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बच्चे का हुनर, परखेगा साॅफ्टवेयर

Sun, 11 Jan 2015 02:46 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Sun, 11 Jan 2015 02:46 AM IST
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elmnai meats in iit kanpur
सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी आईबीएम एक ऐसा साफ्टवेयर ला रही है जिससे स्टूडेंट्स की लर्निंग कैपिसिटी का पता आसानी से लगाया जा सकेगा।
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इस साफ्टवेयर की मदद से बच्चों की विषयवार क्षमता जानने के बाद उसी के अनुसार कोर्स को भी डिजाइन किया जा सकेगा। यह जानकारी आईबीएम के कंट्री हेड अनुपम सरोनवाल ने दी।
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आईआईटी से 1980 में बीटेक करने वाले अनुपम शनिवार को इस बैच की एलमनाइ मीट में शिरकत करने के लिए शहर आए हुए थे।  उन्होंने बताया कि एजूकेशन ट्रांसफार्म नाम से की जा रही रिसर्च लगभग पूरी हो चुकी है, अब इसे टेक्निकल रूप दिया जा रहा है।
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इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल पहले स्कूल लेवल पर किया जाएगा । इसकी सफलता के बाद इसे सीनियर स्टूडेंट्स के लिए डिजाइन किया जाएगा।  अनुपम ने बताया कि  जैसे हास्पिटल में मरीज की हिस्ट्री जानने के बाद उसका इलाज शुरू किया जाता, कुछ इसी तरह से पढ़ाई में करने की तैयारी की जा रही है।

साफ्टवेयर में स्टूडेेंट्स की हिस्ट्री होगी, केवल स्कूल का ग्रेड कार्ड देखकर पढ़ाई नहीं की जाएगी। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि मैथ विषय को समझना एक स्टूडेंट के लिए सरल है और दूसरे के लिए कठिन। ऐसे में साफ्टवेयर बताएगा कि स्टूडेंट्स की कैपिसिटी के आधार पर उसे सरल या कठिन स्लैबस दिया जाएगा।

अनुपम इलेक्ट्रिकल से बीटेक  करने के बाद मास्टर करने के लिए यूएसए चले गए। वहां कैलिफोर्निया में 10 साल तक नौकरी करने के बाद 90 में वापस भारत आ गए। 2002 में आईबीएम ज्वाइन की।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा चाइना आफिस में एयर पॉल्यूशन को जानने के लिए साफ्टवेयर डेवलेप किया गया है। जिसमें मौसम के आधार पर एयर में कितना पॉल्यूशन है बताता है, ये सुविधा अभी भारत में मौजूद नहीं है।

गोल्फ कोर्स ने बनाया आईआईटियन से अधिवक्ता

गोल्फ कोर्स ने मुझे आईआईटियन से लॉयर बना दिया। ये कहना है आईआईटियन और एडवोकेट रघु नायर का। बीटेक करने के बाद अहमदाबाद की कंपनी में नौकरी की। रघु कहते है कि गोल्फ कोर्स में एंट्री लेने के बाद पैसा फंस गया।

कोर्ट में केस फाइल किया उसी समय ठाना लिया कि खुद काला कोट पहन अदालत में आऊंगा। 2003-206 तक लॉ की पढ़ाई की। मौजूदा समय में कई कंपनियों में लीगल एडवाइजर के तौर पर काम कर रहा हूं। और इसे काफी एंज्वॉय कर रहा हूं।    

सस्ती बिजली के लिए अमेरिका से एलएनजी आयात करेगा गेल

देश को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए गेल अमेरिका से लिक्वीफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) आयात करेगा। इस गैस से संचालित पावर प्लांट से मिलने वाली बिजली अपेक्षाकृत सस्ती होगी। फिलहाल इसकी शुरुआत दाभोल पावर प्लांट से की जा रही है।  

इसके लिए अमेरिका से बात हो चुकी है। अमेरिका गैस देने को तैयार है। दाभोल पावर प्लांट को जनवरी के अंत तक चालू कर दिया जाएगा। इससे प्राप्त बिजली को आंध्रप्रदेश और तेलांगना में सप्लाई किया जाएगा। आगे देश के चार और बंद चल रहे पावर प्लांट को चालू किया जाएगा।

ताकि देश में बिजली की समस्या का समाधान हो सके। यह जानकारी गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के मार्केटिंग डायरेक्टर प्रभात सिंह ने यहां शहर में बातचीत के दौरान दिए। आईआईटी में 80 बैच से पढ़कर निकले प्रभात सिंह ने बताया कि एलएनजी गैस काफ हल्की होती है।

यूएस से भारत में इसे लिक्विड फार्म में लाया जायेगा। -176 डिग्री में इसे कंप्रेस्ड करने पर यह लिक्विड फार्म में आ जाएगा। कंप्रेस करने से इसका वॉल्यूम गैस के मुकाबले 600 गुना कम हो जाता है।

उन्होंने बताया कि 120 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति दिन की खपत है। 40 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस इंपोर्ट की जा रही है। प्रभात पहले एनटीपीसी में भी रहे।  पूरा प्रोजेक्ट 60 बिलियन डॉलर का है। कहा कि एलएनजी सस्ती होने से इससे तैयार बिजली सस्ती होगी।  

आइडिया दें, इंवेस्ट के लिए हूं तैयार

मूल रूप से मैनपुरी निवासी आईआईटियन अजय दुबे कहते है कि बहुत साल नौकरी कर ली, अब नए आइडिया पर इंवेस्ट करना चाहता हूं। आईआईटियंस को ऑफर है कि वें नए और इनोवेटिव आइडिया फ्लोट करें।


अजय कहते है कि कुछ आईआईटियंस ने कंपनी यूनीकैन सिस्टम बनाई, जिसमें इंवेस्ट किया है। ये कंपनी इंटरनेट सिक्योरिटी पर काम करती है। इसे यूएस से पेटेंट भी कराया गया है।

अजय कहते है कि आईआईटी के बाद 8 साल पटनी कंप्यूटर्स, इसके बाद इंफोसिस में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में काम किया।

जरूरतमंद आईआईटियंस के लिए दो स्कालरशिप अजय की मां माधुरी दुबे और दादी विद्यावती के नाम पर शुरू की गई है।
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