{"_id":"5b9f6e51867a5501363bd531","slug":"electric-buses-will-now-run-in-kanpur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी के इस शहर को प्रदूषण मुक्त करने के लिए उठाया जाएगा यह कदम, जानें क्या रहेगा खास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी के इस शहर को प्रदूषण मुक्त करने के लिए उठाया जाएगा यह कदम, जानें क्या रहेगा खास
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 17 Sep 2018 02:36 PM IST
सार
- सीएनजी से आधे खर्च पर नए साल से दौड़ेंगी सिटी बसें
- बिजली खर्च आठ रुपये, सीएनजी खर्च 15 रुपये प्रति किलोमीटर
- बसों के लिए 3000 केवी का सबस्टेशन बनाने को जमीन की तलाश शुरू
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विस्तार
नए साल से 100 इलेक्ट्रिक सिटी बसें शहर मेें यात्रियों को सुगम सफर कराएंगी। इन बसों के आने से पहले चरण में 15 साल पूरी कर चुकी सीएनजी बसें हटाई जाएंगी। दूसरे चरण में सारी बसों को ‘नमस्ते’ कर दिया जाएगा। यह योजना यूपी के कानपुर शहर में चलाई जा रही है। इलेक्ट्रिक बसें न सिर्फ शहर का प्रदूषण कम करेंगी, विभाग का मुनाफा भी बढ़ा देंगी। रोडवेज के लिए इलेक्ट्रिक बसें मुनाफे का सौदा होगा। इलेक्ट्रिक बस के एक किलोमीटर चलने पर करीब आठ रुपये खर्च आएगा, जबकि सीएनजी बसों पर 15 रुपये के लगभग एक किलोमीटर में खर्च आ रहा है।
प्रदूषण के साथ खर्च भी कम
इलेक्ट्रिक बसों में सिर्फ बिजली का खर्च आता है। एक यूनिट बिजली से एक किलोमीटर तक यह बस चलेगी। कॉमर्शियल बिजली करीब आठ रुपये प्रति यूनिट है। सीएनजी बस एक किलो सीएनजी से चार किलोमीटर चलती है। सीएनजी 59 रुपये प्रति किलो है। सीएनजी बसों के एक किलोमीटर चलने का ईंधन खर्च करीब 15 रुपये और इलेक्ट्रिक बस केएक किलोमीटर का खर्च आठ रुपये है। इलेक्ट्रिक बस एक बार फुल चार्ज होने पर 150 किलोमीटर चलती है।
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प्रदूषण के साथ खर्च भी कम
इलेक्ट्रिक बसों में सिर्फ बिजली का खर्च आता है। एक यूनिट बिजली से एक किलोमीटर तक यह बस चलेगी। कॉमर्शियल बिजली करीब आठ रुपये प्रति यूनिट है। सीएनजी बस एक किलो सीएनजी से चार किलोमीटर चलती है। सीएनजी 59 रुपये प्रति किलो है। सीएनजी बसों के एक किलोमीटर चलने का ईंधन खर्च करीब 15 रुपये और इलेक्ट्रिक बस केएक किलोमीटर का खर्च आठ रुपये है। इलेक्ट्रिक बस एक बार फुल चार्ज होने पर 150 किलोमीटर चलती है।
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3000 किलोवाट का बनेगा चार्जिंग सिस्टम
100 इलेक्ट्रिक बसों की चार्जिंग के लिए 3000 किलोवाट का बिजली सबस्टेशन बनेगा। इसके अलावा वर्कशॉप के लिए भी जमीन लेनी होगी। जहां इनकी मरम्मत होगी। सबस्टेशन के लिए पांच एकड़ जमीन तलाशनी शुरू कर दी गई है। दरअसल, यह बसें नगर विकास विभाग की हैं और जमीन भी नगर निगम को ही तलाशनी है। क्योंकि परिवहन निगम के पास बसों को चलाने का अनुभव है। इसलिए शासन ने निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) को महानगरीय बस सेवा का प्रबंध निदेशक बनाया है।
लो फ्लोर बसों से कीमत भी आधी
इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब 50 लाख रुपये है। जबकि शहर में 18 करोड़ रुपये से चलाई गईं लो फ्लोर बसें कंडम हो चुकी हैं। एक लो फ्लोर बस की कीमत 1.20 करोड़ रुपये पड़ी थी। ये बसें शहर में सफल नहीं हो सकीं। इनके मेंटेनेंस में कंपनी की लापरवाही और चलाने में महंगा डीजल खर्च होने की वजह से शहर में आने के बाद ही यह खड़े खड़े कंडम हो गईं। कभी ड्राइवरों की कमी भी बहाना बनी तो कभी आय न होने का बहाना बनाया गया। 2009 में आईं यह बसें शहर में 2012 से चलने लगी थीं। शहर को 20 लो फ्लोर बसें दी गई थीं। इसमें 10 एसी और 10 नॉन एसी थीं। अभी पांच बसें ही शहर में दौड़ रही हैं।
‘शहर में इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज करने के लिए तीन हजार किलोवाट का सबस्टेशन बनाने, वर्कशॉप बनाने के लिए करीब पांच एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। 15 साल की उम्र पूरी कर चुकीं और कंडम सीएनजी बसों की नीलामी की तैयारी की जा रही है।’
- अतुल जैन, प्रबंध निदेशक, महानगरीय बस सेवा
100 इलेक्ट्रिक बसों की चार्जिंग के लिए 3000 किलोवाट का बिजली सबस्टेशन बनेगा। इसके अलावा वर्कशॉप के लिए भी जमीन लेनी होगी। जहां इनकी मरम्मत होगी। सबस्टेशन के लिए पांच एकड़ जमीन तलाशनी शुरू कर दी गई है। दरअसल, यह बसें नगर विकास विभाग की हैं और जमीन भी नगर निगम को ही तलाशनी है। क्योंकि परिवहन निगम के पास बसों को चलाने का अनुभव है। इसलिए शासन ने निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) को महानगरीय बस सेवा का प्रबंध निदेशक बनाया है।
लो फ्लोर बसों से कीमत भी आधी
इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब 50 लाख रुपये है। जबकि शहर में 18 करोड़ रुपये से चलाई गईं लो फ्लोर बसें कंडम हो चुकी हैं। एक लो फ्लोर बस की कीमत 1.20 करोड़ रुपये पड़ी थी। ये बसें शहर में सफल नहीं हो सकीं। इनके मेंटेनेंस में कंपनी की लापरवाही और चलाने में महंगा डीजल खर्च होने की वजह से शहर में आने के बाद ही यह खड़े खड़े कंडम हो गईं। कभी ड्राइवरों की कमी भी बहाना बनी तो कभी आय न होने का बहाना बनाया गया। 2009 में आईं यह बसें शहर में 2012 से चलने लगी थीं। शहर को 20 लो फ्लोर बसें दी गई थीं। इसमें 10 एसी और 10 नॉन एसी थीं। अभी पांच बसें ही शहर में दौड़ रही हैं।
‘शहर में इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज करने के लिए तीन हजार किलोवाट का सबस्टेशन बनाने, वर्कशॉप बनाने के लिए करीब पांच एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। 15 साल की उम्र पूरी कर चुकीं और कंडम सीएनजी बसों की नीलामी की तैयारी की जा रही है।’
- अतुल जैन, प्रबंध निदेशक, महानगरीय बस सेवा