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Kanpur: जुड़वा बच्चों की हालत थी बेहद गंभीर, महज 800 ग्राम था वजन, डॉक्टर ने 30 दिन संघर्ष कर बचाई जिंदगी

Tue, 28 Feb 2023 11:52 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 28 Feb 2023 11:52 PM IST
सार

कानपुर मेडिकल सेंटर के डॉ. सी.एस. गांधी ने एक महिला के प्री-मैच्योर और कमजोर बच्चों को बचाने में सफलता हासिल की है। बता दें कि दोनों जुड़वा बच्चे थे, जिनकी हालत बेहद गंभीर थी।

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Doctor CS Gandhi rescues twins in critical condition in Kanpur
जुड़वा बच्चों के साथ डॉक्टर और उनकी टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में समय से पहले जन्मे 800 ग्राम के दो बच्चों को डॉक्टर ने अपने ट्रीटमेंट के दम पर बचा लिया गया। खासबात यह है कि बच्चों को होली से पहले ही डिस्चार्ज कर दिया गया है। अब माता बच्चों का जीवन सींचेंगी। ऐसे मामलों में एक हजार में से मात्र 2 या 3 बच्चे बचते हैं।

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यह डॉ. सी.एस. गांधी और कानपुर मेडिकल सेंटर के स्टाफ के लिए बड़ी उपलब्धि है। मिली जानकारी के अनुसार, शहर के पास के एक किसान दंपती को प्री-मैच्योर डिलीवरी से जुड़वा बच्चे हुए। 26 जनवरी को अन्य अस्पताल में भर्ती जुड़वा बच्चों को सेंटर लाया गया।
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ये प्री-मैच्योर बेबी थे, जो छह माह (28 हफ्ते) ही मां के गर्भ मे रहे। इनका वजन लगभग 800 ग्राम था, जबकि सामान्य शिशु 40 हफ्ते गर्भ में रहते हैं और वजन लगभग 300 किलोग्राम तक होता है। दोनों शिशुओं को सांस में गंभीर परेशानी हो रही थी। शरीर का ऑक्सीजन स्तर भी गिर रहा था।

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समय से पहले होने की वजह से इनके अंग पूर्ण रूप से विकसित नहीं होते। इसलिए इन्हें दूध पचाने में भी कठिनाई होती थी। एक माह से भी अधिक समय अस्पताल में रहकर धीरे-धीरे सांस लेने व आंतों की क्षमता में सुधार हुआ। कई बार एंटीबायोटिक दवाओं का सहारा लेना पड़ा। साथ ही, कई बार खून भी चढ़ाना पड़ा।

प्री-मैच्योर बच्चों के फेफड़े विकसित नहीं थे
डॉ. गांधी ने बताया कि प्री मैच्योर बच्चे में शरीर का हर अंग कमजोर होता है। खासतौर पर ब्रेन और फेफड़े। इन बच्चों के भी फेफड़े विकसित नहीं होने से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए पहले 15 दिन तक सभी बच्चों को ऑक्सीजन पर रखा। डॉक्टरों व स्टॉफ ने महीने भर 24 घंटे इलाज कर बच्चों की जान बचाई।

बच्चों को जीवित रखना बड़ी चुनौती थी
उन्होंने बताया कि बच्चों का वजन बहुत कम था। उनके लंग्स, हार्ट व शरीर के अन्य अंग कमजोर थे। लंग्स मैच्योर नहीं होने से उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। बच्चों को जीवित रखना डॉक्टर व अस्पताल स्टॉफ के लिए बड़ी चुनौती थी। प्रसूता को जुड़वा बच्चों के साथ अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

प्री-मैच्योर बेबी को चाहिए विशेष देखभाल
प्री-मैच्योर बेबी यानी समय से पहले जन्म लेने वाले शिशु कई बार गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान व प्री-मैच्योर डिलीवरी के बाद महिलाओं को विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान सावधानी बरतकर प्री-मैच्योर शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।

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