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Kanpur News: स्कूटी की प्रक्रिया के लिए छात्राओं को कराया घंटों इंतजार, हुईं बेहाल

Mon, 31 Aug 2026 02:26 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2026 02:26 AM IST
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Female students left distressed after being made to wait for hours for the scooter distribution process.
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में रविवार को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की प्रक्रिया के दौरान छात्राएं जमकर परेशान हुईं। उन्हें आधार सत्यापन के लिए कई घंटे लाइन लगानी पड़ी। यह समस्या दोपहर तक ज्यादा थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भीड़ बढ़ने पर कर्मचारियों की संख्या में इजाफा किया। शुरुआत में एक कर्मचारी के भरोसे व्यवस्था थी। छात्राएं गर्मी व उमस में बेहाल रहीं। देर रात तक आधार सत्यापन का कार्य हुआ।
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स्कूटी योजना के तहत विवि से संबद्ध महाविद्यालयों से 2196 छात्राओं का चयन हुआ है। विश्वविद्यालय की ओर से शनिवार रात छात्राओं को फोन कर सूचित किया गया था कि आधार सत्यापन के लिए ओटीपी की आवश्यकता होगी। उन्हें विश्वविद्यालय पहुंचना होगा। सूचना देर से मिलने और त्योहार के चलते कई छात्राएं अपने घरों या शहर से बाहर थीं। इसके बावजूद दूर-दराज के जिलों से छात्राएं किसी तरह विश्वविद्यालय पहुंचीं।
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सत्यापन केंद्र पर सुबह से ही छात्राओं की भीड़ जुट गई। शुरुआत में केवल एक कर्मचारी के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कार्य हो रहा था, जिससे लाइन लंबी हो गई। तेज धूप के बावजूद छाया या बैठने की कोई सुविधा नहीं थीं। छात्राओं को असुविधा का सामना करना पड़ा। बताया गया कि विश्वविद्यालय की अंतिम वर्ष की परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाली शीर्ष पांच प्रतिशत छात्राओं को ही स्कूटी का लाभ मिलेगा। इसी कारण काफी संख्या में छात्राएं विश्वविद्यालय पहुंचीं। भीड़ बढ़ने और छात्राओं की परेशानी पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की। छात्राओं व उनके अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर व्यवस्थाएं न रखने के आरोप लगाए।
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दो छात्राएं एक प्रमाण पत्र
औरैया से आई छात्रा पायल कुशवाहा ने बताया कि उसका नाम पहले लिस्ट में था। जब वह विश्वविद्यालय पहुंची तो पता चला कि उनका आय प्रमाण पत्र ठीक नहीं है। पायल का कहना है कि उनके कॉलेज की छात्रा सौम्या गूर्जर का प्रमाण पत्र भी उनके आवेदन में अपलोड कर दिया गया, जबकि उन्होंने अपना अलग प्रमाण पत्र दिया था। देर शाम तक छात्रा गलती को सुधारने का प्रयास करती रही, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई।
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