स्वास्थ्य: ठंड में शत्रु बैक्टीरिया सक्रिय, आंतों में दिल जैसा दर्द, कम पानी पीने से भी दिक्कत, ऐसे करें बचाव
Kanpur Health News: जाड़े में तापमान बनाए रखने के लिए शरीर खून की आपूर्ति त्वचा की रक्तवाहिनियों में बढ़ा देता है। इससे आंतों में रक्त की आपूर्ति घट जाती है। हृदय की तरह ही आंतों की नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसकी वजह से शरीर के बैक्टीरिया का सामंजस्य बिगड़ जाता है और शत्रु बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं।
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ठंड में आंतों में शत्रु और मित्र बैक्टीरिया का सामंजस्य बिगड़ रहा है। शत्रु बैक्टीरिया मजबूत होने से आंतों में गैस्ट्रिक एंजाइना हो रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि जिस तरह रक्त की आपूर्ति बाधित होने से हृदय में एंजाइना का दर्द उठता है, उसी तरह आंतों में खून कम पहुंचने से गैस्ट्रिक एंजाइना हो रहा है। आंतों के मित्र बैक्टीरिया कमजोर होने से वायरल संक्रमण होता है। इससे वयस्कों की आंतों में एंजाइना और बच्चों में कोल्ड डायरिया के लक्षण उभरते हैं।
हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग में ठंड में गैस्ट्रिक एंजाइना के 25 फीसदी रोगी बढ़े हैं। साथ ही मेडिसिन की ओपीडी में 40 फीसदी रोगी पेट दर्द लेकर पहुंच रहे हैं। रोगियों की आंतों में संक्रमण होने से तेज पेट दर्द होता है। विशेषज्ञ गैस्ट्रिक एंजाइना के रोगियों का ब्योरा तैयार कर रहे हैं। गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि आंतों में गट बैक्टीरिया होते हैं। इनमें शत्रु और मित्र दोनों होते हैं। जाड़े के मौसम में आंतों में खून की आपूर्ति कम होती है।
आंतों की गति भी होती है प्रभावित
इससे इन बैक्टीरिया का सामंजस्य बिगड़ जाता है। शत्रु बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं। गट बैक्टीरिया का सामंजस्य बिगड़ने पर आंतों में वायरल संक्रमण होने लगता है। इसकी वजह से आंतों में एंजाइना होता है। इसके अन्य कारण भी होते हैं। इनमें मुख्य खानपान में गड़बड़ी, पानी कम पीना आदि हैं। जाड़े में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए। मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि ठंड में लोगों के पानी कम पीने से भी गट फ्लोरा कमजोर होने लगता है। इससे आंतों पर नकारात्मक प्रभाव आता है। पानी कम होने से आंतों की गति भी प्रभावित होती है। गट फ्लोरा के कमजोर पड़ने से वायरस सक्रिय हो जाते हैं।
ऐसे होता है गैस्ट्रिक एंजाइना
जाड़े में तापमान बनाए रखने के लिए शरीर खून की आपूर्ति त्वचा की रक्तवाहिनियों में बढ़ा देता है। इससे आंतों में रक्त की आपूर्ति घट जाती है। हृदय की तरह ही आंतों की नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसकी वजह से शरीर के बैक्टीरिया का सामंजस्य बिगड़ जाता है और शत्रु बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं। इन्हें गट फ्लोरा कहते हैं। इससे आंतों की गति प्रभावित हो जाती है और संक्रमण बढ़ता है। आंतों में दर्द उठने लगता है।
कम धूप होने से भी दिक्कत होती आंतों में
डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि धूप के घंटे कम होने और सीजनल बदलाव से भी तनाव बढ़ जाता है। इससे शरीर में कॉर्टिसॉल हार्मोन का रिसाव होने लगता है। इससे आंतों के मित्र बैक्टीरिया पर नकारात्मक प्रभाव आता है। आंतों का संचलन प्रभावित होता है और वायरस सक्रिय हो जाते हैं। धूप मिलने पर डोपामीन हार्मोन रिसता है। इससे स्ट्रेस खत्म होता है और आंतों में गति आती है। नियमित व्यायाम से भी गट फ्लोरा में ताकत आती है।
बचाव के लिए ये करें
- पानी खूब पीएं।
- मौसमी फलों का सेवन जरूर करें।
- फाइबर वाली सब्जियों के साथ सादा भोजन लें।
- अधिक चीनी और वसा वाला भोजन न लें।
- ठंडा खाना न खाएं, गुनगुना कर लें।
- गरिष्ठ भोजन न लें, तरल खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
- शरीर को गर्म कपड़ों से ढंके रहें।