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एसजीपीजीआई के निदेशक बोले: 90 फीसदी को वैक्सीन लगने के बाद ही टलेगा कोरोना का खतरा
Sun, 26 Sep 2021 11:19 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 26 Sep 2021 11:19 PM IST
सार
डॉ. धीमन ने कहा कि प्रदेश में मेडिकल कालेजों की संख्या बढ़ रही है। इससे आम आदमी को आसानी से इलाज मिलेगा। इस मौके पर विशेषज्ञों ने निमोनिया, डायबिटीज, हाइपोथर्मिया, बुखार आदि पर ऑनलाइन व्याख्यान दिए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया की 38वीं राज्यस्तरीय कॉन्फ्रेंस यूपी एपीकॉन-2021 में मुख्य अतिथि एसजीपीजीआई लखनऊ के निदेशक डॉ. आरके धीमन ने कहा कि कोरोना का खतरा तब तक बना रहेगा, जब तक 90 फीसदी आबादी को वैक्सीन नहीं लग जाती।
वैक्सीन की दोनों डोज जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना कम हो गया, ऐसे में नॉन कोविड रोगियों, शोध और तकनीकी रूप से अपडेट किए जाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। यूपी एपीकॉन का आयोजन हैलट परिसर स्थित मेडिसिन विभाग के सभागार में कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
इसमें देश भर से करीब 500 डॉक्टर जुड़े। डॉ. धीमन ने कहा कि प्रदेश में मेडिकल कालेजों की संख्या बढ़ रही है। इससे आम आदमी को आसानी से इलाज मिलेगा। इस मौके पर विशेषज्ञों ने निमोनिया, डायबिटीज, हाइपोथर्मिया, बुखार आदि पर ऑनलाइन व्याख्यान दिए।
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विभाग के सीनियर रेजीडेंट ने पेट रोग, थाइरॉइड आदि पर शोध प्रस्तुत किए। इस मौके पर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव डॉ. संजय टंडन को बेस्ट सेक्रेटरी का अवार्ड दिया गया। सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रवीण को एनएन गुप्ता अवार्ड, डॉ. सुहास को डॉ. एसएन गुप्ता अवार्ड दिया गया।
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वैक्सीन की दोनों डोज जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना कम हो गया, ऐसे में नॉन कोविड रोगियों, शोध और तकनीकी रूप से अपडेट किए जाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। यूपी एपीकॉन का आयोजन हैलट परिसर स्थित मेडिसिन विभाग के सभागार में कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
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इसमें देश भर से करीब 500 डॉक्टर जुड़े। डॉ. धीमन ने कहा कि प्रदेश में मेडिकल कालेजों की संख्या बढ़ रही है। इससे आम आदमी को आसानी से इलाज मिलेगा। इस मौके पर विशेषज्ञों ने निमोनिया, डायबिटीज, हाइपोथर्मिया, बुखार आदि पर ऑनलाइन व्याख्यान दिए।
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विभाग के सीनियर रेजीडेंट ने पेट रोग, थाइरॉइड आदि पर शोध प्रस्तुत किए। इस मौके पर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव डॉ. संजय टंडन को बेस्ट सेक्रेटरी का अवार्ड दिया गया। सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रवीण को एनएन गुप्ता अवार्ड, डॉ. सुहास को डॉ. एसएन गुप्ता अवार्ड दिया गया।
इसके बाद गवर्निंग काउंसिल की बैठक हुई। इसमें अगले साल की कॉन्फ्रेंस का स्थल नोएडा तय किया गया। कॉन्फ्रेंस में 45 पीजी छात्रों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। विशिष्ट अतिथि सीएसजेएमयू के कुलपति डॉ. विनय पाठक थे। इस मौके पर जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला, डॉ. संतोष कुमार, एपीआई की नगर शाखा अध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि, सचिव डॉ. एसके गौतम, डॉ. किरन पांडेय, डॉ. जेएस कुशवाहा, डॉ. नंदिनी रस्तोगी, डॉ. विशाल गुप्ता मौजूद रहे।
सभी अंगों पर असर डाल रहा बुखार
एपीकॉन में मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि इस बार बुखार से कई अंग प्रभावित हो रहे हैं। इस बार स्थिति अधिक खराब है। अभी लैप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, मलेरिया नहीं मिल रहा है। डेंगू और टाइफायड ही मिल रहा है। लोग विशेषज्ञ डॉक्टरों से ही इलाज कराएं।
मिरगी रोगी को आठ घंटे नींद जरूरी
एपीआई में कन्नौज मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने ऑनलाइन व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मिरगी के रोगियों को इलाज के साथ आठ घंटे नीद जरूरी है। डॉ. कुमार ने मिरगी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के संबंध में बताया और कहा कि मिरगी के रोगी को सम्मान की नजर से देखा जाना चाहिए।
सभी अंगों पर असर डाल रहा बुखार
एपीकॉन में मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि इस बार बुखार से कई अंग प्रभावित हो रहे हैं। इस बार स्थिति अधिक खराब है। अभी लैप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, मलेरिया नहीं मिल रहा है। डेंगू और टाइफायड ही मिल रहा है। लोग विशेषज्ञ डॉक्टरों से ही इलाज कराएं।
मिरगी रोगी को आठ घंटे नींद जरूरी
एपीआई में कन्नौज मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने ऑनलाइन व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मिरगी के रोगियों को इलाज के साथ आठ घंटे नीद जरूरी है। डॉ. कुमार ने मिरगी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के संबंध में बताया और कहा कि मिरगी के रोगी को सम्मान की नजर से देखा जाना चाहिए।