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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: भाजपा की स्वप्निल वरुण बनीं जिला पंचायत अध्यक्ष, ये रही पूरी जानकारी
Sat, 03 Jul 2021 07:26 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 03 Jul 2021 07:26 PM IST
सार
सपा ने जिला पंचायत की 32 में 11 सीटों पर जीत हासिल करके अपना दबदबा दिखाया था, भाजपा के पास सिर्फ नौ सीटें थीं। अध्यक्ष पद के लिए पड़े वोट में सपा के पांच सदस्य भाजपा के खेमे में जा बैठे।
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स्वप्निल वरुण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय जनता पार्टी से जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी स्वप्निल वरुण ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की है। स्वप्निल पूर्व मंत्री स्व. कमलरानी वरुण की बेटी हैं। इनके पक्ष में 32 जिला पंचायत सदस्यों में 25 ने मतदान किया। सपा प्रत्याशी राजू दिवाकर के हिस्से सिर्फ पांच वोट आए।
दो वोट अवैध घोषित हुए। सपा ने जिला पंचायत की 32 में 11 सीटों पर जीत हासिल करके अपना दबदबा दिखाया था, भाजपा के पास सिर्फ नौ सीटें थीं। अध्यक्ष पद के लिए पड़े वोट में सपा के पांच सदस्य भाजपा के खेमे में जा बैठे।
इससे पार्टी की किरकिरी तो हुई ही, साख पर बट्टा भी लगा। समाजवादी पार्टी के सभी सदस्य एक साथ वोट डालने आए थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सपा भाजपा का जोरदारी से मुकाबला करेगी। मगर कुछ ही घंटों में पार्टी के अपने ही कार्यकर्ताओं ने सपा को गच्चा दे दिया।
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भारतीय जनता पार्टी के साथ 21 सदस्य वोट करने आए थे। इनमें से निर्दलीय और बसपा के सदस्य भी शामिल थे। भाजपा ने 27 वोट से जीत का दावा किया था। भाजपा का यह दावा लगभग सही साबित हुआ। बताते हैं जो दो वोट अवैध हुए हैं वे सही पड़ते तो जीत निश्चित रूप से 27 वोट से ही थी।
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दो वोट अवैध घोषित हुए। सपा ने जिला पंचायत की 32 में 11 सीटों पर जीत हासिल करके अपना दबदबा दिखाया था, भाजपा के पास सिर्फ नौ सीटें थीं। अध्यक्ष पद के लिए पड़े वोट में सपा के पांच सदस्य भाजपा के खेमे में जा बैठे।
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इससे पार्टी की किरकिरी तो हुई ही, साख पर बट्टा भी लगा। समाजवादी पार्टी के सभी सदस्य एक साथ वोट डालने आए थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सपा भाजपा का जोरदारी से मुकाबला करेगी। मगर कुछ ही घंटों में पार्टी के अपने ही कार्यकर्ताओं ने सपा को गच्चा दे दिया।
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भारतीय जनता पार्टी के साथ 21 सदस्य वोट करने आए थे। इनमें से निर्दलीय और बसपा के सदस्य भी शामिल थे। भाजपा ने 27 वोट से जीत का दावा किया था। भाजपा का यह दावा लगभग सही साबित हुआ। बताते हैं जो दो वोट अवैध हुए हैं वे सही पड़ते तो जीत निश्चित रूप से 27 वोट से ही थी।
माना जा रहा है कि इतनी पक्की जीत का दावा करने के लिए भाजपा ने एक-एक सदस्य को अपने खेमे में करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। स्वप्निल वरुण ने इस भारी भरकम जीत को अपनी मां का आशीर्वाद बताया। कहा कि उन्हें सभी दलों के सदस्यों का स्नेह मिला। सभी ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया।
पहली ही खेप में भाजपा ने दर्ज कर ली थी जीत
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सुबह 11 बजे मतदान शुरू हुआ था। इसी दौरान स्वप्निल वरुण के साथ कतार में 21 जिला पंचायत सदस्य एक ही बस से उतरे। जिलाधिकारी कार्यालय के प्रवेश द्वार से जिलाधिकारी कोर्ट तक करीब 250 मीटर पैदल चलकर मतदान के लिए पहुंचे।
21 सदस्यों की इस खेप में बसपा के पांच और निर्दलीय आठ सदस्य शामिल थे। उसी समय तय हो गया था कि बसपा और निर्दलीय भाजपा की तरफ से वोट करेंगे। ऐसा हुआ भी। मतदाताओं की दूसरी खेप करीब एक बजे पहुंची। इसमें सपा के जीते हुए सभी 11 जिला पंचायत सदस्य शामिल थे। सपा की हार तय मानी जा रही थी लेकिन ये अंदाजा नहीं था कि पार्टी के सदस्य भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट करेंगे।
सुरक्षा के कड़े थे इंतजाम
चुनाव को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। करीब ढाई सौ मीटर के दायरे को आम लोगों के लिए प्रतिबंधित किया गया था। जिलाधिकारी कार्यालय के प्रवेश द्वार से लेकर मतदान कक्ष तक 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहे। तीन जगह बैरिकेडिंग थी। मतदान के दौरान किसी को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं थी।
पहली ही खेप में भाजपा ने दर्ज कर ली थी जीत
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सुबह 11 बजे मतदान शुरू हुआ था। इसी दौरान स्वप्निल वरुण के साथ कतार में 21 जिला पंचायत सदस्य एक ही बस से उतरे। जिलाधिकारी कार्यालय के प्रवेश द्वार से जिलाधिकारी कोर्ट तक करीब 250 मीटर पैदल चलकर मतदान के लिए पहुंचे।
21 सदस्यों की इस खेप में बसपा के पांच और निर्दलीय आठ सदस्य शामिल थे। उसी समय तय हो गया था कि बसपा और निर्दलीय भाजपा की तरफ से वोट करेंगे। ऐसा हुआ भी। मतदाताओं की दूसरी खेप करीब एक बजे पहुंची। इसमें सपा के जीते हुए सभी 11 जिला पंचायत सदस्य शामिल थे। सपा की हार तय मानी जा रही थी लेकिन ये अंदाजा नहीं था कि पार्टी के सदस्य भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट करेंगे।
सुरक्षा के कड़े थे इंतजाम
चुनाव को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। करीब ढाई सौ मीटर के दायरे को आम लोगों के लिए प्रतिबंधित किया गया था। जिलाधिकारी कार्यालय के प्रवेश द्वार से लेकर मतदान कक्ष तक 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात रहे। तीन जगह बैरिकेडिंग थी। मतदान के दौरान किसी को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं थी।