{"_id":"60fef9c28ebc3e580b0e5021","slug":"father-will-go-to-high-court-against-punishment-kanpur-news-knp6425838100","type":"story","status":"publish","title_hn":"सजा के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगा पिता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सजा के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगा पिता
विज्ञापन
फोटो- 18- आजीवन कारावास के फैसले के बाद अदालत के बाहर सभी अभियुक्तों को जेल ले जाती पुलिस टीम। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
खोही (चित्रकूट)। जुड़वां बच्चों के अपहरण के बाद हत्या के मामले में तीन दोषियों को डबल उम्रकैद और दो को उम्रकैद की सजा से नाखुश बच्चों के पिता बृजेश रावत का कहना है कि सभी दोषियों को फांसी की सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। कहा कि ऐसे अपराधियों को फांसी की सजा से कम नहीं मिलनी चाहिए थी, फिर भी फांसी के तख्ते तक दोषियों को ले जाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
12 फरवरी 2019 को रामघाट निवासी तेल उद्यमी बृजेश रावत के जुड़वां बेटों प्रियांश व श्रेयांश का स्कूल से लौटते समय स्कूली बस में हथियारों के बल पर छह लोगों ने फिरौती के लिए अपहरण कर लिया था। मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें एक ने सतना की जेल में खुदकुशी कर ली थी। सोमवार को इस बहुचर्चित मामले में मध्यप्रदेश के सतना के एडी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश प्रदीप सिंह कछवाह ने पांच दोषियों में तीन मुख्य आरोपी मंदिर के पुजारी के बेटे जानकीकुंड के पदमाकांत शुक्ला, बबेरू के राजू द्विवेदी व बिसंडा के लकी तोमर को डबल उम्रकैद, जबकि बिहार प्रांत के विक्रमाजीत सिंह व बिसंडा के अपूर्व उर्फ पिंटा यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई।
न्यायाधीश ने 226 पृष्ठों में यह फैसला सुनाया। उधर, सजा सुनाए जाने के बाद जुड़वां बच्चों के उद्यमी पिता बृजेश रावत ने कहा कि वह अपने बच्चों को ठीक से न्याय नहीं दिला सके। जिस तरह से अपराध किया गया था, उसके बाद अपराधी समाज में रहने लायक नहीं है। ऐसे अपराधियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। कहा कि पांचों दोषियों के लिए फांसी की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट में दायर की जाएगी। उधर, जुड़वां बच्चों की मां बबिता ने भी फांसी की सजा की मांग की है। रोते हुए कहा कि उसे पूरी उम्मीद थी कि मुख्य दोषियों को फांसी की सजा होगी।
विज्ञापन
इंसेट---
दोषियाें का बाइक सवार ने किया था पीछा
चित्रकूट। घटना के दिन अपहरण कर बाइक से ले जाते समय दूसरी बाइक से टक्कर हो गई थी। मामले को लेकर बाइक सवार मनोज मिश्रा ने पीछा भी किया था। उसने देखा कि बच्चों को एक बोलेरो में बैठाया जा रहा है, इसके बाद उसने पुलिस को जानकारी दी थी। इसके बाद भी पुलिस सक्रिय नहीं रही। जब पुलिस पहुंची तो बोलेरो का पता नहीं चला। फिरौती के लिए अपहरण की योजना दीपावली मेले के दौरान बनी थी। सभी दोषी बेहद शातिर थे और नए नंबर के मोबाइल फोन से आपस में बात करते थे, लेकिन जुड़वां बच्चों के परिजनों से जब फिरौती की बात करते थे तो इंटरनेट कॉल पर बात की थी, जिससे पुलिस इनका ठिकाना नहीं ढूंढ पा रही थी। 20 लाख रुपये मिलने के बाद हिस्सा बांट में आपस में अधिक रुपये लेने को विवाद हुआ था। बच्चों को अतर्रा के एक किराये के घर में रखा था। पहचान उजागर होने के डर से बच्चों को मार दिया था। इस मामले में सबसे पहले राजू द्विवेदी पकड़ा गया था, जिसने फिरौती की रकम से नई बाइक खरीदी थी।
इंसेट---
विश्वविद्यालय के छात्र ही निकले थे हत्यारे
चित्रकूट। जुड़वां बच्चों के अपहरण कांड के खुलासा के लिए यूपी सहित एमपी पुलिस लग गई थी, लेकिन इस कांड को अंजाम देने वालों में कोई अपराधी नहीं बल्कि महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के छात्र सहित मासूमों को ट्यूशन पढ़ाने वाला ही था, जिससे पुलिस को जल्द सुराग नहीं लग सका। जिससे एमपी सहित यूपी पुलिस की किरकिरी हो गई थी। इस हत्याकांड के बाद जब एमपी पुलिस ने खुलासा किया तो सभी हैरान रह गए थे। (संवाद)
इंसेट---
ये था पूरा घटनाक्रम
जुड़वां बच्चे चित्रकूट के मप्र के सद्गुरुपब्लिक स्कूल में पढ़ते थे। 12 फरवरी 2019 को करीब दोपहर एक बजे स्कूल की छुट्टी हुई। बाइक से आए दो नकाबपोशों ने तमंचे के बल पर दोनों का अपहरण कर लिया।
-13 फरवरी की रात करीब 12 फोन कर फिरौती मांगी, जिसमें दो करोड़ की मांग रखी गई थी। बाद में एक करोड़ फिर 50 लाख अंत में 20 लाख में बात बनी। फिरौती के लिए आरोपियों ने अपने मोबाइल नंबर से नहीं, बल्कि राहगीर के फोन से किया।
-20 फरवरी को फिर फोन आया, जिस पर बच्चों के पिता से बांदा जिले के बदौसा के चौसर गांव के पास 20 लाख रुपये ले लिए। 21 फरवरी को जब बच्चे नहीं मिले तो शक बढ़ गया।
-22 फरवरी की रात एमपी पुलिस को एक अपराधी मिल गया। उसके सहारे 23 फरवरी की शाम तक सभी छह आरोपी पकड़े गए। इनसे पता चला कि बच्चों को जंजीर पत्थर बांधकर बबेरू क्षेत्र के यमुना नदी में फेंक दिया गया। बार-बार बाइक बदलते थे। ताकि किसी को उनके बारे में शक न हो।
यूपी व एमपी की सरकार ने की थी निंदा
चित्रकूट। मासूम जुड़वां भाइयों के हत्याकांड को लेकर एमपी सहित यूपी की सरकार के मुख्यमंत्री ने घटना को लेकर निंदा की थी। वही सत्ता पक्ष व विपक्षी दल के कई नेता मृतक बच्चों के घर पहुंचे। जिसमेें घटना के समय मप्र प्रदेश में कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री कमलनाथ थे। जिन्होंने दो मंत्रियों को परिवार से मिलने के लिए भेजा था। वही उस समय पूर्व मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान परिजनों ंसे मिलने चित्रकूट आए थे। यूपी क्षेत्र से भी कई मंत्री व विधायक परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया था। सजा मिलने पर जनप्रतिनिधियों ने संतोष जताया है। (संवाद)
पूरी तरह से रखी गई बंदी
चित्रकूट। घटना के दिन 12 फरवरी 2019 को चित्रकूट जिला सहित एमपी के सतना जिले में पूरी तरह से बंदी थी। कई संगठनों ने मिलकर प्रदर्शन कर विरोध किया था। जगह-जगह जाम लगाकर विरोध जताया गया था। इस कांड को लेकर कई घरों में खाना नहीं बना था। स्थानीय महिलाएं रोती बिलखती देखी गई थी। (संवाद)
उम्रकैद की सजा पर जताया संतोष
चित्रकूट। हत्याकांड को लेकर सद्गुरु सेवा ट्रस्ट के निदेशक डा. बीके जैन व डा. इलेश जैन सहित जिले के प्रतिनिधियों सांसद आर के सिंह पटेल, लोक निर्माण मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, जिलाध्यक्ष चंद्र प्रकाश खरे, सपा के जिलाध्यक्ष अनुज यादव, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कुशल सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज मिश्रा, बसपा जिलाध्यक्ष शिवबाबू वर्मा आदि ने संतोष जाहिर किया है। (संवाद)
ये होता है डबल आजीवन कारावास
चित्रकूट। जिले के अधिवक्ता रुद्र प्रसाद मिश्र ने बताया कि आमतौर पर आजीवन कारावास की सजा ही होती है। अदालत ने यह जो डबल आजीवन कारावास की सजा सुनाई है उसका अर्थ एक बार 14 साल की जेल की सजा खत्म होने के बाद इन तीनों को फिर से 14 साल की सजा भुगतनी होगी। (संवाद)
विज्ञापन
12 फरवरी 2019 को रामघाट निवासी तेल उद्यमी बृजेश रावत के जुड़वां बेटों प्रियांश व श्रेयांश का स्कूल से लौटते समय स्कूली बस में हथियारों के बल पर छह लोगों ने फिरौती के लिए अपहरण कर लिया था। मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें एक ने सतना की जेल में खुदकुशी कर ली थी। सोमवार को इस बहुचर्चित मामले में मध्यप्रदेश के सतना के एडी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश प्रदीप सिंह कछवाह ने पांच दोषियों में तीन मुख्य आरोपी मंदिर के पुजारी के बेटे जानकीकुंड के पदमाकांत शुक्ला, बबेरू के राजू द्विवेदी व बिसंडा के लकी तोमर को डबल उम्रकैद, जबकि बिहार प्रांत के विक्रमाजीत सिंह व बिसंडा के अपूर्व उर्फ पिंटा यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई।
विज्ञापन
न्यायाधीश ने 226 पृष्ठों में यह फैसला सुनाया। उधर, सजा सुनाए जाने के बाद जुड़वां बच्चों के उद्यमी पिता बृजेश रावत ने कहा कि वह अपने बच्चों को ठीक से न्याय नहीं दिला सके। जिस तरह से अपराध किया गया था, उसके बाद अपराधी समाज में रहने लायक नहीं है। ऐसे अपराधियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। कहा कि पांचों दोषियों के लिए फांसी की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट में दायर की जाएगी। उधर, जुड़वां बच्चों की मां बबिता ने भी फांसी की सजा की मांग की है। रोते हुए कहा कि उसे पूरी उम्मीद थी कि मुख्य दोषियों को फांसी की सजा होगी।
विज्ञापन
इंसेट---
दोषियाें का बाइक सवार ने किया था पीछा
चित्रकूट। घटना के दिन अपहरण कर बाइक से ले जाते समय दूसरी बाइक से टक्कर हो गई थी। मामले को लेकर बाइक सवार मनोज मिश्रा ने पीछा भी किया था। उसने देखा कि बच्चों को एक बोलेरो में बैठाया जा रहा है, इसके बाद उसने पुलिस को जानकारी दी थी। इसके बाद भी पुलिस सक्रिय नहीं रही। जब पुलिस पहुंची तो बोलेरो का पता नहीं चला। फिरौती के लिए अपहरण की योजना दीपावली मेले के दौरान बनी थी। सभी दोषी बेहद शातिर थे और नए नंबर के मोबाइल फोन से आपस में बात करते थे, लेकिन जुड़वां बच्चों के परिजनों से जब फिरौती की बात करते थे तो इंटरनेट कॉल पर बात की थी, जिससे पुलिस इनका ठिकाना नहीं ढूंढ पा रही थी। 20 लाख रुपये मिलने के बाद हिस्सा बांट में आपस में अधिक रुपये लेने को विवाद हुआ था। बच्चों को अतर्रा के एक किराये के घर में रखा था। पहचान उजागर होने के डर से बच्चों को मार दिया था। इस मामले में सबसे पहले राजू द्विवेदी पकड़ा गया था, जिसने फिरौती की रकम से नई बाइक खरीदी थी।
इंसेट---
विश्वविद्यालय के छात्र ही निकले थे हत्यारे
चित्रकूट। जुड़वां बच्चों के अपहरण कांड के खुलासा के लिए यूपी सहित एमपी पुलिस लग गई थी, लेकिन इस कांड को अंजाम देने वालों में कोई अपराधी नहीं बल्कि महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के छात्र सहित मासूमों को ट्यूशन पढ़ाने वाला ही था, जिससे पुलिस को जल्द सुराग नहीं लग सका। जिससे एमपी सहित यूपी पुलिस की किरकिरी हो गई थी। इस हत्याकांड के बाद जब एमपी पुलिस ने खुलासा किया तो सभी हैरान रह गए थे। (संवाद)
इंसेट---
ये था पूरा घटनाक्रम
जुड़वां बच्चे चित्रकूट के मप्र के सद्गुरुपब्लिक स्कूल में पढ़ते थे। 12 फरवरी 2019 को करीब दोपहर एक बजे स्कूल की छुट्टी हुई। बाइक से आए दो नकाबपोशों ने तमंचे के बल पर दोनों का अपहरण कर लिया।
-13 फरवरी की रात करीब 12 फोन कर फिरौती मांगी, जिसमें दो करोड़ की मांग रखी गई थी। बाद में एक करोड़ फिर 50 लाख अंत में 20 लाख में बात बनी। फिरौती के लिए आरोपियों ने अपने मोबाइल नंबर से नहीं, बल्कि राहगीर के फोन से किया।
-20 फरवरी को फिर फोन आया, जिस पर बच्चों के पिता से बांदा जिले के बदौसा के चौसर गांव के पास 20 लाख रुपये ले लिए। 21 फरवरी को जब बच्चे नहीं मिले तो शक बढ़ गया।
-22 फरवरी की रात एमपी पुलिस को एक अपराधी मिल गया। उसके सहारे 23 फरवरी की शाम तक सभी छह आरोपी पकड़े गए। इनसे पता चला कि बच्चों को जंजीर पत्थर बांधकर बबेरू क्षेत्र के यमुना नदी में फेंक दिया गया। बार-बार बाइक बदलते थे। ताकि किसी को उनके बारे में शक न हो।
यूपी व एमपी की सरकार ने की थी निंदा
चित्रकूट। मासूम जुड़वां भाइयों के हत्याकांड को लेकर एमपी सहित यूपी की सरकार के मुख्यमंत्री ने घटना को लेकर निंदा की थी। वही सत्ता पक्ष व विपक्षी दल के कई नेता मृतक बच्चों के घर पहुंचे। जिसमेें घटना के समय मप्र प्रदेश में कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री कमलनाथ थे। जिन्होंने दो मंत्रियों को परिवार से मिलने के लिए भेजा था। वही उस समय पूर्व मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान परिजनों ंसे मिलने चित्रकूट आए थे। यूपी क्षेत्र से भी कई मंत्री व विधायक परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया था। सजा मिलने पर जनप्रतिनिधियों ने संतोष जताया है। (संवाद)
पूरी तरह से रखी गई बंदी
चित्रकूट। घटना के दिन 12 फरवरी 2019 को चित्रकूट जिला सहित एमपी के सतना जिले में पूरी तरह से बंदी थी। कई संगठनों ने मिलकर प्रदर्शन कर विरोध किया था। जगह-जगह जाम लगाकर विरोध जताया गया था। इस कांड को लेकर कई घरों में खाना नहीं बना था। स्थानीय महिलाएं रोती बिलखती देखी गई थी। (संवाद)
उम्रकैद की सजा पर जताया संतोष
चित्रकूट। हत्याकांड को लेकर सद्गुरु सेवा ट्रस्ट के निदेशक डा. बीके जैन व डा. इलेश जैन सहित जिले के प्रतिनिधियों सांसद आर के सिंह पटेल, लोक निर्माण मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, जिलाध्यक्ष चंद्र प्रकाश खरे, सपा के जिलाध्यक्ष अनुज यादव, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कुशल सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज मिश्रा, बसपा जिलाध्यक्ष शिवबाबू वर्मा आदि ने संतोष जाहिर किया है। (संवाद)
ये होता है डबल आजीवन कारावास
चित्रकूट। जिले के अधिवक्ता रुद्र प्रसाद मिश्र ने बताया कि आमतौर पर आजीवन कारावास की सजा ही होती है। अदालत ने यह जो डबल आजीवन कारावास की सजा सुनाई है उसका अर्थ एक बार 14 साल की जेल की सजा खत्म होने के बाद इन तीनों को फिर से 14 साल की सजा भुगतनी होगी। (संवाद)

फोटो-14- फाइल फोटो- प्रियांश व श्रेयांश।- फोटो : CHITRAKOOT