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जहरीला धुआं ले चुका है 5 लाख लोगों की जान, इस रिसर्च में सामने आई ये बात

Mon, 08 Oct 2018 03:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 08 Oct 2018 03:15 PM IST
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Five lakhs deaths caused by poisonous smoke
कानपुर में वायु प्रदूषण

कानपुर आईआईटी के रिसर्च में एक बड़ा खुलासा हुआ है। यह खुलासा वायु प्रदूषण से मौतों को लेकर है। रिसर्च के मुताबिक वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की वजह चूल्हे और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। देश के तमाम शहर जहरीले धुएं के शिकार हैं।

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पिछले दिनों डब्लूएचओ की रिपोर्ट में कानपुर को सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया था। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज (जीबीडी) ने देशभर में वायु प्रदूषण से पांच लाख मौतें होने का आंकड़ा दिया था। आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. तरुण कुमार गुप्ता के निर्देशन में डॉ. प्रशांत राजपूत और सैफी इजहार ने 2015-16 में शोध शुरू किया था। 
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कानपुर महानगर को सेंटर में रखकर देश की राजधानी दिल्ली, यूपी की लखनऊ, नोएडा समेत तमाम शहरों से आंकड़े जुटाए गए। रिसर्च में खुलासा हुआ कि एयर पॉल्यूशन में 73 प्रतिशत धूल के कण पीएम 2.5 से ऊपर हैं जो सिर्फ शरीर के ऊपरी हिस्सों के लिए खतरनाक हैं लेकिन छोटे कण महज 27 फीसद मौजूदगी के बावजूद लोगों को सब क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव, पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी), टीबीएल कैंसर, अस्थमा और काली खांसी जैसी जानलेवा बीमारियां दे रहे हैं। जो पांच लाख मौतें हुई हैं उनमें 70 फीसद की जान धूल के इन्हीं छोटे कणों ने ली है। आईआईटी स्टू़डेंट्स का शोध इंटरनेशनल जनरल में भी प्रकाशित हो चुका है।

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