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पहले फेल, अब पास
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Aug 2016 01:10 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) नई दिल्ली में प्रति नियुक्ति पर तैनाती पाने वाली हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एचबीटीआई) की डॉ. सपना पर बीटेक फाइनल ईयर के स्टूडेंट अलक्षेंद्र प्रताप सिंह को मैथमेटिक्स थर्ड पेपर (एचएमए-301) में जानबूझकर फेल करने का आरोप लगा है। यह अपने तरह का पहला मामला है। इस मामले में स्टूडेंट ने लड़ाई छेड़ी और अच्छे मार्क्स से पास हो गया। अब स्टूडेंट ने संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कहा है कि ऐसे शिक्षक को काली सूची में डाला जाना चाहिए।
एचबीटीआई में बीटेक (फूड टेक्नोलॉजी) फाइनल ईयर के स्टूडेंट अलक्षेंद्र ने दिसंबर 2015 में मैथमेटिक्स का पेपर दिया था।
100 में से 90 मार्क्स का क्वेश्चन हल किया। यह कॉपी मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट की डॉ. सपना सिंह ने जांची और 35 मार्क्स देकर पल्ला झाड़ लिया। रिजल्ट आया तो अलक्षेेंद्र फेल हो गए। इस पर स्टूडेंट ने आपत्ति की। टीचर पर जानबूझकर फेल करने का आरोप लगाया। साथ ही 5000 रुपये अतिरिक्त फीस जमा करके प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) के कुलपति प्रो. विनय पाठक से दोबारा कॉपी जंचवाने की मांग की। इस पर प्रमुख सचिव और कुलपति ने एचबीटीआई निदेशक प्रो. दिनेश बाबू शाक्यवार को कड़ा पत्र लिखा। अफसरों ने कहा कि एक्सपर्ट कमेटी नामित करके मैथमेटिक्स की कॉपी दोबारा जंचवाई जाए। यह मामला गंभीर है। स्टूडेंटों को जानबूझकर फेल करने वाले शिक्षक को काली सूची में डाला जाना चाहिए। इसी का नतीजा रहा कि एचबीटीआई के प्रो. एसयू सिद्दीकी और उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान (यूपीटीटीआई) के प्रो. मुकेश से अलग-अलग कॉपी जंचवाई गई। इन्होंने अलक्षेंद्र को मैथमेटिक्स में क्रमश: 58 और 60 मार्क्स दिए, जो डॉ. सपना द्वारा दिए गए 35 मार्क्स से कहीं ज्यादा हैं। एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के बाद अलक्षेंद्र को 58 मार्क्स देकर पास कर दिया गया। इसका रिजल्ट 25 जुलाई 2016 को आ गया। इस संबंध में जेएनयू में तैनात डॉ. सपना से मोबाइल पर बात करने की कोशिश की गई, इससे संबंधित एसएमएस भी डाले गए लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस मामले में उनका पक्ष आना बाकी है।
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एचबीटीआई में बीटेक (फूड टेक्नोलॉजी) फाइनल ईयर के स्टूडेंट अलक्षेंद्र ने दिसंबर 2015 में मैथमेटिक्स का पेपर दिया था।
100 में से 90 मार्क्स का क्वेश्चन हल किया। यह कॉपी मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट की डॉ. सपना सिंह ने जांची और 35 मार्क्स देकर पल्ला झाड़ लिया। रिजल्ट आया तो अलक्षेेंद्र फेल हो गए। इस पर स्टूडेंट ने आपत्ति की। टीचर पर जानबूझकर फेल करने का आरोप लगाया। साथ ही 5000 रुपये अतिरिक्त फीस जमा करके प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) के कुलपति प्रो. विनय पाठक से दोबारा कॉपी जंचवाने की मांग की। इस पर प्रमुख सचिव और कुलपति ने एचबीटीआई निदेशक प्रो. दिनेश बाबू शाक्यवार को कड़ा पत्र लिखा। अफसरों ने कहा कि एक्सपर्ट कमेटी नामित करके मैथमेटिक्स की कॉपी दोबारा जंचवाई जाए। यह मामला गंभीर है। स्टूडेंटों को जानबूझकर फेल करने वाले शिक्षक को काली सूची में डाला जाना चाहिए। इसी का नतीजा रहा कि एचबीटीआई के प्रो. एसयू सिद्दीकी और उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान (यूपीटीटीआई) के प्रो. मुकेश से अलग-अलग कॉपी जंचवाई गई। इन्होंने अलक्षेंद्र को मैथमेटिक्स में क्रमश: 58 और 60 मार्क्स दिए, जो डॉ. सपना द्वारा दिए गए 35 मार्क्स से कहीं ज्यादा हैं। एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के बाद अलक्षेंद्र को 58 मार्क्स देकर पास कर दिया गया। इसका रिजल्ट 25 जुलाई 2016 को आ गया। इस संबंध में जेएनयू में तैनात डॉ. सपना से मोबाइल पर बात करने की कोशिश की गई, इससे संबंधित एसएमएस भी डाले गए लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस मामले में उनका पक्ष आना बाकी है।
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