फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Earthworm manure increasing soil fertilizer capacity

मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ा रही केंचुआ खाद, पांच दिन में खराब होनी वाली सब्जी अब दस दिन चल रही

Tue, 23 Jun 2020 04:48 PM IST
शिखा पांडेय दिव्यांश सिंह, अमर उजाला, कानपुर
दिव्यांश सिंह, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 23 Jun 2020 04:48 PM IST
विज्ञापन
Earthworm manure increasing soil fertilizer capacity
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गूगल
आज के समय में किसान अधिकतर रासायनिक खाद से खेती कर रहे हैं। रासायनिक खाद फसल को स्वादहीन करने, फसल में पोषक तत्वों की कमी करने, मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम करने के साथ ही आपको गंभीर रोगों से घेरने का भी काम करती है।
विज्ञापन


चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कुछ वर्षों पहले किसानों को केंचुआ खाद के महत्व को बताया और उसको बनाने का प्रशिक्षण दिया। एक माह चली ट्रेनिंग के बाद बिल्हौर तहसील के 20 किसान केंचुआ खाद से खेती करने को तैयार हुए।
विज्ञापन


यह किसान पिछले तीन साल से केंचुआ खाद से खेती कर रहे हैं, अब इनका कहना है, जो फसल हमको खराब होने के डर से जल्दी बेचनी पड़ती थी। उसकी क्षमता में विकास हुआ है, वह चार से पांच और दिन स्वस्थ रहती है। साथ ही रासायनिक खादों से खेत की मिट्टी में उर्वरक क्षमता की कमी आई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


उस कमी को केंचुआ खाद ने दूर कर दिया जो अब नहीं है। सीएसए की जैविक खेती के प्रचार एवं प्रसार परियोजना के प्रभारी डॉ डीपी सिंह ने बताया रासायनिक खाद मिट्टी में जीवांश कार्बन को कम कर देती हैं। रासायनिक खाद के अंधाधुंध उपयोग की वजह से बिल्हौर तहसील के खेतों की मिट्टी में जीवांश कार्बन 0.2 से 0.4 प्रतिशत है।

जबकि स्वस्थ मिट्टी में जीवांश कार्बन न्यूनतम 0.8 प्रतिशत होना चाहिए । मिट्टी को पौधे का विकास करने के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, आयरन, जस्ता और मैग्नीज समेत 17 तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। जो कि केंचुआ खाद से पूरे हो जाते हैं।

अगर आप रासायनिक उर्वरक का प्रयोग करते हैं। तो आपको प्रत्येक पोषक तत्व के लिए अलग-अलग खाद का प्रयोग करना पड़ेगा। किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उनको केंचुआ खाद बनाने के उपकरण निशुल्क सीएसए द्वारा मुहैया करवाए गए हैं। समय-समय पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक उन किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं।

किसानों से बातचीत
- बिल्हौर तहसील के अकबरपुर सिंह गांव के किसान कौशल किशोर तिवारी ने बताया पिछले तीन साल से केंचुआ खाद से खेती कर रहे हैं। सीएसए ने हम लोगों को केचुआ खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया और उपकरण निशुल्क मुहैया करवाए थे। इसके उपयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ी है।

हम सब्जियों की खेती करते हैं । पहले हमारा टमाटर और भिंडी 4 से 5 दिन के भीतर खराब हो जाता था जिस वजह से हमको जल्दी बेंचना पड़ता था। अब वही सब्जियां 10 दिन तक रखने पर खराब नहीं होती हैं। केंचुआ खाद घर में बन जाती है। जबकि रासायनिक खाद बाजार से खरीदकर लानी पड़ती थी, उसका पैसा बच जाता है।

- चौबेपुर ब्लाक के तरी पाठकपुर गांव के किसान विजय सिंह ने बताया उनके 30 बीघा खेती है, जिसमें वह सब्जियां बोते हैं। सीएसए से प्रशिक्षण मिलने के बाद वह केंचुआ खाद से सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इसका उपयोग करने से हमारी सब्जियां 4 से 5 दिन ज्यादा रखने पर भी खराब नहीं होती है। सब्जियों को बनाकर खाने में स्वाद अच्छा होता है।

सबसे बड़ी बात रासायनिक खादों को लाने में हमारा रुपया लगता था, इसको हम घर पर ही बना लेते हैं। ट्रेनिंग के दौरान बताया गया था रासायनिक खादों से उपजी फसल से कैंसर समेत कई गंभीर रोग होते हैं । इस वजह से हमने खासकर जैविक खादों से खेती करना शुरू कर दी। सीएसए के वैज्ञानिक हमारा समय समय पर आकर मार्गदर्शन करते रहते हैं।

जैविक खादों से खेती करने पर मिट्टी की उत्पादन क्षमता बढ़ती है साथ ही खेती में पानी भी कम लगता है। 2017 में विश्व विद्यालय की एक परियोजना शुरू हुई थी, जिसके परिणाम बेहतर मिले हैं। बिल्हौर तहसील के गांव में परियोजना शुरू होने से पहले मिट्टी में जीवांश कार्बन 0.4 प्रतिशत था, जो कि अब केंचुआ खाद का प्रयोग होने से 0.48 प्रतिशत हो गया है। हम आगे भी जैविक खेती को लेकर कई परियोजनाएं चलाने और किसानों को प्रशिक्षण देने की योजना बना रहे हैं। - डॉक्टर डीआर सिंह, कुलपति सीएसए

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed