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लॉकडाउन में नियमों का पालन कर शवों को घाट तक पहुंचा रहा तपस्वी सेवा रथ
Sat, 25 Apr 2020 12:52 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 25 Apr 2020 12:52 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में लॉकडाउन में शव यात्रा निकालने में लोगों को परेशानी से बचाने के लिए तपस्वी सेवा रथ उनका साथ दे रहा है। समाजसेवी अशोक तपस्वी खुद वाहन चलाकर शवों का अंतिम संस्कार करा रहे हैं।
लॉकडाउन में केवल परिवार के लोगों को ही अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति है। ऐसे में तपस्वी का सेवा रथ वारिस शवों को भिटौरा घाट पहुंचाने के लिए सिर्फ 2100 रुपये ले रहा है। लावारिस शवों को मुफ्त में भिटौरा पहुंचाने के साथ अंतिम संस्कार में आने वाला खर्च भी तपस्वी खुद वहन करते हैं।
लोग शव ले जाने के लिए फोन कर तपस्वी सेवा रथ को बुलाते हैं। समाजसेवी अशोक तपस्वी ने बताया कि संक्रमण फैलने का डर, लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के नियम ऐसे परिवारों के लिए परेशानी बन रहे हैं। पिता के दिवंगत होने पर शुरू की गई तपस्वी सेवा रथ गरीबों के लिए मुफ्त है।
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लॉकडाउन में रथ की मांग अधिक है। प्रतिदिन 30 से 40 फोन आते हैं। जल्द ही एक वाहन और खरीदने की कोशिश की जा रही है। जनपद के ललौली थानाक्षेत्र का उरौली गांव इनका पैतृक है। हालांकि जन्म पुणे में हुआ था। अशोक तपस्वी यह कार्य यह कई सालों से कर रहे हैं।
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लॉकडाउन में केवल परिवार के लोगों को ही अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति है। ऐसे में तपस्वी का सेवा रथ वारिस शवों को भिटौरा घाट पहुंचाने के लिए सिर्फ 2100 रुपये ले रहा है। लावारिस शवों को मुफ्त में भिटौरा पहुंचाने के साथ अंतिम संस्कार में आने वाला खर्च भी तपस्वी खुद वहन करते हैं।
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लोग शव ले जाने के लिए फोन कर तपस्वी सेवा रथ को बुलाते हैं। समाजसेवी अशोक तपस्वी ने बताया कि संक्रमण फैलने का डर, लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के नियम ऐसे परिवारों के लिए परेशानी बन रहे हैं। पिता के दिवंगत होने पर शुरू की गई तपस्वी सेवा रथ गरीबों के लिए मुफ्त है।
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लॉकडाउन में रथ की मांग अधिक है। प्रतिदिन 30 से 40 फोन आते हैं। जल्द ही एक वाहन और खरीदने की कोशिश की जा रही है। जनपद के ललौली थानाक्षेत्र का उरौली गांव इनका पैतृक है। हालांकि जन्म पुणे में हुआ था। अशोक तपस्वी यह कार्य यह कई सालों से कर रहे हैं।