{"_id":"fc186d14eec78a4220d85dfc93910fd0","slug":"excise-department-will-audit-by-the-target-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टारगेट बनाकर ऑडिट करेगा उत्पाद शुल्क विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टारगेट बनाकर ऑडिट करेगा उत्पाद शुल्क विभाग
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 10 Mar 2015 02:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्पाद शुल्क और सेवाकर विभाग अब टैक्स चोरी पकड़ने के लिए कॉरपोरेट कल्चर अपनाएगा। हाल ही में शुरू हुई ऑडिट व्यवस्था का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया गया है। इसमें स्पष्ट तौर पर बड़ी-छोटी और मझोली इकाइयों पर कार्रवाई का टारगेट दिया गया है।
साथ ही प्रत्येक कार्रवाई को संपन्न करने के लिए दिन और स्टाफ भी निर्धारित कर दिया गया है। जल्द ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई आरंभ होगी। केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग में स्वकर निर्धारण व्यवस्था के तहत करदाता अपनी ड्यूटी का भुगतान करता है और इसका रिटर्न फाइल करता है।
मगर कई बार जानबूझकर टैक्स चोरी का प्रयास किया जाता है, जिसे ऑडिट प्रक्रिया के जरिए पकड़ा जाता है। हाल ही में विभाग के पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) के दौरान ऑडिट के लिए अलग कमिश्नर की नियुक्ति हुई है।
विज्ञापन
लखनऊ के ऑडिट कमिश्नर के पास कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद और आगरा कमिश्नरी क्षेत्र में आने वाले उत्पाद शुल्क करदाताओं एवं सेवाप्रदाताओं के ऑडिट का काम दिया गया है। इस व्यवस्था को और प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए 27 फरवरी को विभागीय ऑडिट के लिए यूनिटों के चुनाव संबंधी एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई हैं।
इसके तहत प्रत्येक ऑडिट कमिश्नरी मई माह में पूरे वर्ष का कैलेंडर जारी करेगा। इसमें किन-किन इकाइयों का एवं सेवाप्रदाताओं का ऑडिट होना है उसका पूरा विवरण रहेगा। अभी तक ऑडिट की जाने वाली इकाइयों का चुनाव मॉनिट्री लिमिट के आधार पर होता था, यानी जो ज्यादा टैक्स देता था उसका ऑडिट पहले किया जाता था।
नई व्यवस्था में मॉनिट्री लिमिट के साथ कर चोरी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यूनिटों का चुनाव होगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत करदाताओं को बड़ी, मध्यम एवं छोटी इकाइयों या सेवाप्रदाताओं की श्रेणी में बांटा गया है। कुल स्टाफ का 80 फीसदी ऑडिट की कार्रवाई में लगेगा, जबकि 20 फीसदी स्टाफ को कोआर्डिनेशन का काम करना होगा।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद नवगठित ऑडिट कमिश्नरेट स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू कर देंगे। करदाता का उत्पीड़न न हो इसके लिए ऑडिट की समयसीमा भी निर्धारित की गई है। रिस्क का आकलन करने हेतु जो बोर्ड का मुख्यालय है, वह हर वर्ष के अप्रैल माह में दिशानिर्देश जारी करेंगे।
- सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव, उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर सलाहकार
विज्ञापन
साथ ही प्रत्येक कार्रवाई को संपन्न करने के लिए दिन और स्टाफ भी निर्धारित कर दिया गया है। जल्द ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई आरंभ होगी। केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग में स्वकर निर्धारण व्यवस्था के तहत करदाता अपनी ड्यूटी का भुगतान करता है और इसका रिटर्न फाइल करता है।
विज्ञापन
मगर कई बार जानबूझकर टैक्स चोरी का प्रयास किया जाता है, जिसे ऑडिट प्रक्रिया के जरिए पकड़ा जाता है। हाल ही में विभाग के पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) के दौरान ऑडिट के लिए अलग कमिश्नर की नियुक्ति हुई है।
विज्ञापन
लखनऊ के ऑडिट कमिश्नर के पास कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद और आगरा कमिश्नरी क्षेत्र में आने वाले उत्पाद शुल्क करदाताओं एवं सेवाप्रदाताओं के ऑडिट का काम दिया गया है। इस व्यवस्था को और प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए 27 फरवरी को विभागीय ऑडिट के लिए यूनिटों के चुनाव संबंधी एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई हैं।
इसके तहत प्रत्येक ऑडिट कमिश्नरी मई माह में पूरे वर्ष का कैलेंडर जारी करेगा। इसमें किन-किन इकाइयों का एवं सेवाप्रदाताओं का ऑडिट होना है उसका पूरा विवरण रहेगा। अभी तक ऑडिट की जाने वाली इकाइयों का चुनाव मॉनिट्री लिमिट के आधार पर होता था, यानी जो ज्यादा टैक्स देता था उसका ऑडिट पहले किया जाता था।
नई व्यवस्था में मॉनिट्री लिमिट के साथ कर चोरी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यूनिटों का चुनाव होगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत करदाताओं को बड़ी, मध्यम एवं छोटी इकाइयों या सेवाप्रदाताओं की श्रेणी में बांटा गया है। कुल स्टाफ का 80 फीसदी ऑडिट की कार्रवाई में लगेगा, जबकि 20 फीसदी स्टाफ को कोआर्डिनेशन का काम करना होगा।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद नवगठित ऑडिट कमिश्नरेट स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू कर देंगे। करदाता का उत्पीड़न न हो इसके लिए ऑडिट की समयसीमा भी निर्धारित की गई है। रिस्क का आकलन करने हेतु जो बोर्ड का मुख्यालय है, वह हर वर्ष के अप्रैल माह में दिशानिर्देश जारी करेंगे।
- सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव, उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर सलाहकार