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महारथियों की गणित हुई फेल, जीते पाठक
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर देहात
Updated Sat, 24 Jan 2015 01:32 AM IST
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कानपुर देहात। अरुण पाठक की जीत ने स्नातक निर्वाचन के धुरंधर
महारथियों व समर्थकों की गणित पर पानी फेर दिया। वंशवाद से लेकर जातिगत
आंकड़े, क्षेत्रीय प्रबलता आदि की गोट बैठा रहे लोगों को चुनावी परिणाम में
मुंह की खानी पड़ी।
जिले में अरुण पाठक की जीत पर भाजपाइयों में जीत का जश्न जारी है। स्नातक खंड चुनाव में मतदान से पूर्व और मतदान के बाद तक चुनावी पंडितों के कयास को लेकर मतदाता भी ऊहापोह की स्थिति में फंसे थे।
कोई वंशवाद को खत्म कर दूसरे की बढ़त की दम भर रहा था, तो वहीं 99 वर्षों से चली आ रही परंपरा के न टूटने के कारण गिनाए जा रहे थे। सत्ता पक्ष के असर का भी चुनाव में प्रभाव की चर्चाएं थी।
मतदान के प्रतिशत ने एक बार फिर नगर की गणित को बिगाड़ कर कानपुर देहात की ओर रुख कर लिया। देहात का प्रतिशत 50 फीसदी जाने पर स्नातक पंडितों में चर्चाएं शुरू हो गई। देररात आए चुनाव परिणाम ने सभी की गणित बिगाड़ दी। भाजपाई अरुण पाठक की जीत को ऐतिहासिक बता जशभन मना रहे हैं। दूसरी ओर हारे प्रत्याशी और समर्थक चुनाव के दौरान हुई त्रुटियों को खंगालने में जुट गए हैं।
जिले में अरुण पाठक की जीत पर भाजपाइयों में जीत का जश्न जारी है। स्नातक खंड चुनाव में मतदान से पूर्व और मतदान के बाद तक चुनावी पंडितों के कयास को लेकर मतदाता भी ऊहापोह की स्थिति में फंसे थे।
कोई वंशवाद को खत्म कर दूसरे की बढ़त की दम भर रहा था, तो वहीं 99 वर्षों से चली आ रही परंपरा के न टूटने के कारण गिनाए जा रहे थे। सत्ता पक्ष के असर का भी चुनाव में प्रभाव की चर्चाएं थी।
मतदान के प्रतिशत ने एक बार फिर नगर की गणित को बिगाड़ कर कानपुर देहात की ओर रुख कर लिया। देहात का प्रतिशत 50 फीसदी जाने पर स्नातक पंडितों में चर्चाएं शुरू हो गई। देररात आए चुनाव परिणाम ने सभी की गणित बिगाड़ दी। भाजपाई अरुण पाठक की जीत को ऐतिहासिक बता जशभन मना रहे हैं। दूसरी ओर हारे प्रत्याशी और समर्थक चुनाव के दौरान हुई त्रुटियों को खंगालने में जुट गए हैं।