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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Every day the people of Kanpur are drinking water worth one crore rupees

Kanpur: हर दिन एक करोड़ रुपये का पानी खरीदकर पी रहे शहरी, पिछले पांच सालों की तुलना में 5 गुना बढ़ा यह व्यापार

Thu, 20 Apr 2023 08:10 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 20 Apr 2023 08:10 AM IST
सार

पानी का कारोबार करने वाली कंपनियों के आंकड़ों की मानें तो रोजाना एक करोड़ रुपये का पानी शहरी खरीदकर पी जाते हैं। शादी-समारोह होने पर 10 फीसदी मांग और बढ़ जाती है। खास बात यह है कि पानी के कारोबार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।

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Every day the people of Kanpur are drinking water worth one crore rupees
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक समय था कि कानपुर में किसी को पानी खरीदकर पीना नहीं पड़ता था। जगह-जगह लगे प्याऊ और हैंडपंप लोगों की प्यास बुझा देते थे। इसके उलट गंगा किनारे बसे इस शहर में पानी का कारोबार भी फलफूल रहा है। पानी का कारोबार करने वाली कंपनियों के आंकड़ों की मानें तो रोजाना एक करोड़ रुपये का पानी शहरी खरीदकर पी जाते हैं। शादी-समारोह होने पर 10 फीसदी मांग और बढ़ जाती है।

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खास बात यह है कि पानी के कारोबार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। जबकि घर-घर खुले अवैध वाॅटर प्लांट सबसे ज्यादा पानी का दोहन कर रहे हैं। ये प्लांट बिना बीआईएस लाइसेंस के संचालित होकर बीमारियां भी बांट रहे हैं। शहर में 13 वाॅटर प्लांट है। इनकी क्षमता एक हजार से लेकर 20 हजार लीटर प्रतिदिन की है। दादानगर, कोकाकोला चौराहा, उन्नाव, रनियां में इनके सबसे बड़े प्लांट है। जबकि कानपुर रीजन में 25 पानी के प्लांट संचालित हो रहे हैं।

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यहां पर आरओ वाॅटर के साथ ही सोडा वॉटर भी बनाया जाता है। यहां के उत्पादों की सप्लाई कानपुर के अलावा आसपास के जिलों में है। कारोबारियों ने बताया कि कोविड के बाद से बोतलबंद पानी की मांग बढ़ गई है। पहले प्लास्टिक गिलास में पानी का चलन बढ़ा था, लेकिन प्लास्टिक बैन के होने के चलते अब छोटी बोतलों की मांग अच्छी है। जानकारों ने बताया कि 2017-18 में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के 3000 हजार बैग पानी की बोतल बिकती थी। गैर संगठित सेक्टर से दो हजार बैग पानी बिकता था। एक बैग में आधा लीटर की 24 और एक लीटर की 12 बोतल आती हैं।

इसी तरह पांच सौ बैग पानी के पाउच और 2500 प्लास्टिक गिलास और छह हजार जार पानी बिक रहा था। 2019 में आए कोरोना के चलते छोटे वाटर प्लांटों पर बंदी की स्थिति आ गई। कोरोना के बाद लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ने से बोतल बंद पानी की मांग तेजी से बढ़ी है। 2021-22 में मल्टीनेशनल कंपनियों के 15 हजार बैग पानी की बोतल बिकने लगी हैं। गैर संगठित सेक्टर का पांच हजार पानी का बोतल बाजार में आ रहा था। इसके अलावा अब बाजार में एक लाख से ज्यादा बैग पानी, 25 हजार जार प्रतिदिन शहर में पानी बिक रहा है।

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बड़ी कंपनियां मानकों का करती हैं पालन
जानकारों ने बताया कि एक छोटा प्लांट एक हजार लीटर क्षमता का होता है। यहां पर केवल पीने का पानी ही तैयार होता है। इन प्लांटों के एक हिस्से में रिवर्स बोरिंग होती है। बचे हुए पानी को भूगर्भ में डाला जाता है। 20 हजार लीटर क्षमता वाले प्लांट में कच्चे पानी से सोडा तैयार होता है। आरओ प्लांट से पीने का पानी तैयार होता है।

पांच सालों में पानी का व्यापार बढ़ता जा रहा है। कोरोना के बाद से बोतल बंद पानी सबसे ज्यादा मांग में आ गया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का बोतल बंद पानी सबसे ज्यादा बिकने लगा है। हालांकि गैर पंजीकृत व्यापारी भी इस काम में तेजी से लगे हुए हैं। इन पर रोक लगनी चाहिए।- मनीष कोहली, चेयरमैन, पैकेज ड्रिंकिंग वाॅटर इंडस्टि्रयलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन

बिना मानक वाले पानी के प्लांट से पंजीकृत प्लाट के सामने अस्तित्व की चिंता है। शहर में पानी का व्यापार बढ़ जरूर रहा है लेकिन इसका सबसे ज्यादा लाभ मानक विहीन प्लांट धारक उठा रहे हैं। लोन न चुकाने के कारण कारोबारियों के खाते एनपीए हो रहे हैं।- सुमित सिंह, सचिव, पैकेज ड्रिंकिंग वाटर इंडस्टि्रयलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन

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