीं मिल रही हैं। जो मिल रहीं हैं वो ऊंची कीमत पर हैं। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। बिस्कुट और नमकीन फैक्टि्रयों में भी पांच दिन काम होने से परेशानी और बढ़ गई है।
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कानपुर नगर और कानपुर देहात में मिलाकर 15 के करीब आटा मिलें हैं। इन मिलों में प्रतिदिन 1500-2000 टन आटा, मैदा, सूजी आदि तैयार किया जाता है। किसी आटा मिल की क्षमता 200 टन है तो किसी की 300 या 500 टन। अब इन सब के सामने संकट है। यह सभी मिलें दो शिफ्ट में 24 घंटे चलती थीं। अब एक शिफ्ट बंद कर दी गई है। मिलों में आने वाले कच्चा माल आदि की लोडिंग-अनलोडिंग या हेल्परों को काम के लिए नहीं बुलाया जा रहा है।
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कारोबारियों ने बताया कि युद्ध के चलते उत्पादों की मांग कम हो गई है। कानपुर से पूरे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा बड़ी बिस्कुट फ्रेंचाइजी को उत्पाद भेजे जाते थे। केंद्र सरकार ने औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति में 20 प्रतिशत कटौती के निर्देश दिए हैं। इससे कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव की बिस्कुट, कन्फेक्शनरी, नमकीन, इकाइयों पर संकट आ गया है। इकाइयों ने 20 प्रतिशत उत्पादन कम कर दिया है। साथ ही यह इकाइयां अब सप्ताह में केवल पांच दिन चलेंगी। इससे आटा मिलों में भी उत्पादन घट गया है। कारोबारियों ने बताया कि उत्पादन के अलावा उत्पाद पैकिंग मैटीरियल महंगा हो गया है। आटा सप्लाई वाली प्रति बोरी पहले 10 रुपये की थी वो 15 रुपये में हो गई है। इसके अलावा मिल भी नहीं रही हैं। मैदा, सूजी भरने वाली बोरी 13 रुपये में थी वो 20 रुपये में मिल रही है। प्रति बोरी में सात रुपये की तेजी आ गई। यह बोरी मजबूत ज्यादा होती हैं ताकि लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान न फंटे।
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कानपुर। प्लास्टिक दाना महंगा होने से बारदाना उद्योग पर संकट बढ़ता ही जा रहा है। सरकार ने शहर की कुछ इकाइयों को प्लास्टिक बोरी बारदाना का बड़ा ऑर्डर दिया था लेकिन इन इकाइयों ने लागत मूल्य बढ़ने के बाद इसे तैयार करने से मना कर दिया। गेहूं ओर आलू भरने के लिए बाजार में नए और पुराना बारदाना की जबरदस्त कमी भी आ गई है। गेहूं-आलू को भरने के लिए बोरे नहीं मिल पा रहे हैं। गेहूं कटाई की शुरुआत भी हो गई है जो मार्च के अंत या अप्रैल में अपने चरम पर होगी। ऐसे में किसानों और भंडारण इकाइयों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
आटा फ्लोर मिल संचालकों ने एक शिफ्ट बंद कर दी है। उत्पादन कम होने और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण ऐसा किया गया है। आटा, मैदा और सूजी पैकिंग मैटीरियल के दाम बहुत अधिक हो गए हैं। कारोबारियों के सामने दोेहरा संकट आ गया है। - जितेंद्र सिंह, आटा फ्लोर मिल उद्यमी।

उत्तर प्रदेश के खाद्य तथा रसद विभाग ने सभी कोटेदारों को वितरित अनाज के बाद बचे खाली उपयोगी बोरों को सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। बारदाना के दाम बढ़ गए हैं। शहर की फैक्टि्रयों ने सरकार के ऑर्डर भी वापस कर दिए हैं। - पवन अग्रवाल, अध्यक्ष, कानपुर बारदाना व्यापारी एसोसिएशन।

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