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कोमल हृदय: पति को छोड़ दिया लेकिन गोद ली हुईं बेटियां न छोड़ीं, कहा- इनकी बेहतर परवरिश ही जिंदगी का मकसद

Wed, 30 Dec 2020 02:08 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 30 Dec 2020 02:08 PM IST
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Dr. Komal dedicated life for twins daughters
जुड़वां बेटियों के साथ डॉ. कोमल - फोटो : अमर उजाला
जो जुड़वां नवजात बेटियां किसी के लिए भार थीं, वे डॉ. कोमल यादव के जीवन का मकसद बन गईं। इन बेटियों के लिए डॉ. कोमल ने पति से भी एक ही वर्ष में दूरी बना ली। अब बेटियों को बेहतर शिक्षा और संस्कार देना ही उनके जीवन का उद्देश्य है।
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डॉ. कोमल के इस संकल्प में उनकी मां भी सहयोग दे रही हैं। इन दिनों चंडीगढ़ में नौकरी कर रहीं डॉ. कोमल की बेटियों के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो खासी वाहवाही लूट रही है। डॉ. कोमल मूलरूप से बुलंदशहर की रहने वाली हैं।
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वर्ष 2014 में एमएस (सर्जन) की पढ़ाई महाराष्ट्र से पूरी करने के बाद उन्होंने फर्रुखाबाद में मेजर एसडी सिंह मेडिकल कॉलेज में नौकरी कर ली। साथ ही वह आवास विकास कालोनी स्थित नर्सिंगहोम में भी सेवाएं देने लगी थीं। डॉ. कोमल ने 18 अक्तूबर 2015 को नर्सिंगहोम में भर्ती महिला का प्रसव कराया।
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महिला ने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। प्रसूता के पति की छह माह पूर्व मौत हो चुकी थी और उसके दो बेटियां पहले से थीं। आर्थिक तंगी के चलते महिला अपनी नवजात बेटियों को नर्सिंगहोम में छोड़कर चुपचाप चली गई। उन दोनों नवजात बेटियों को डॉ. कोमल यादव ने गोद ले लिया।

कुछ दिन बाद ही वह बेटियों को लेकर हिमाचल प्रदेश चली गईं और वहीं नौकरी करने लगीं। इसी बीच ईंट भट्ठा मालिक पिता सीताराम यादव ने उनकी शादी चंडीगढ़ में एक व्यापारी से तय कर दी। शादी से पहले ही डॉ. कोमल ने पति व ससुरालीजनों को यह बता दिया था कि वह खुद अपने बच्चे को जन्म नहीं देंगी।

वर्ष 2016 में उनकी शादी हुई तो वह अपनी जुड़वां बेटियों को भी ससुराल साथ लेकर गईं। वहां बेटियों को प्यार-दुलार मिला। कुछ मसलों को लेकर दंपती में मतभेद हो गए। जिसके बाद दोनों आपसी रजामंदी से अलग हो गए। 

अब चंडीगढ़ में ही नौकरी और क्लीनिक 
डॉ. कोमल तीन वर्ष से चंडीगढ़ में ही अपना क्लीनिक चलाने के साथ दो निजी अस्पतालों में नौकरी भी कर रहीं हैं। दोनों बेटियां रीत और रिदम अब पांच वर्ष की हो चुकी हैं। वह चंडीगढ़ के मानव मंगल स्कूल में केजी में पढ़ रही हैं। डॉ. कोमल ने बताया कि बेटियों ने उन्हें जीना सिखाया।

इससे बेटियों की बेहतर परवरिश, शिक्षा, संस्कार के साथ भविष्य बनाना उनके जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि बेटियों की परवरिश में नर्सिंगहोम स्टाफ और उनकी मां की भी मुख्य भूमिका है। इसी माह उन्होंने चंडीगढ़ में एक घर भी खरीद लिया है। उनके कोई भाई नहीं है। छोटी बहन भी डाक्टर बनकर दिल्ली में नौकरी कर रही है। मां उनके साथ रहती हैं। इन दिनों बेटियों के साथ उनकी मां बुलंदशहर गई हैं। 24 जनवरी को वह उन्हें लेने जाएंगी।
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