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कोरोना काल में हुई आर्थिक तंगी तो बेटियों ने मांगा अपना शरई हक तरका, सामने आए 55 मामले
Wed, 07 Oct 2020 09:07 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 07 Oct 2020 09:07 PM IST
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कोरोना काल ने शरई हक मांगने के लिए बेटियों का मुंह खुलवा दिया है। अभी तक लोग बेटियों की चुप्पी का फायदा उठा रहे थे और उन्हें पिता की संपत्ति से मिलने वाले शरई हक तरका से वंचित कर रखा था।
तरका बेटी के हक को कहते हैं जो उसे पिता की संपत्ति से मिलता है। यह शरीअत ने प्रावधान कर रखा है। लेकिन लालच की वजह से बेटी का हक मारा जा रहा था। कोरोना काल में आर्थिक स्थिति बिगड़ी तो बेटियां तरका मांगने के लिए आगे आई हैं।
शरई पंचायतों और दारुल कजाओं में ऐसे 55 मामले आए हैैं। उलमा का कहना है कि बेटी को तरका दिए जाने का शरीअत में बहुत सख्त प्रावधान है। लेकिन मुस्लिम समाज के कुछ लोग तरका देते हैं लेकिन ज्यादातर इस हक को मार दे रहे हैं।
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पिता के न रहने पर बहनें मायका छूट जाने के डर से भाइयों से हक नहीं मांगती। लेकिन वक्त ने यह डर खत्म किया है। यह शहर के अलावा आसपास के जिलों से संबंधित हैं। बेटियों ने पिता की संपत्ति से अपना शरई हक मांगा है। इस पर शरई पंचायत और दारुल कजा तरका के संबंध में नोटिसें जारी कर रहा है।
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तरका बेटी के हक को कहते हैं जो उसे पिता की संपत्ति से मिलता है। यह शरीअत ने प्रावधान कर रखा है। लेकिन लालच की वजह से बेटी का हक मारा जा रहा था। कोरोना काल में आर्थिक स्थिति बिगड़ी तो बेटियां तरका मांगने के लिए आगे आई हैं।
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शरई पंचायतों और दारुल कजाओं में ऐसे 55 मामले आए हैैं। उलमा का कहना है कि बेटी को तरका दिए जाने का शरीअत में बहुत सख्त प्रावधान है। लेकिन मुस्लिम समाज के कुछ लोग तरका देते हैं लेकिन ज्यादातर इस हक को मार दे रहे हैं।
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पिता के न रहने पर बहनें मायका छूट जाने के डर से भाइयों से हक नहीं मांगती। लेकिन वक्त ने यह डर खत्म किया है। यह शहर के अलावा आसपास के जिलों से संबंधित हैं। बेटियों ने पिता की संपत्ति से अपना शरई हक मांगा है। इस पर शरई पंचायत और दारुल कजा तरका के संबंध में नोटिसें जारी कर रहा है।
पिता को ही देना चाहिए बेटी का हक
महिला शरई पंचायत के प्रवक्ता और आल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के प्रवक्ता हाजी मो. सलीस ने बताया कि पिता को बेटी की शादी के वक्त ही तरका दे देना चाहिए। अगर पिता नहीं हैं तो भाइयों की जिम्मेदारी है कि बेटी को तरका दें।
शरीअत का पालन हो तो बेटियों हक मांगना ही नहीं पड़ेगा। काउंसिल ने जो निकाहनामा बनवाया है उसमें भी तरका का प्रावधान रखा गया। बहुत से लोग तरका दे भी रहे हैं। तरका में बेटों को जो संपत्ति का हिस्सा मिलता है उससे आधा बेटी को दिया जाता है।
बेटी को तरका दिया जाने का शरीअत में प्रावधान है। इसका पालन किया जाना चाहिए। बेटियों का हक है तो उन्हें दें। पिता नहीं है तो यह जिम्मेदारी भाइयों की बनती है। - हाफिज मामूर अहमद जामई, शहर काजी
अमर उजाला ने चलाया था अभियान
मुस्लिम बेटियों को शरीअत के मुताबिक पिता की संपत्ति से हक तरका दिए जाने का अमर उजाला ने अभियान चलाया था। इस पर उलमा और समाज के बुद्धिजीवियों ने अपील जारी की थी। तलाक महल, हीरामन पुरवा समेत कई जगहों पर हुई शादियों में बेटियों का हक दिया गया। उसी समय आल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के निकाहनामा में तरका का प्रावधान शामिल किया गया।
महिला शरई पंचायत के प्रवक्ता और आल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के प्रवक्ता हाजी मो. सलीस ने बताया कि पिता को बेटी की शादी के वक्त ही तरका दे देना चाहिए। अगर पिता नहीं हैं तो भाइयों की जिम्मेदारी है कि बेटी को तरका दें।
शरीअत का पालन हो तो बेटियों हक मांगना ही नहीं पड़ेगा। काउंसिल ने जो निकाहनामा बनवाया है उसमें भी तरका का प्रावधान रखा गया। बहुत से लोग तरका दे भी रहे हैं। तरका में बेटों को जो संपत्ति का हिस्सा मिलता है उससे आधा बेटी को दिया जाता है।
बेटी को तरका दिया जाने का शरीअत में प्रावधान है। इसका पालन किया जाना चाहिए। बेटियों का हक है तो उन्हें दें। पिता नहीं है तो यह जिम्मेदारी भाइयों की बनती है। - हाफिज मामूर अहमद जामई, शहर काजी
अमर उजाला ने चलाया था अभियान
मुस्लिम बेटियों को शरीअत के मुताबिक पिता की संपत्ति से हक तरका दिए जाने का अमर उजाला ने अभियान चलाया था। इस पर उलमा और समाज के बुद्धिजीवियों ने अपील जारी की थी। तलाक महल, हीरामन पुरवा समेत कई जगहों पर हुई शादियों में बेटियों का हक दिया गया। उसी समय आल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के निकाहनामा में तरका का प्रावधान शामिल किया गया।
मेरे शौहर सिलाई मशीन के कारीगर हैं। लॉक डाउन के समय काम बंद हो गया। इसके बाद उनके फेफड़ों में संक्रमण हो गया। काम नहीं है, सेहत भी ठीक नहीं है। अब्बा खत्म हो गए हैं। भाइयों ने तरका दिया नहीं। इसी से दारुल कजा में गए हैं। - फिरदौस जाजमऊ
अब्बा ने कहा था कि तरका देंगे। फिर उनका इंतकाल हो गया। भाई से कहा तो कुछ बोले नहीं। इसके बाद मायके बुलाना बंद कर दिया। तीन साल नहीं बुलाया तो हम भी चुप हो गए। अब उनकी नौकरी छूट गई है। शौहर टेनरी में काम करते थे। इसी अपना हक मांग रहे। - कहकशां, चकेरी
आठ फतवा जारी किए
शहर काजी मौलाना आलम रजा खां नूरी के दारुल कजा के प्रमुख मुफ्ती और नायब शहर काजी मुफ्ती साकिब अदीब ने बेटियों के तरका के मामले में दो हफ्ते में आठ फतवे जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि फतवे लगातार मांगे जा रहे हैं। शरीअत के मुताबिक पिता की संपत्ति की कीमत से तरका निकाला जाता है। संपत्ति से सबके हिस्से स्पष्ट करके फतवा जारी कर दिया जाता है।
अब्बा ने कहा था कि तरका देंगे। फिर उनका इंतकाल हो गया। भाई से कहा तो कुछ बोले नहीं। इसके बाद मायके बुलाना बंद कर दिया। तीन साल नहीं बुलाया तो हम भी चुप हो गए। अब उनकी नौकरी छूट गई है। शौहर टेनरी में काम करते थे। इसी अपना हक मांग रहे। - कहकशां, चकेरी
आठ फतवा जारी किए
शहर काजी मौलाना आलम रजा खां नूरी के दारुल कजा के प्रमुख मुफ्ती और नायब शहर काजी मुफ्ती साकिब अदीब ने बेटियों के तरका के मामले में दो हफ्ते में आठ फतवे जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि फतवे लगातार मांगे जा रहे हैं। शरीअत के मुताबिक पिता की संपत्ति की कीमत से तरका निकाला जाता है। संपत्ति से सबके हिस्से स्पष्ट करके फतवा जारी कर दिया जाता है।