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उम्मीद: आंखों में चिप लगाकर नेत्रहीन भी देख सकेंगे दुनिया, ब्रिटेन में शुरू हो गया है प्रयोग, देश में भी जल्द शुरू होगा काम

Mon, 09 May 2022 09:54 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 09 May 2022 09:54 AM IST
सार

कोरोना काल में मोबाइल फोन और लैपटॉप पर लगातार काम करने से लोगों की दूर की नजर कमजोर हो गई है। मायोपिया की समस्या हुई है। इसके साथ ही स्क्रीन पर लगातार देखते रहने से ड्राई आई की समस्या भी बढ़ी है। बच्चों में भी यह दिक्कत बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने बताया कि आंखों में सोते वक्त लुब्रीकेंट डालें।

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Even blind will be able to see the world by putting a chip in the eye
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ऐसे लोग जिनकी आंखों का इलाज नहीं हो सकता और पूरा जीवन नेत्रहीनता में गुजारने को विवश हैं, उनके लिए उम्मीद की किरण जगी है। उनकी आंखों में एक चिप लगा दी जाएगी और उन्हें दुनिया नजर आने लगेगी। इसे बायोनिक आई कहते हैं। देश के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. महीपाल सचदेवा ने बताया कि यह कल्पना सी लगने वाली बात अब संभव हो गई है।
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इस विधि में नेत्रहीन की आंख में कैमरा लगेगा, उस कैमरे की चिप को मस्तिष्क की नर्व से जोड़ दिया जाएगा। यह नर्व मैसेज भेजेगी और मस्तिष्क में इमेज बन जाएगी। व्यक्ति को दिखने लगेगा। उन्होंने बताया कि अभी यह विधि ब्रिटेन में अपनाई जा रही है।
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जल्दी ही इसका और विकास होगा और देश में भी आएगी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित आईएमए सीजीपी रिफ्रेशर कोर्स में दिल्ली के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. महीपाल सचदेवा ने व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि नेत्र रोग के क्षेत्र में दवाओं और उपकरणों का विकास हुआ है।
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नेत्रहीनता को खत्म करने के लिए बहुत से शोध चल रहे हैं। उनमें कैमरे वाली चिप भी है। अगर व्यक्ति का मस्तिष्क बिल्कुल ठीक है तो यह चिप अंधता को दूर कर देगी। इसके अलावा कार्निया का आकार सुधार कर आंख का नंबर खत्म कर दिया जाता है। इससे चश्मा उतर जाता है।

नए तरह के लेंस आ गए हैं। ट्राई फोकल लैंस से दूर, मध्य और पास की चीजें अच्छी तरह दिखती हैं। एक ही लेंस से काम चल जाता है। टोरिक लैंस से सिलिंडिरिकल पावर को दुरुस्त किया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. शालिनी मोहन, डॉ. शरद वाजपेयी, डॉ. एएम जैन मौजूद रहे।

कोरोना काल में दूर की दृष्टि कमजोर हुई
कोरोना काल में मोबाइल फोन और लैपटॉप पर लगातार काम करने से लोगों की दूर की नजर कमजोर हो गई है। मायोपिया की समस्या हुई है। इसके साथ ही स्क्रीन पर लगातार देखते रहने से ड्राई आई की समस्या भी बढ़ी है। बच्चों में भी यह दिक्कत बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने बताया कि आंखों में सोते वक्त लुब्रीकेंट डालें। इससे राहत मिलेगी और आंखों की जांचें कराएं।

अब कभी भी कराएं मोतियाबिंद की सर्जरी
मोतियाबिंद की सर्जरी अब कभी भी कराई जा सकती है। यह गलत है कि सिर्फ जाड़े में ही ऑपरेशन कराना चाहिए। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. महीपाल सचदेवा ने बताया कि अब एक छोटे सुराख से सर्जरी कर दी जाती है। रोगी को अस्पताल में ठहरना भी नहीं पड़ता। पहले जब बड़ा चीरा लगता था तो समय लगता था। इसके साथ ही यह भी गलत है कि मोतियाबिंद पकने पर ही सर्जरी कराएं। जितनी जल्दी सर्जरी करा ली जाए, उतना बेहतर रहेगा।
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