कोरोना का असर: नींद में खलल, सोते में पैर ज्यादा पटकने लगे हैं लोग, सर्वे में खुलासा, तनाव से हो रही दिक्कत
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कोरोना काल के बाद लोगों के सोने का तरीका बदला है और गुणवत्ता वाली नींद की अवधि घट गई है। लोग सोते में पैर अधिक पटकने लगे हैं। पिंडलियों में ऐंठन और खराब क्वालिटी की नींद के कारण पैर पटकने वालों का प्रतिशत बढ़ गया है। पहले लोग दो-चार बार पैर पटकते थे, अब 30-40 बार पटक रहे हैं।
यह खुलासा स्लीप फाउंडेशन के वीडियो रिकॉर्डिंग सर्वे में हुआ है। इस रोग को ‘रेस्टलेस लेग सिंड्रोम’ कहते हैं। जिन पर सर्वे हुआ, उन लोगों ने बताया कि सोते समय पैर पटकने के बारे में उन्हें जानकारी ही नहीं है। स्लीप फाउंडेशन के निदेशक और स्लीप एक्सपर्ट डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने बताया कि यह सिंड्रोम पहले एक से दो प्रतिशत लोगों में होता रहा है लेकिन कोरोना काल के बाद इसके रोगियों की संख्या आठ प्रतिशत हो गई। अधिक संख्या महिलाओं की है। खून की कमी की वजह से उनमें यह सिंड्रोम जल्दी हो जाता है।
रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के रोगी नींद न आने और अधिक खर्राटे आने की दिक्कत लेकर विशेषज्ञों को दिखाने आए थे। इस पर उनका स्लीप टेस्ट किया गया। इस दौरान रोगी के शरीर में होने वाली क्रिया की वीडियो रिकॉडिंग की गई। जब विशेषज्ञों ने वीडियोे रिकॉर्डिंग का अध्ययन किया तो इस सिंड्रोम के संबंध में पता चला। रोगियों की लाइफ स्टाइल और मानसिक स्थिति का ब्यौरा जुटाया गया। डॉ. लालचंदानी ने बताया कि रोगी की नींद पूरी नहीं होती और पिडलियों में ऐंठन होती है। वह अंजाने में सोते में पैर पटकता है।
अध्ययन
- कुल रोगी आठ सौ
- महिला रोगी 510
- आयु वर्ग-35 से 55 साल
- अनिद्रा की दिक्कत-54 फीसदी
- बीच-बीच में नींद टूटना-44 फीसदी
- रात को सोने के पहले मन-मस्तिष्क शांत कर लें।
- लाल रंग का नाइट बल्ब जलाकर न सोएं।
- बेड रूम में दीवार घड़ी न लगाएं, टिक-टिक से नींद में खलल पड़ सकता है।
- हल्के रंग की बेड शीट, पिलो कवर का इस्तेमाल करें।
- रात में बादाम, कीवी, अखरोट, मछली, चावल का सेवन न करें।
- रात के खाने और सोने के बीच तीन घंटे का गैप रखें, हल्का खाना लें।