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कर्ज में डूबे 2 किसानों की सांसें थमीं, क्रेडिट कार्ड की रकम अदायगी बना परेशानियों का सबब

Sat, 29 Jul 2017 04:08 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 29 Jul 2017 04:08 PM IST
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farmer dead due to over burdened debt
डेमो पिक
बुंदेलखंड के किसान अाज भी कर्ज से परेशान होकर मरने को मजबूर होते जा रहे हैं। कोई अन्नदाता बैंक और साहूकारों का उधार नहीं चुका पा रहा तो किसी ने अपने ही रिश्तेदारों से कर्ज लेकर परेशानी मोल ले रखी है। शुक्रवार को हमीरपुर और महोबा जिलों में दो किसानों की कर्ज के कारण मौत हो गई। सरकारें तमाम दावे करती हैं कि किसानों का करोड़ों रुपए ऋण माफ कर दिया गया है बावजूद इसके मौत होती है।
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महोबा जिले के थाना श्रीनगर के सिजवाहा गांव निवासी राधाचरण पाल (50) छह बीघा भूमि का काश्तकार था। मृतक  के पुत्र मुकेश ने बताया कि वर्ष 2011 में पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड पर इलाहाबाद बैंक श्रीनगर से 80 हजार रुपये कर्ज लिया था। इसकी वह अदायगी नहीं कर सके। उसके बाद फसल की सिंचाई की व्यवस्था के लिए उन्होंने दो वर्ष पहले साहूकारों से करीब दो लाख का कर्ज लिया था। इसके बाद खेत में कुंआ खुदवाया था। जो पिछली बारिश में धंस गया। कर्ज की अदायगी के लिए वह परेशान रहने लगा। 

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शुक्रवार की सुबह राधाचरण खेत पर गया और मेड़ पर बैठ गया। इसी दौरान अटैक पड़ने से वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। सूचना पर पहुंचे परिजन उसे अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।  पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। नायब तहसीलदार कर्मवीर सिंह का कहना है कि किसान की मौत की सूचना मिली है। कानूनगो व लेखपाल को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। जांच व पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
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गहरे तालाब में छलांग लगाकर आत्महत्या

farmer dead due to over burdened debt
डेमो पिक

हमीरपुर मौदहा तहसील क्षेत्र के टिकरी गांव में कर्जदार किसान ने गहरे तालाब में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। कई घंटे बाद जब उसका शव पानी में तैरने लगा। तब कुछ ग्रामीणों ने उसके परिजनों को सूचना दी। परिजनों ने उसे बाहर निकाला। इसकी सूचना पर गांव पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
 

टिकरी गांव निवासी बच्चालाल (60) पुत्र गड़ुवा पर 75 हजार बैंक का व एक लाख के आसपास गांव के लोगों से  कर्ज लिए था। इधर बारिश कम होने से आगे की खेती सही न होने की चिंता भी उसे सता रही थी। जिससे परेशान होकर उसने तालाब में कूदकर आत्महत्या कर ली। बच्चालाल के तीन बेटे हैं और इसके नाम करीब दस बीघे जमीन थी। गांव की इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से बच्चालाल ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था। जिसमें 75 हजार कर्ज है। साथ ही गांव के लोगों से भी करीब एक लाख रुपये का कर्ज लिए था। बड़े बेटा राजमणि विवाहित है और उसके दो बेटे मुन्नू (24) व पप्पू (20) अविवाहित हैं। राजमणि ने बताया कि पिता दु:खी रहते थे और कर्ज अदायगी की चिंता सताती रहती थी। उसके चलते शुक्रवार सुबह वह घर से शौच के लिए निकले और गांव के बड़ियाना मोहल्ला स्थित गहरे तालाब में कूदकर जान दे दी। घटना के तीन चार घंटे बाद तकरीबन एक बजे जब उसका शव पानी में उतराया दिखाई दिया तो तालाब के किनारे श्रीविशाल, चंद्रपाल ने उसे देखकर पहचाना और उनको सूचना दी। शव को बाहर निकाला गया। संबंधित लेखपाल व कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दी। कोतवाल अनिल सिंह ने बताया कि एक वृद्ध की तालाब में डूबकर मौत होने की सूचना पर उसको पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। इस मामले में तहसीलदार राकेश कुमार मौर्य ने घटना स्थल में जांच पड़ताल की। कहा कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद पीड़ित परिवार की मदद की जाएगी।

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