{"_id":"65e5c54aca8b9db91b04f2cb","slug":"deshawari-paan-ruined-due-to-hailstorm-loss-worth-rs-60-lakh-2024-03-04","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मौसम की मार: ओलावृष्टि से महोबा का देशावरी पान बर्बाद, 60 लाख का नुकसान, किसान परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौसम की मार: ओलावृष्टि से महोबा का देशावरी पान बर्बाद, 60 लाख का नुकसान, किसान परेशान
Mon, 04 Mar 2024 06:35 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 04 Mar 2024 06:35 PM IST
सार
Mahoba News: मौसम की मार से किसान परेशान है। ओलावृष्टि से महोबा का देशावरी पान बर्बाद हो गया है। करीब 60 लाख के नुकसान की बात सामने आई है।
विज्ञापन
ओलावृष्टि से टूटकर बर्बाद हुआ पान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लाजवाब स्वाद और करारेपन के लिए देश-विदेश में मशहूर महोबा का देशावरी पान प्रकृति के प्रकोप से बर्बाद हो गया। रविवार को हुई भारी ओलावृष्टि से बरेजों में लगे अधिकांश पान टूटकर गिर गए। जो पान शेष बचे उनमें बड़े-बड़े छेद हो गए, जिससे जिले के पान किसानों को करीब 60 लाख का नुकसान हुआ है। कोई सरकारी सहायता न मिलने से पान किसान परेशान हैं।
दो दशक पहले तक जिले में करीब 500 एकड़ में पान की खेती होती थी। महोबा का देशावरी पान पश्चिमी उत्तर प्रदेश व दिल्ली तक जाता है लेकिन लगातार उपेक्षा के चलते पान का दायरा घटता गया। वर्तमान में महज 20 से 25 एकड़ में ही पान की खेती होती है। ढाई साल पहले महोबा के देशावरी पान को जीआई टैग मिला था। तब किसानों को उम्मीद जगी थी, लेकिन शासन-प्रशासन की लगातार उपेक्षा जारी रही। रविवार को जिले में भारी ओलावृष्टि होने से पान की खेती को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। बरेजों में लगे पान के पत्ते तेज हवा और ओलावृष्टि से टूटकर गिर गए, जबकि कुछ पान के पत्तों में छेद होने से काले दाग लग गए।
विज्ञापन
किसानों ने बताया कि पान की खेती का न तो बीमा किया जाता है और न ही कोई सरकारी सहायता मिलती है। किसानों को लाखों की क्षति होने के बाद भी शासन-प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं है। परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र सहारा दैवी आपदा के प्रकोप की भेंट चढ़ गया। इससे दो वक्त की रोटी की समस्या पैदा हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दो दशक पहले तक जिले में करीब 500 एकड़ में पान की खेती होती थी। महोबा का देशावरी पान पश्चिमी उत्तर प्रदेश व दिल्ली तक जाता है लेकिन लगातार उपेक्षा के चलते पान का दायरा घटता गया। वर्तमान में महज 20 से 25 एकड़ में ही पान की खेती होती है। ढाई साल पहले महोबा के देशावरी पान को जीआई टैग मिला था। तब किसानों को उम्मीद जगी थी, लेकिन शासन-प्रशासन की लगातार उपेक्षा जारी रही। रविवार को जिले में भारी ओलावृष्टि होने से पान की खेती को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। बरेजों में लगे पान के पत्ते तेज हवा और ओलावृष्टि से टूटकर गिर गए, जबकि कुछ पान के पत्तों में छेद होने से काले दाग लग गए।
विज्ञापन
किसानों ने बताया कि पान की खेती का न तो बीमा किया जाता है और न ही कोई सरकारी सहायता मिलती है। किसानों को लाखों की क्षति होने के बाद भी शासन-प्रशासन से कोई उम्मीद नहीं है। परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र सहारा दैवी आपदा के प्रकोप की भेंट चढ़ गया। इससे दो वक्त की रोटी की समस्या पैदा हो गई है।
पान किसानों ने बयां किया दर्द
पान किसान चिंताहरण चौरसिया ने बताया कि पान की खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। पहले पाले से 30 फीसदी फसल बर्बाद हो गई थी। अब तेज हवाओं के साथ बारिश व ओलावृष्टि ने शत-प्रतिशत फसल चौपट कर दी है। नए सिरे से पौध लगाने में अधिक खर्च आता है। शासन-प्रशासन से मदद मिलनी चाहिए।
लालचंद्र ने बताया कि ओलावृष्टि से उनके बरेजे में करीब एक लाख का नुकसान हुआ है। हजारों की संख्या में पान टूटकर बर्बाद हो गए। शासन-प्रशासन को चाहिए कि पान की खेती का भी सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए। जिससे किसानों को कुछ राहत मिल सके।
पान किसान चिंताहरण चौरसिया ने बताया कि पान की खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। पहले पाले से 30 फीसदी फसल बर्बाद हो गई थी। अब तेज हवाओं के साथ बारिश व ओलावृष्टि ने शत-प्रतिशत फसल चौपट कर दी है। नए सिरे से पौध लगाने में अधिक खर्च आता है। शासन-प्रशासन से मदद मिलनी चाहिए।
लालचंद्र ने बताया कि ओलावृष्टि से उनके बरेजे में करीब एक लाख का नुकसान हुआ है। हजारों की संख्या में पान टूटकर बर्बाद हो गए। शासन-प्रशासन को चाहिए कि पान की खेती का भी सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए। जिससे किसानों को कुछ राहत मिल सके।
ओलावृष्टि से पान की खेती को करीब 60 लाख का नुकसान हुआ है। दैवी आपदाओं का प्रकोप होने पर शासन से कोई सहायता नहीं मिलती और न ही बीमा राशि मिलती है। शासन-प्रशासन को पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग से योजना चलाना चाहिए और बीमा क्लेम में भी पान की खेती को शामिल करना चाहिए। पहले पान की खेती पाले से बर्बाद हुई और अब ओलावृष्टि ने पूरी फसल चौपट कर दी। - डॉ. रामसेवक चौरसिया, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, एनबीआरआई लखनऊ