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लॉकडाउन: मध्य प्रदेश के छतरपुर के लिए पैदल निकले पांच मजदूर, बिहार से पांच दिन में पहुंचे कानपुर
Wed, 01 Apr 2020 11:26 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 01 Apr 2020 11:26 PM IST
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बिहार से पांच दिन में पहुंचे कानपुर
- फोटो : amar ujala
बिहार के बेतिया से पांच मजदूर लगभग 500 किमी की पैदल यात्रा कर कानपुर पहुंचे। नौबस्ता चौराहे पर बुधवार को खाना खाने को खाना खाया। इसमें से एक को बुखार भी आ गया। इन्हें छतरपुर जाना है।मूलरूप से मध्यप्रदेश के छतरपुर में रहने वाले चंद्रकमल, उदयभान, दीपक, सोहन और रूपनारायण बिहार के बेतिया में प्लांट में मजदूरी करते हैं।
उन्होंने बताया कि 24 मार्च को प्लांट पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इसके बाद मालिक ने उन्हें चार हजार रुपये देकर जाने को कहा। कोई साधन न मिलने पर वह शार्टकट के चक्कर में बेतिया के जंगल और नदियों को पार करते हुए गोरखपुर पहुंचे। रास्ते में मिलने वाले गांव में लोगों ने खाना खिलाया। गोरखपुर से बस्ती फिर ट्रक से लखनऊ पहुंचे। वहां से पैदल कानपुर।
अब हिम्मत जवाब दे गई है। छतरपुर तक करीब 168 किमी का सफर अभी बाकी है। उदयभान को तेज बुखार आने के कारण सभी ने नौबस्ता चौराहे पर ही छाया में बैठ कर आराम किया। एक पोस्टर पर लिखे एंबुलेंस के नंबर पर कॉल किया तो एंबुलेंस के ड्राइवर ने उदयभान को पास के मेडिकल स्टोर से बुखार की दवा दिलवा दी और चला गया।
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उन्होंने बताया कि 24 मार्च को प्लांट पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इसके बाद मालिक ने उन्हें चार हजार रुपये देकर जाने को कहा। कोई साधन न मिलने पर वह शार्टकट के चक्कर में बेतिया के जंगल और नदियों को पार करते हुए गोरखपुर पहुंचे। रास्ते में मिलने वाले गांव में लोगों ने खाना खिलाया। गोरखपुर से बस्ती फिर ट्रक से लखनऊ पहुंचे। वहां से पैदल कानपुर।
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अब हिम्मत जवाब दे गई है। छतरपुर तक करीब 168 किमी का सफर अभी बाकी है। उदयभान को तेज बुखार आने के कारण सभी ने नौबस्ता चौराहे पर ही छाया में बैठ कर आराम किया। एक पोस्टर पर लिखे एंबुलेंस के नंबर पर कॉल किया तो एंबुलेंस के ड्राइवर ने उदयभान को पास के मेडिकल स्टोर से बुखार की दवा दिलवा दी और चला गया।
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