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Kanpur News: नीले डस्टबिन में सूखा तो हरे में मिलने लगा गीला कचरा
Thu, 06 Nov 2025 01:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 06 Nov 2025 01:40 AM IST
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कानपुर देहात। केवल अकबरपुर नगर निकाय में कचरा निस्तारण को नगर सखियां गति दे रही हैं। अन्य 12 निकायों के लिए यह नजीर है। जागरुकता की कमान संभाले महज एक माह ही हुआ है और अब नीले डस्टबिन में सूखा और हरे में गीला कचरा मिलने लगा है। कचरा संग्रह कर गाड़ियाें से नसरतपुर मंसुरा कचरा निस्ताण केंद्र पहुंचता है। वहां गीले कचरा से जैविक खाद बनाई जा रही है। सूखे कूड़े को रीसाइकिल के लिए बेचा जाता है।
अकबरपुर नगर पंचायत में 19 वार्ड हैं। गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग एकत्र हो इसके लिए घरों में नीले व हरे डस्टबिन बांटे जा चुके हैं। कूड़ा संग्रह करने वाली गाड़ियां भी वार्ड में जा रही थीं। मगर सबसे अधिक समस्या गीला व सूखा कचरा एक साथ देने की समस्या थी। यह बड़ी चुनौती थी। नगर पंचायत कमेटी की बैठक में इसपर चर्चा हुई। सहमति बनी कि जागरूकता के लिए नगर सखी रखी जाएं।
सुबह के समय पांच घंटे ये नगर सखी वार्डों में घर-घर जाकर लोगों को नीले डस्टबिन में सूखा और हरे में गीला कचरा एकत्र करने को जागरूक करें। शुरुआत में किरण मेहता, नेहलता, प्रियंका, कीर्ति व रानी को नगर सखी चुना गया। नगर सखियों की टोली सुबह निकलती है और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करती है। एक माह में ही इसका असर दिखने लगा है। अब कूड़ा गाड़ियों को सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग मिल रहा है। इधर नगर सखियों की प्रतिमाह करीब पांच-पांच हजार रुपये अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।
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प्रत्येक वार्ड में एक कूड़ा संग्रह गाड़ी जाती है। गीला व सूखा कचरा अलग न मिलने से कूड़ा गाड़ी के चालक परेशान होते थे। अब नगर सखियां लोगों को बता रहीं है कि दो डस्टबिन में अलग-अलग कूड़ा रखें और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के दौरान उसी के अनुरूप कचरा सौंपें। इसका असर दिख रहा है। गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग मिल रहा है। गीले कचरे से जैविक खाद और सूखे कचरे को रीसाइकिल के लिए बेचा जाता है। - आशीष कुमार, ईओ अकबरपुर
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जानें क्या है गीला व सूखा कचरा
गीला कचरा जैविक होता है। इसलिए यह आसानी से कम्पोस्ट (खाद) में बदला जा सकता है। इससे जरूरत के अनुसार प्रयोग किया जा सकता है। पर्यावरण को इसका फायदा मिलता है। सूखा कचरा में कागज, प्लास्टिक, लोहा या कांच आदि आता है। यह आसानी से विघटित नहीं होता है। इससे रिसाइकिल करना पड़ता है।
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अकबरपुर नगर पंचायत में 19 वार्ड हैं। गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग एकत्र हो इसके लिए घरों में नीले व हरे डस्टबिन बांटे जा चुके हैं। कूड़ा संग्रह करने वाली गाड़ियां भी वार्ड में जा रही थीं। मगर सबसे अधिक समस्या गीला व सूखा कचरा एक साथ देने की समस्या थी। यह बड़ी चुनौती थी। नगर पंचायत कमेटी की बैठक में इसपर चर्चा हुई। सहमति बनी कि जागरूकता के लिए नगर सखी रखी जाएं।
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सुबह के समय पांच घंटे ये नगर सखी वार्डों में घर-घर जाकर लोगों को नीले डस्टबिन में सूखा और हरे में गीला कचरा एकत्र करने को जागरूक करें। शुरुआत में किरण मेहता, नेहलता, प्रियंका, कीर्ति व रानी को नगर सखी चुना गया। नगर सखियों की टोली सुबह निकलती है और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करती है। एक माह में ही इसका असर दिखने लगा है। अब कूड़ा गाड़ियों को सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग मिल रहा है। इधर नगर सखियों की प्रतिमाह करीब पांच-पांच हजार रुपये अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।
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प्रत्येक वार्ड में एक कूड़ा संग्रह गाड़ी जाती है। गीला व सूखा कचरा अलग न मिलने से कूड़ा गाड़ी के चालक परेशान होते थे। अब नगर सखियां लोगों को बता रहीं है कि दो डस्टबिन में अलग-अलग कूड़ा रखें और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के दौरान उसी के अनुरूप कचरा सौंपें। इसका असर दिख रहा है। गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग मिल रहा है। गीले कचरे से जैविक खाद और सूखे कचरे को रीसाइकिल के लिए बेचा जाता है। - आशीष कुमार, ईओ अकबरपुर
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जानें क्या है गीला व सूखा कचरा
गीला कचरा जैविक होता है। इसलिए यह आसानी से कम्पोस्ट (खाद) में बदला जा सकता है। इससे जरूरत के अनुसार प्रयोग किया जा सकता है। पर्यावरण को इसका फायदा मिलता है। सूखा कचरा में कागज, प्लास्टिक, लोहा या कांच आदि आता है। यह आसानी से विघटित नहीं होता है। इससे रिसाइकिल करना पड़ता है।