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Kanpur News: पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने में डॉक्टर को आठ साल की कैद

Fri, 23 May 2025 01:19 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 23 May 2025 01:19 AM IST
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Doctor gets 8 years imprisonment for inciting his wife to commit suicide
कानपुर। पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने के दोषी डॉ. सुशील कुमार वर्मा को अपर जिला जज 14 की अदालत ने आठ साल कैद और 1.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट का फैसला मंगलवार को ही आना था, लेकिन फैसला सुनाए जाने के समय डॉ. सुशील कोर्ट नहीं पहुंचने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो गया था। गुरुवार को डॉ. सुशील कोर्ट में हाजिर हुए, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें सजा सुना दी।
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प्रयागराज के नैनी काॅलोनी निवासी अर्जुन प्रसाद ने बेटी डॉ. मंजू वर्मा की शादी 29 जनवरी 2019 को रायबरेली के आईटीआई काॅलोनी निवासी डॉ. सुशील कुमार वर्मा से की थी। शादी के बाद दोनों कानपुर में बिठूर सिंहपुर रोड स्थित अपार्टमेंट में रहने लगे। 14 मई 2024 को डॉ. मंजू वर्मा की अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से गिरकर माैत हो गई थी। अर्जुन ने बिठूर थाने में डॉ. सुशील कुमार वर्मा व अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि दहेज में फ्लैट खरीदने के लिए 30 लाख रुपये की मांग पूरी न होने के कारण डॉ. सुशील ने पत्नी को बिल्डिंग की आठवीं मंजिल से फेंक दिया था, जिससे मंजू की मौत हो गई थी।
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एडीजीसी शिवभगवान गोस्वामी ने बताया कि अभियोजन की ओर से मंजू के माता-पिता समेत 12 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट ने माना कि सबूतों और गवाहों से यह साबित होता है कि अभियुक्त अक्सर अपनी पत्नी के साथ लड़ाई-झगड़ा कर शारीरिक व मानसिक क्रूरता करता था। घटना के दिन भी उसने मारपीट की, जिससे आहत होकर पत्नी ने खुदकुशी कर ली। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने डॉ. सुशील को दहेज हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया और खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी मानकर सजा सुनाई।
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सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से तर्क रखा गया कि अभियुक्त पेशे से डॉक्टर है। उसका पांच साल का बेटा है, जो उसके साथ रहता है और उसकी परवरिश की जिम्मेदारी अभियुक्त पर ही है, इसलिए सजा में रहम बरती जाए। वहीं, एडीजीसी शिवभगवान गोस्वामी ने तर्क रखा कि मंजू भी डॉक्टर थी। एमडी की तैयारी कर रही थी, लेकिन अभियुक्त ने शारीरिक और मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उसे मौत का रास्ता चुनने को मजबूर होना पड़ा। सजा पर सुनवाई के दिन भी अभियुक्त फरार हो गया। उसका आचरण देखकर सख्त सजा दी जानी चाहिए।

फाॅरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने गवाही में कहा था कि घटनास्थल से दो मोबाइल बरामद हुए थे, जिसे एसओ को सौंप दिया गया था, लेकिन अभियोजन ने इस महत्वपूर्ण साक्ष्य को पेश नहीं किया। यह विवेचक की घोर लापरवाही है। कोर्ट ने कहा कि विवाहित स्त्री की संदिग्ध हालात में मौत का मामला था, इसमें सावधानीपूर्वक विवेचना करनी चाहिए थी, लेकिन विवेचक ने लापरवाही बरती।
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