आईआईटी धनबाद के निदेशक सहित चार प्रोफेसरों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा
- दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला ने उत्पीड़न और बदनाम करने की साजिश का लगाया आरोप
- ई-मेल के जरिए बदनाम करने पर एक अज्ञात के खिलाफ भी मामला हुआ दर्ज
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आईआईटी कानपुर में दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला के उत्पीड़न मामले में फंसे आईआईटी धनबाद के निदेशक डॉ. राजीव शेखर सहित चारों सीनियर प्रोफेसरों के खिलाफ रविवार को पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली।
डॉ. राजीव के अलावा डॉ. ईशान, डॉ. संजय मित्तल, डॉ. चंद्रशेखर उपाध्याय और एक अज्ञात शख्स के खिलाफ आईटी एक्ट, मानहानि, एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। इंस्पेक्टर सतीश कुमार सिंह ने बताया कि डॉ. सडरेला ने सभी के खिलाफ थाने में तहरीर दी थी।
मामले की जांच सीओ कल्याणपुर को सौंपी गई है। आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने एफआईआर दर्ज होने की जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सोमवार को इस मामले में जानकारी देंगे।
नियुक्ति के पहले से ही प्रताड़ना शुरू कर दी थी
डॉ. सडरेला ने आरोप लगाया है कि नियुक्ति से पहले और बाद में उनके खिलाफ चारों प्रोफेसरों ने साजिश रची। गलत तरीके से उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए प्रोफेसरों के बीच बैठकें कीं और आपत्तिजनक बातें भी कहीं। डॉ. सडरेला ने कहा कि जब उन्होंने इसकी शिकायत की तो मामला साफ हो गया। दो अलग-अलग जांच कमेटी ने चारों प्रोफेसरों को दोषी ठहराया। नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) ने भी चारों पर कार्रवाई के लिए निदेशक और विभागाध्यक्ष को कई बार निर्देश जारी किया।
बीओजी से पहले ई-मेल ने मचाया था हड़कंप
एफआईआर में डॉ. सडरेला का आरोप है कि 17 अक्तूबर को इंस्टीट्यूट के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) की बैठक थी। इसमें चारों प्रोफेसरों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित होनी थी, लेकिन चारों प्रोफेसरों ने मिलकर 15 अक्तूबर को एक फेक ई-मेल अकाउंट के जरिए निदेशक सहित सभी प्रोफेसरों को ई-मेल किया। इसमें मुझे (डॉ. सडरेला) बदनाम करने के लिए आरोप लगाया गया कि मेरी पीएचडी की थिसीस चोरी की हुई है। ई-मेल जारी करने वाले के खिलाफ भी डॉ. सडरेला ने अज्ञात में एफआईआर दर्ज कराई है।
प्रो. देबोपम दास और प्रो. एमएलएन राव पर भी लगे आरोप
अभी तक प्रो. राजीव शेखर, प्रो. संजय मित्तल, प्रो. सीएस उपाध्याय और प्रो. ईशान शर्मा पर दलित उत्पीड़न का आरोप लगा था लेकिन डॉ. सडरेला ने बीओजी के सदस्य प्रो. देबोपम दास और प्रो. एमएलएन राव पर भी एफआईआर में गंभीर आरोप लगा दिए हैं। डॉ. सडरेला का आरोप है कि इन्हीं दोनों प्रोफेसरों के दबाव के चलते बोर्ड ने चारों प्रोफेसरों को सर्विस रूल्स के उल्लंघन का दोषी तो माना लेकिन एससी-एसटी मामले से बरी कर दिया। प्रो. देबोपम पर डॉ. सडरेला ने मानसिक तौर पर उत्पीड़न करने का भी आरोप लगाया है। हालांकि मामले में पुलिस ने इन दोनों के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की है।