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फर्रुखाबाद: आपराधिक इतिहास छिपा बनी दरोगा, मृतक आश्रित कोटे से पाई नौकरी
Sun, 27 Sep 2020 03:51 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 27 Sep 2020 03:51 PM IST
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यूपी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
फर्रुखाबाद में आपराधिक इतिहास छिपाकर पुलिस में भर्ती हुई महिला दरोगा के मामले की जांच रिपोर्ट एसपी ने एएसपी को सौंप दी है। दरोगा के पारिवारिक फूफा की शिकायत पर तत्कालीन मेरठ आईजी ने यहां के डीएम से कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद यह मामला सामने आया।
वर्ष 2014 में मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव कुइयां बूट निवासी आरती गौड़ के सिपाही भाई की लखीमपुर खीरी में तैनाती के दौरान मौत हो गई थी। आरती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को भाई पर आश्रित बताया। हाईकोर्ट के आदेश पर मृतक आश्रित कोटे में आरती की दरोगा के पद पर नौकरी लग गई।
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वर्ष 2014 में मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव कुइयां बूट निवासी आरती गौड़ के सिपाही भाई की लखीमपुर खीरी में तैनाती के दौरान मौत हो गई थी। आरती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को भाई पर आश्रित बताया। हाईकोर्ट के आदेश पर मृतक आश्रित कोटे में आरती की दरोगा के पद पर नौकरी लग गई।
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वह मेरठ जनपद में तैनात है। तैनाती के बाद ही गांव कुइयां बूट निवासी पारिवारिक फूफा विजय ने शिकायत की कि आरती के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर 26 सितंबर 2013 को घर में घुसकर मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। विवेचक ने 27 अक्तूबर 2013 को आरोप सही न पाए जाने पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
आरती ने भर्ती के दौरान पुलिस विभाग से यह तथ्य छिपाकर शपथ पत्र दिया कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इस मामले में तत्कालीन मेरठ आईजी लक्ष्मी सिंह ने एक वर्ष पहले डीएम फर्रुखाबाद को पत्र भेजकर मुकदमे के संदर्भ में आख्या मांगी थी। डीएम ने इस संबंध में जिला अभियोजन अधिकारी से विधिक राय मांगी।
अभियोजन अधिकारी ने बताया कि अगर दरोगा ने मुकदमा दर्ज होने का तथ्य छिपाया है तो वह क्षमा योग्य नहीं है। इसके बाद डीएम ने पत्रावली एसपी के पास भेज दी। इस पर एक सप्ताह पूर्व एसपी डॉ. अनिल मिश्रा ने पूरे मामले की जांच एएसपी को दे दी है। एएसपी अजय प्रताप ने बताया कि उन्हें जांच मिली है। संबंधित लोगों को बयान के लिए बुलाया जाएगा।
आरती ने भर्ती के दौरान पुलिस विभाग से यह तथ्य छिपाकर शपथ पत्र दिया कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इस मामले में तत्कालीन मेरठ आईजी लक्ष्मी सिंह ने एक वर्ष पहले डीएम फर्रुखाबाद को पत्र भेजकर मुकदमे के संदर्भ में आख्या मांगी थी। डीएम ने इस संबंध में जिला अभियोजन अधिकारी से विधिक राय मांगी।
अभियोजन अधिकारी ने बताया कि अगर दरोगा ने मुकदमा दर्ज होने का तथ्य छिपाया है तो वह क्षमा योग्य नहीं है। इसके बाद डीएम ने पत्रावली एसपी के पास भेज दी। इस पर एक सप्ताह पूर्व एसपी डॉ. अनिल मिश्रा ने पूरे मामले की जांच एएसपी को दे दी है। एएसपी अजय प्रताप ने बताया कि उन्हें जांच मिली है। संबंधित लोगों को बयान के लिए बुलाया जाएगा।