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सोशल मीडिया पर ‘डॉक्टर बंदर’ की धूम
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 22 Dec 2014 02:50 AM IST
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कुदरत सबको जीने के लिए हर तरह की नेमत से नवाजती है। इसकी बानगी आज कानपुर सेंट्रल पर दिखाई दी, जब करंट से बेहोश हुए बंदर को बचाने के लिए साथी बंदर ने एक डॉक्टर की भूमिका अदा की।
गौर करने वाली बात है कि उसने अपने इस प्रयास से साथी बंदर की जान भी बचा ली। रविवार को इस वीडियो को सोशल मीडिया, यूट्यूब पर हजारों लाइक मिले।
फेसबुक, ट्विटर से लेकर व्हाट्स एप पर ‘डॉक्टर बंदर’ के वीडियो, फोटो और न्यूज वायरल होती रही। इसके साथ ही इस डॉक्टर बंदर ने इंसानों को मानवता का संदेश भी दिया।
हुआ यूं कि सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक बंदर ओवर हेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन से झटका खाकर नीचे गिरकर बेहोश हो गया। अपने साथी को नीचे गिरा देखकर दूसरा बंदर दौड़कर आया।
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इधर-उधर देखने के बाद जब कोई उसकी मदद को आगे नहीं आया तो बंदर ने पहले उसे पीटा, फिर दांत से काटा इसके बाद बेहोश बंदर को पानी में डुबाया ताकि वह होश में आए।
ये प्रक्रिया करीब एक घंटे तक दोहराई गई लेकिन इतनी देर में न तो कोई रेल कर्मी न कोई यात्री उसकी मदद को आगे आया। हालांकि ‘डॉक्टर बंदर’ की मेहनत बेकार नहीं गई और एक घंटे बाद बंदर को होश आ गया।
इसके बाद दोनों वहां से चले गए। इस बारे में सीनियर फीजिशियन डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि बंदर ने ठीक वैसा ही किया जैसा कि इंसान करते हैं।
वैसे अगर इंसान को शॉक लगता है और नजदीक में मेडिकल की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो उसके हार्ट को पंप करके, बॉडी को झटका देने, पानी के छींटे मारने की सलाह दी जाती है। बंदर ने भी यही किया।
बंदर ने दी मानवता की सीख
सड़क पर किसी भी हादसे के बाद घायल को सड़क पर दर्द से तड़पता हुआ देखकर आने-जाने वालों को इस बंदर से कुछ सबक लेना चाहिए।
ट्विटर पर अतुल गर्ग ने जहां पूरी कहानी लिखकर ‘डॉक्टर बंदर’ से मानवता का पाठ सीखने की बात कहीं है वहीं मुमताज अहमद ने लिखा है कि साथी को बचाने के लिए बंदर ने इंसानों जैसा व्यवहार किया, हम कब सही मायने में इंसान बनेंगे। रजत ने बंदर को रियल हीरो ऑफ कानपुर कहा है।
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गौर करने वाली बात है कि उसने अपने इस प्रयास से साथी बंदर की जान भी बचा ली। रविवार को इस वीडियो को सोशल मीडिया, यूट्यूब पर हजारों लाइक मिले।
फेसबुक, ट्विटर से लेकर व्हाट्स एप पर ‘डॉक्टर बंदर’ के वीडियो, फोटो और न्यूज वायरल होती रही। इसके साथ ही इस डॉक्टर बंदर ने इंसानों को मानवता का संदेश भी दिया।
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हुआ यूं कि सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक बंदर ओवर हेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन से झटका खाकर नीचे गिरकर बेहोश हो गया। अपने साथी को नीचे गिरा देखकर दूसरा बंदर दौड़कर आया।
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इधर-उधर देखने के बाद जब कोई उसकी मदद को आगे नहीं आया तो बंदर ने पहले उसे पीटा, फिर दांत से काटा इसके बाद बेहोश बंदर को पानी में डुबाया ताकि वह होश में आए।
ये प्रक्रिया करीब एक घंटे तक दोहराई गई लेकिन इतनी देर में न तो कोई रेल कर्मी न कोई यात्री उसकी मदद को आगे आया। हालांकि ‘डॉक्टर बंदर’ की मेहनत बेकार नहीं गई और एक घंटे बाद बंदर को होश आ गया।
इसके बाद दोनों वहां से चले गए। इस बारे में सीनियर फीजिशियन डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि बंदर ने ठीक वैसा ही किया जैसा कि इंसान करते हैं।
वैसे अगर इंसान को शॉक लगता है और नजदीक में मेडिकल की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो उसके हार्ट को पंप करके, बॉडी को झटका देने, पानी के छींटे मारने की सलाह दी जाती है। बंदर ने भी यही किया।
बंदर ने दी मानवता की सीख
सड़क पर किसी भी हादसे के बाद घायल को सड़क पर दर्द से तड़पता हुआ देखकर आने-जाने वालों को इस बंदर से कुछ सबक लेना चाहिए।
ट्विटर पर अतुल गर्ग ने जहां पूरी कहानी लिखकर ‘डॉक्टर बंदर’ से मानवता का पाठ सीखने की बात कहीं है वहीं मुमताज अहमद ने लिखा है कि साथी को बचाने के लिए बंदर ने इंसानों जैसा व्यवहार किया, हम कब सही मायने में इंसान बनेंगे। रजत ने बंदर को रियल हीरो ऑफ कानपुर कहा है।