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'पैसा नहीं तो इलाज नहीं' डॉक्टरों की संवेदनहीनता आई सामने, ये है यूपी के जाने माने अस्पताल का हाल!

Tue, 24 Jul 2018 12:17 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 24 Jul 2018 12:17 AM IST
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doctors did not treated patient in hallet Kanpur
अस्पताल से भगाया गया घायल - फोटो : अमर उजाला
कानपुर हैलट के डॉक्टरों की संवेदनहीनता सामने आई है। बाहर से दवा न लाने पर उन्नाव में सड़क हादसे में घायल दो दोस्तों का हैलट इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया। दोनों घायलों को इमरजेंसी से बाहर कर दिया। इसके बाद दवा का बकाया बिल न चुकाने पर मेडिकल स्टोर संचालक ने भी घायलों को रोक लिया। दोपहर में घायलों के एक रिश्तेदार के बिल चुकता करने के बाद परिजन घायलों को वहां से ले जा सके। इस मामले को डीएम विजय विश्वास पंत ने गंभीरता से लिया है। डीएम ने इमरजेंसी में डॉक्टरों से घायलों को भगाए जाने से बारे में सवाल-जवाब किए।
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रविवार दोपहर उन्नाव के मकदूम नगर निवासी राजपाल और शिव बरन सड़क हादसे में घायल हो गए थे। रात करीब नौ बजे परिजन घायलों को लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचे। उनके साथ आए मकदूम नगर के पूर्व प्रधान विनोद ने बताया कि इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टरों ने घायलों का पर्चा बनवाया। फिर परिजनों को मेडिकल स्टोर से दवा लाने के लिए पर्चा थमा दिया। परिजन ढाई हजार रुपये देकर दवाएं ले आए। बाकी बिल बकाया कर दिया।
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रात में क्या हुआ इस बारे में जानकारी नहीं है....

doctors did not treated patient in hallet Kanpur
अस्पताल से भगाया गया घायल - फोटो : अमर उजाला
परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि बाहर से दवाएं खरीदने के लिए अब पैसा नहीं है। इस पर डॉक्टर भड़क गए और इलाज बंद कर दिया। सोमवार सुबह दोनों को इमरजेंसी से बाहर कर दिया। तीमारदार घायलों को घर लेकर जा रहे थे, तभी मेडिकल स्टोर वाले ने उन लोगों को रोक लिया। कहा बिल चुकाओ, तभी यहां से जा सकोगे। बाद में रिश्तेदार ने बिल चुकाया। 

ईएमओ का बयान
इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर डॉ. विनय ने बताया कि सोमवार को उनकी सुबह की पाली में ड्यूटी थी। वह ड्यूटी पर पहुंचे और बाहर पड़े मरीजों के बारे में पूछा। शिव बरन और राजपाल को अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए। परिजनों ने भर्ती कराने से इंकार कर दिया। रविवार रात में क्या हुआ। इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
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