रोजगार मेलाः युवाओं में कम्युनिकेशन और प्रेजेंटेशन जैसी स्किल्स की कमी, नहीं मिलीं 2200 नौकरियां
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में लगाए गए रोजगार मेले में महज 272 युवाओं को ही नौकरी हासिल हो सकीं, जबकि लक्ष्य ढाई हजार को रोजगार देने का था। इसका मुख्य कारण रहा कम्युनिकेशन स्किल का सही न होना और खुद को सही से प्रजेंट न कर पाना।
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कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विवि में बुधवार को आज तक के सबसे बड़े रोजगार मेले का आयोजन किया गया। नौ कंपनियां 2500 नौकरियां लेकर आईं। हालांकि 272 युवाओं को ही नौकरी मिल सकी। युवाओं में कम्युनिकेशन स्किल, लीडरशिप की कमी होने से कंपनियां 2200 से अधिक नौकरियों के लिए चयन नहीं कर पाईं। वहीं, अधिकतर नौकरियां मार्केटिंग या फील्ड वर्क की थीं, ऐसे में छात्राएं खासी निराश रहीं।
विवि के यूआईईटी लेक्चर हॉल कांप्लेक्स में मेले का शुभारंभ कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया। अमेजन पे, एयरटेल पेमेंट्स बैंक, सिटीमॉल, स्वीगी, जोमेटो, जेप्टो, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, पाइन लैब और जी4एस जैसी कंपनियों ने ग्रुप डिस्कशन, साक्षात्कार के आधार पर युवाओं को नौकरी दी। कंपनियां मार्केटिंग, टेली कॉलर, टीम लीडर, मैनेजर तक की पोस्ट लेकर आई थीं। विवि के अलावा आसपास के जिलों के छात्र, शादीशुदा महिलाएं, उच्च डिग्री धारक भी मेले में पहुंचे।
कंपनियों ने 17 हजार से लेकर 40 हजार तक प्रति माह सैलरी ऑफर की। उम्र की बाध्यता न होने के कारण चार हजार युवाओं ने पंजीकरण कराया था। मेले में कई कंपनियां फील्ड की नौकरियां लेकर आई थीं। इस कारण छात्राओं ने रुचि नहीं दिखाई। ऑफिस जॉब, टेलीकॉलर की नौकरियां छात्राओ को भायीं। कम्युनिकेशन स्किल की कमी होने से कई छात्राओं के हाथ से नौकरी फिसल गई। इंटरव्यू ले रहे कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि अधिकतर युवाओं में कम्युनिकेशन, लीडरशिप, आत्मविश्वास का अभाव रहा। युवाओं को इन बिंदुओं पर काम करने की जरूरत है।
कॉल सेंटर में काम करने के लिए टेलीकॉलर के इंटरव्यू लिए हैं। कुछ युवाओं का कम्युनिकेशन स्किल अच्छा था पर कई युवा बोलते-बोलते अटक जा रहे थे। आत्मविश्वास की कमी के कारण यह दिक्कत थी। कई छात्रों को 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह की नौकरियां ऑफर की हैं। -नागेश द्विवेदी, प्रतिनिधि जेप्टो
टीम लीडर और कंपनी रिलेशनशिप मैनेजर की पोस्ट के लिए आए हैं। 24 हजार रुपये प्रति माह सैलरी ऑफर की है। युवाओं में टीम नेतृत्व की भावना कम देखने को मिली। अधिकतर फ्रेशर छात्र आए। इनको पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर काम करना चाहिए। -रोहित कटियार, अमेजन पे