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यूपी बोर्ड::: फेल छात्रों को भी प्रैक्टिकल में पूरे अंक
Sat, 25 May 2024 12:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 25 May 2024 12:05 AM IST
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फोटो 21::डीआईओएस कार्यालय। संवाद
फोटो 24::कुछ इस प्रकार जारी दिए गए प्रेक्टिकल में अंक। संवाद
कॉपियों की जांच में पारदर्शिता, लेकिन प्रेक्टिकल में नंबर देने में की जाती मनमर्जी
ऋषि तिवारी
इटावा। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक लगातार बदलाव किए जा रहे है। इसी क्रम में माध्यमिक शिक्षा परिषद, यूपी बोर्ड में भी पाठ्यक्रम से लेकर समय सारिणी में काफी बदलाव किए गए है। लेकिन जिले में शिक्षकाें की मनमानी हावी है। जिले में जो विद्यार्थी कई विषयों में फेल हो गए है उन्हें भी प्रैक्टिकल में पूरे अंक दिए गए है।
20 अप्रैल को यूपी बोर्ड का परीक्षाफल घोषित किया गया था। जिले में हाईस्कूल के 89.70 व इंटरमीडिएट के 87.73 परीक्षार्थी सफल हुए थे। बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार इस बार प्रेक्टिकल परीक्षा भी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में करवाई गई थी। दसवीं के प्रेक्टिकल में परीक्षार्थियों को प्रोजेक्ट के अनुसार अंक दिए जाते है।
इस प्रक्रिया में कॉलेज के शिक्षकों की ओर से नंबर दिए जाते है। मूल्यांकन में छात्रों के प्रोजेक्ट और उसके स्कूल में बर्ताव के आधार पर अंकों का वितरण किया जाता है, लेकिन अधिकांश संचालक अपने कॉलेज के परीक्षाफल को सुधारने और छात्रों के अंकों में बढोत्तरी के लिए मनमाने तरीके से अंक देते है।
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अंक देते समय संचालक यह भी भूल जाते है कि संबंधित छात्र उक्त विषय में कितनी पकड़ रखता है। शिक्षकों ने अपनी ओर से तो पूरे अंक दे डाले, लेकिन छात्र थ्योरी में अच्छा न कर पाने के कारण फेल हो गए। जिले में 10वीं व 12वीं के कुल 4636 छात्र इस वर्ष फेल हुए है, इनमें से 70 फीसदी परीक्षार्थी थ्योरी में फेल है लेकिन प्रेक्टिकल में उन्हें पूरे अंक दिए गए है।
वहीं इंटरमीडिएट में बाहरी शिक्षकों से प्रेक्टिकल प्रक्रिया करवाई जाती है। लेकिन इसमें भी निजी कॉलेजों ने खूब मनमानी की है। विभाग से जुड़े जानकारों के अनुसार हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षा में कॉलेजों की जमकर मनमानी चलती है, संचालक अपने हिसाब से छात्र-छात्राओं को अंक दिलवाते है। ऐसे में वह इस बात का भी ध्यान नहीं रखते कि छात्र पढ़ाई में कैसा है। कई छात्रों के गणित की थ्योरी में 10 से 12 नंबर है जबकि प्रेक्टिकल में उसे पूरे 30 नंबर दिए गए है जो अपने आप में हास्यास्पद है।
यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम पर एक नजर
कक्षा पंजीकृत शामिल परीक्षार्थी उत्तीर्ण परीक्षार्थी फेल परीक्षार्थी
हाईस्कूल 23551 21884 19630 2254
इंटरमीडिएट 20522 19408 17026 2382
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मातृभाषा में भी नहीं हो सके पास
वर्ष 2023-24 के परीक्षाफल में हाईस्कूल में 2254 परीक्षार्थी फेल हुए है। बोर्ड की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार हाईस्कूल में हिंदी विषय में फेल परीक्षार्थी को फेल माना जाता है जबकि अन्य विषयों में फेल परीक्षार्थी को कुछ राहत मिल जाती है। ऐसे में दोनों कक्षाओं के 2492 परीक्षार्थी हिंदी में भी फेल हो गए है। सेवानिवृत्त शिक्षक रामगोपाल ने बताया कि हिंदी में फेल परीक्षार्थी कहीं न कहीं व्यवस्था पर सवाल जरुर खड़ा करते है। विभाग को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए।
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जिले में कॉलेजों की स्थिति
जीआईसी - 21
वित्तविहीन- 215
वित्तपोषित- 54
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वर्जन
प्रयोगात्मक परीक्षा के मूल्यांकन का कार्य कॉलेज और बोर्ड स्तर से होता है। लेकिन थ्योरी में फेल परीक्षार्थी को प्रेक्टिकल में शत-प्रतिशत अंक देना गलत है। हालांकि बोर्ड की ओर से इसके लिए कोई गाइडलाइन नहीं है, फिर भी वह अपने स्तर से इस मामले की तहकीकात कराएंगे।
मनोज कुमार, डीआईओएस
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फोटो 24::कुछ इस प्रकार जारी दिए गए प्रेक्टिकल में अंक। संवाद
कॉपियों की जांच में पारदर्शिता, लेकिन प्रेक्टिकल में नंबर देने में की जाती मनमर्जी
ऋषि तिवारी
इटावा। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक लगातार बदलाव किए जा रहे है। इसी क्रम में माध्यमिक शिक्षा परिषद, यूपी बोर्ड में भी पाठ्यक्रम से लेकर समय सारिणी में काफी बदलाव किए गए है। लेकिन जिले में शिक्षकाें की मनमानी हावी है। जिले में जो विद्यार्थी कई विषयों में फेल हो गए है उन्हें भी प्रैक्टिकल में पूरे अंक दिए गए है।
20 अप्रैल को यूपी बोर्ड का परीक्षाफल घोषित किया गया था। जिले में हाईस्कूल के 89.70 व इंटरमीडिएट के 87.73 परीक्षार्थी सफल हुए थे। बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार इस बार प्रेक्टिकल परीक्षा भी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में करवाई गई थी। दसवीं के प्रेक्टिकल में परीक्षार्थियों को प्रोजेक्ट के अनुसार अंक दिए जाते है।
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इस प्रक्रिया में कॉलेज के शिक्षकों की ओर से नंबर दिए जाते है। मूल्यांकन में छात्रों के प्रोजेक्ट और उसके स्कूल में बर्ताव के आधार पर अंकों का वितरण किया जाता है, लेकिन अधिकांश संचालक अपने कॉलेज के परीक्षाफल को सुधारने और छात्रों के अंकों में बढोत्तरी के लिए मनमाने तरीके से अंक देते है।
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अंक देते समय संचालक यह भी भूल जाते है कि संबंधित छात्र उक्त विषय में कितनी पकड़ रखता है। शिक्षकों ने अपनी ओर से तो पूरे अंक दे डाले, लेकिन छात्र थ्योरी में अच्छा न कर पाने के कारण फेल हो गए। जिले में 10वीं व 12वीं के कुल 4636 छात्र इस वर्ष फेल हुए है, इनमें से 70 फीसदी परीक्षार्थी थ्योरी में फेल है लेकिन प्रेक्टिकल में उन्हें पूरे अंक दिए गए है।
वहीं इंटरमीडिएट में बाहरी शिक्षकों से प्रेक्टिकल प्रक्रिया करवाई जाती है। लेकिन इसमें भी निजी कॉलेजों ने खूब मनमानी की है। विभाग से जुड़े जानकारों के अनुसार हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षा में कॉलेजों की जमकर मनमानी चलती है, संचालक अपने हिसाब से छात्र-छात्राओं को अंक दिलवाते है। ऐसे में वह इस बात का भी ध्यान नहीं रखते कि छात्र पढ़ाई में कैसा है। कई छात्रों के गणित की थ्योरी में 10 से 12 नंबर है जबकि प्रेक्टिकल में उसे पूरे 30 नंबर दिए गए है जो अपने आप में हास्यास्पद है।
यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम पर एक नजर
कक्षा पंजीकृत शामिल परीक्षार्थी उत्तीर्ण परीक्षार्थी फेल परीक्षार्थी
हाईस्कूल 23551 21884 19630 2254
इंटरमीडिएट 20522 19408 17026 2382
मातृभाषा में भी नहीं हो सके पास
वर्ष 2023-24 के परीक्षाफल में हाईस्कूल में 2254 परीक्षार्थी फेल हुए है। बोर्ड की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार हाईस्कूल में हिंदी विषय में फेल परीक्षार्थी को फेल माना जाता है जबकि अन्य विषयों में फेल परीक्षार्थी को कुछ राहत मिल जाती है। ऐसे में दोनों कक्षाओं के 2492 परीक्षार्थी हिंदी में भी फेल हो गए है। सेवानिवृत्त शिक्षक रामगोपाल ने बताया कि हिंदी में फेल परीक्षार्थी कहीं न कहीं व्यवस्था पर सवाल जरुर खड़ा करते है। विभाग को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए।
जिले में कॉलेजों की स्थिति
जीआईसी - 21
वित्तविहीन- 215
वित्तपोषित- 54
वर्जन
प्रयोगात्मक परीक्षा के मूल्यांकन का कार्य कॉलेज और बोर्ड स्तर से होता है। लेकिन थ्योरी में फेल परीक्षार्थी को प्रेक्टिकल में शत-प्रतिशत अंक देना गलत है। हालांकि बोर्ड की ओर से इसके लिए कोई गाइडलाइन नहीं है, फिर भी वह अपने स्तर से इस मामले की तहकीकात कराएंगे।
मनोज कुमार, डीआईओएस