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Kanpur News: भूकंप ने तहस नहस किया, हुनर से खड़े हुए
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कानपुर। गुजरात के कच्छ में आए भूकंप ने सब कुछ तहस नहस कर दिया था। पथरीले इलाके के साथ जमीनी क्षेत्र भी प्रभावित हो गए थे। उनके परंपरागत हुनर ने उन्हें दोबारा खड़ा किया। यह कहना है अंचल पी. बिजलानी का, जिन्हें समारोह में डॉक्टर आफ लेटर्स (डीलिट) की उपाधि मिली है। उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई की, लेकिन हुनर ने डिलिट की उपाधि दिला दी।
अंचल के मुताबिक कच्छ में आए भूकंप से सब कुछ तहस नहस हो गया था। उस समय उनकी उम्र 17 वर्ष थी। उन लोगों के पास चर्म शिल्प का परंपरागत हुनर था। लोग भूकंप प्रभावित क्षेत्र देखने आए। वहां की हस्तकला देखकर हतप्रभ रह गए। वह क्राफ्ट रूट से जुड़े तो उनके उत्पाद दूसरे प्रांतों में पहुंचे। उन्हें पसंद किया गया। विभाजन के बाद उनके पूर्वज पाकिस्तान से भारत आए और बनासकांठा के थराद से होते हुए कच्छ के शिल्प ग्राम सुमरासर को कर्मभूमि बनाया। पारंपरिक कच्छ चर्म शिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन, सूक्ष्म कटिंग कौशल, हैंड टूलिंग तथा कलात्मक नवाचार में उनके योगदान के लिए वर्ष 2019 में गुजरात सरकार ने उन्हें राज्य शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया।
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अंचल के मुताबिक कच्छ में आए भूकंप से सब कुछ तहस नहस हो गया था। उस समय उनकी उम्र 17 वर्ष थी। उन लोगों के पास चर्म शिल्प का परंपरागत हुनर था। लोग भूकंप प्रभावित क्षेत्र देखने आए। वहां की हस्तकला देखकर हतप्रभ रह गए। वह क्राफ्ट रूट से जुड़े तो उनके उत्पाद दूसरे प्रांतों में पहुंचे। उन्हें पसंद किया गया। विभाजन के बाद उनके पूर्वज पाकिस्तान से भारत आए और बनासकांठा के थराद से होते हुए कच्छ के शिल्प ग्राम सुमरासर को कर्मभूमि बनाया। पारंपरिक कच्छ चर्म शिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन, सूक्ष्म कटिंग कौशल, हैंड टूलिंग तथा कलात्मक नवाचार में उनके योगदान के लिए वर्ष 2019 में गुजरात सरकार ने उन्हें राज्य शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया।
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