{"_id":"5d1f0f4a8ebc3e3c6e1fd0b3","slug":"devshayani-ekadashi-2019-special-story","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"देवशयनी एकादशी: 12 जुलाई को योग निद्रा में चले जाएंगे भगवान विष्णु, बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवशयनी एकादशी: 12 जुलाई को योग निद्रा में चले जाएंगे भगवान विष्णु, बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य
Fri, 05 Jul 2019 02:28 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 05 Jul 2019 02:28 PM IST
विज्ञापन
भगवान विष्णु
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान विष्णु 12 जुलाई को योग निद्रा में चले जाएंगे और इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित हो जाएंगे। इसके बाद 8 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी पर भगवान के वापस आने पर मांगलिक कार्यक्रम शुरू होंगे। इस दौरान धार्मिक और व्यावसायिक कार्यक्रम होते रहेंगे। इसमें पौधरोपण, पूजा पाठ, रुद्राभिषेक आदि शामिल हैं।
पंडित केए दुबे पद्मेश और डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इस दिन से हिंदुओं में मांगलिक कार्यक्रम वर्जित होंगे। ऐसी मान्यता है कि ये चार मास भगवान विष्णु के आराम के हैं और वह क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। जिसके चलते शुभ विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रम नहीं होंगे।
विज्ञापन
पंडित केए दुबे पद्मेश और डॉ. आदित्य पांडेय ने बताया कि 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इस दिन से हिंदुओं में मांगलिक कार्यक्रम वर्जित होंगे। ऐसी मान्यता है कि ये चार मास भगवान विष्णु के आराम के हैं और वह क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। जिसके चलते शुभ विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रम नहीं होंगे।
विज्ञापन
कारण है कि शादी में विष्णु भगवान की वेदी अनिवार्य है। भगवान विष्णु क्षीर सागर में हैं इसलिए उनका आह्वान संभव नहीं है। यदि सामर्थ्य हो तो चार महीने दूध और दूध से बनी वस्तुओं का भी त्याग करें।
इसका वैज्ञानिक कारण है कि इन दिनों हरी घास में कीटाणु हो जाते हैं और जानवर हरी घास अधिक खाते हैं, जिसके चलते गाय, भैंस, बकरी के दूध में विषैलापन आ जाता है। इस कारण सावन मास में यह दूध भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। सावन में बड़ी संख्या में रुद्राभिषेक भी होते हैं।
इसका वैज्ञानिक कारण है कि इन दिनों हरी घास में कीटाणु हो जाते हैं और जानवर हरी घास अधिक खाते हैं, जिसके चलते गाय, भैंस, बकरी के दूध में विषैलापन आ जाता है। इस कारण सावन मास में यह दूध भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। सावन में बड़ी संख्या में रुद्राभिषेक भी होते हैं।