{"_id":"68000e6c975f83d29d0c0846","slug":"educational-and-religious-institutions-should-unite-to-prevent-ill-effects-of-climate-change-bhagwat-kanpur-news-c-12-1-knp1007-1076529-2025-04-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव रोकने के लिए शैक्षणिक, धार्मिक संस्थाएं हों एकजुट - भागवत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव रोकने के लिए शैक्षणिक, धार्मिक संस्थाएं हों एकजुट - भागवत
विज्ञापन
स्वयंसेवकों को संबोधित करते संघ् प्रमुख।
- फोटो : संवाद
कानपुर। जलवायु परिवर्तन की वजह से पर्यावरण में हो रहे बदलाव और लोगों पर पड़ रहे उसके दुष्प्रभाव को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने चिंता जाहिर की है। बुधवार को पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से जुड़े संघ के कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने कहा कि लगातार कम हो रहे वन, नीचे जा रहा भूजल, मिलावटी खाद्य सामग्रियां, सिकुड़ रहीं नदियों पर अंकुश नहीं लगा तो स्थिति काफी भयावह होगी। भागवत ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर छह स्तर पर काम करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक संस्थाओं, नारी शक्ति, स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ जनसंपर्क और जन संवाद के माध्यम से इसमें सुधार लाया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के तहत पौधे लगाओ, पानी बचाओ, पॉलिथीन हटाओ के नारे के साथ काम करने की जरूरत बताई। साैर ऊर्जा पर भी विशेष जोर दिया।
उन्होंने इस अभियान से प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ते हुए कहा कि घर की बनावट चाहे जैसी हो लेकिन वहां की बालकनी में, छत पर पौधे जरूर लगाएं। सरसंघचालक ने कहा कि जीवन में राष्ट्रभक्ति का भाव आना चाहिए। जैसे यह बिजली और पानी हमारे देश का है। इसे बेकार नहीं करना है। जब राष्ट्र प्रथम का भाव होगा तो हम छोटी-छोटी बातों पर भी विचार करेंगे।
विज्ञापन
बोलें, सड़क पर जा रहे हैं, कोई नल खुला है, उसे तभी बंद करेंगे जब यह भाव मन में रहेगा। धीरे-धीरे समाज में परिवर्तन आ रहा है, लेकिन अभी और आवश्यकता है। बैठक में पर्यावरण गतिविधि के कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक श्रीराम, प्रांत संघ चालक भवानी भीख, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अनुपम, प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख विकास, गिरजेश श्रीवास्तव सहित कई अन्य स्वयं सेवक उपस्थित रहे।
कानपुर। सरसंघचालक भागवत ने बुधवार को संघ भवन के सभागार में कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठक की। कहा कि भारत की रीति-नीति, परंपरा और संस्कृति से पूरा विश्व फिर से आकर्षित हो रहा है। महाकुंभ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। हमारा देश विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। हमें इसे समझना होगा।
कहा कि हमारे परिवार की जो कल्पना है, उसे सुरक्षित रखने के लिए काम करना है। कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के संबंध में बताया कि कोई भी समाज और संस्कृति छः बिंदुओं के आधार पर चलती है। जिसमें भजन, भोजन, भवन, भाषा और भ्रमण शामिल है। कहा कि परिवार के लोग दिन में एक बार साथ मिलकर भोजन करें। परिवार के अंदर अपनी मातृभाषा में बातचीत करें, हम जो भी पहनें और जिस घर में रहें, वहां के वातावरण में हमारे संस्कार प्रदर्शित होने चाहिए।
कहा कि परिवार के लोगों में एक दूसरे के प्रति दायित्व की अनुभूति रहे। इसे धीरे-धीरे पूरे समाज में बढ़ाना है। जिससे एक आदर्श कुटुंब की स्थापना हो। बैठक में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वागत रंजन, विनोद शंकर सहित सभी क्षेत्र और प्रांत स्तर के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक संस्थाओं, नारी शक्ति, स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ जनसंपर्क और जन संवाद के माध्यम से इसमें सुधार लाया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के तहत पौधे लगाओ, पानी बचाओ, पॉलिथीन हटाओ के नारे के साथ काम करने की जरूरत बताई। साैर ऊर्जा पर भी विशेष जोर दिया।
विज्ञापन
उन्होंने इस अभियान से प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ते हुए कहा कि घर की बनावट चाहे जैसी हो लेकिन वहां की बालकनी में, छत पर पौधे जरूर लगाएं। सरसंघचालक ने कहा कि जीवन में राष्ट्रभक्ति का भाव आना चाहिए। जैसे यह बिजली और पानी हमारे देश का है। इसे बेकार नहीं करना है। जब राष्ट्र प्रथम का भाव होगा तो हम छोटी-छोटी बातों पर भी विचार करेंगे।
विज्ञापन
बोलें, सड़क पर जा रहे हैं, कोई नल खुला है, उसे तभी बंद करेंगे जब यह भाव मन में रहेगा। धीरे-धीरे समाज में परिवर्तन आ रहा है, लेकिन अभी और आवश्यकता है। बैठक में पर्यावरण गतिविधि के कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक श्रीराम, प्रांत संघ चालक भवानी भीख, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अनुपम, प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख विकास, गिरजेश श्रीवास्तव सहित कई अन्य स्वयं सेवक उपस्थित रहे।
कानपुर। सरसंघचालक भागवत ने बुधवार को संघ भवन के सभागार में कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठक की। कहा कि भारत की रीति-नीति, परंपरा और संस्कृति से पूरा विश्व फिर से आकर्षित हो रहा है। महाकुंभ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। हमारा देश विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। हमें इसे समझना होगा।
कहा कि हमारे परिवार की जो कल्पना है, उसे सुरक्षित रखने के लिए काम करना है। कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के संबंध में बताया कि कोई भी समाज और संस्कृति छः बिंदुओं के आधार पर चलती है। जिसमें भजन, भोजन, भवन, भाषा और भ्रमण शामिल है। कहा कि परिवार के लोग दिन में एक बार साथ मिलकर भोजन करें। परिवार के अंदर अपनी मातृभाषा में बातचीत करें, हम जो भी पहनें और जिस घर में रहें, वहां के वातावरण में हमारे संस्कार प्रदर्शित होने चाहिए।
कहा कि परिवार के लोगों में एक दूसरे के प्रति दायित्व की अनुभूति रहे। इसे धीरे-धीरे पूरे समाज में बढ़ाना है। जिससे एक आदर्श कुटुंब की स्थापना हो। बैठक में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वागत रंजन, विनोद शंकर सहित सभी क्षेत्र और प्रांत स्तर के पदाधिकारी उपस्थित रहे।