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रोजा अल्लाह का दिया हुआ एक बेशकीमती तोहफा : अनफासुल हसन
Mon, 09 Mar 2026 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 09 Mar 2026 12:36 AM IST
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डेरापुर। रवींद्र नगर स्थित आस्तान ए रफीकिया चिश्तिया परिसर में शनिवार को 17वें रोजा पर इफ्तार का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में रोजेदारों ने रोजा इफ्तार कर नमाज अदा की। मुल्क के अमन और तरक्की के लिए दुआ मांगी।
रोजा इफ्तार के पहले मौलाना मुफ्ती अनफासुल हसन चिश्ती ने कहा कि रोजा अल्लाह का दिया हुआ एक बेशकीमती तोहफा है। रमजान का पाक महीना रोजा और नमाज के जरिए हमें अल्लाह तआला और उनके प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के प्रति गहरा लगाव पैदा करता है। हमें नबी की सुन्नतों पर अमल करने और अल्लाह की इबादत की राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा कि कुरआन पाक में अल्लाह फरमाते हैं। ऐ ईमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किए गए जैसे उन लोगों पर फर्ज किए गए थे जो तुमसे पहले गुजर चुके थे। रोजा केवल भूख-प्यास सहना नहीं, बल्कि नजर, कान, जीभ और दिल का भी रोजा है। मौलाना ने आगे बताया कि रमजान में तरावीह और कुरआन तिलावत से अल्लाह की रहमतों का दरिया बहता है। खजूर से रोजा इफ्तार करना हजरत नबी की सुन्नत है, जो सेहरी के साथ रोजे को पूरा करता है। उन्होंने मौजूद लोगों से अपील की कि इस पाक महीने में जकात, सदका और पड़ोसियों के साथ भोजन बांटकर अल्लाह की इबादत करें। इफ्तार के बाद सभी ने मगरिब की नमाज अदा कर दुआएं कीं और रमजान के बाकी रोजों को रखने के लिए संकल्प लिया।
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रोजा इफ्तार के पहले मौलाना मुफ्ती अनफासुल हसन चिश्ती ने कहा कि रोजा अल्लाह का दिया हुआ एक बेशकीमती तोहफा है। रमजान का पाक महीना रोजा और नमाज के जरिए हमें अल्लाह तआला और उनके प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के प्रति गहरा लगाव पैदा करता है। हमें नबी की सुन्नतों पर अमल करने और अल्लाह की इबादत की राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
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उन्होंने कहा कि कुरआन पाक में अल्लाह फरमाते हैं। ऐ ईमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किए गए जैसे उन लोगों पर फर्ज किए गए थे जो तुमसे पहले गुजर चुके थे। रोजा केवल भूख-प्यास सहना नहीं, बल्कि नजर, कान, जीभ और दिल का भी रोजा है। मौलाना ने आगे बताया कि रमजान में तरावीह और कुरआन तिलावत से अल्लाह की रहमतों का दरिया बहता है। खजूर से रोजा इफ्तार करना हजरत नबी की सुन्नत है, जो सेहरी के साथ रोजे को पूरा करता है। उन्होंने मौजूद लोगों से अपील की कि इस पाक महीने में जकात, सदका और पड़ोसियों के साथ भोजन बांटकर अल्लाह की इबादत करें। इफ्तार के बाद सभी ने मगरिब की नमाज अदा कर दुआएं कीं और रमजान के बाकी रोजों को रखने के लिए संकल्प लिया।
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