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केंद्र सरकार की बड़ी पहल, सेना और वैज्ञानिकों के मानक पर तय होंगे रक्षा सौदे
Sun, 10 Mar 2019 12:03 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 10 Mar 2019 12:03 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
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राफेल डील के बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने रक्षा सौदों में पारदर्शिता और गुणवत्ता कायम करने के लिए बड़ी पहल की है। अब किसी भी रक्षा यंत्र या तकनीक को सेना में शामिल करने से पहले एक निर्धारित मानक पर परखा जाएगा। मानक तय करने के लिए देश में पहली बार रक्षा मंत्रालय ने स्टैंडर्ड डेवलपमेंट अथॉरिटी (एसडीए) का गठन किया है। अथॉरिटी की अध्यक्षता आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर करेंगे। सेना के तीनों विंग के अफसर, डीआरडीओ के वैज्ञानिक इसके सदस्य होंगे।
ये अथॉरिटी अगले एक साल के अंदर थल सेना, वायु सेना और नेवी की जरूरतों के अनुसार नई तकनीक को तैयार करने, सेना में इस्तेमाल हो रहीं पुरानी तकनीकों को मौजूदा समय के हिसाब से परखने और उनके अपग्रेडेशन के लिए मानक तय करेगी। कौन सा विमान, यंत्र सेना में रखना है और कौन सा नहीं, इसके लिए भी मानक तय होंगे। ये मानक अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे बड़े देशों के पैटर्न पर तैयार किए जाएंगे। अन्य देशों की कौन सी तकनीक और यंत्र भारतीय सेना में शामिल करना है इसके लिए भी मानक बनाए जाएंगे। खास बात है कि मानक तैयार करने में सेना के तीनों विंग के साथ देश के बड़े वैज्ञानिकों की भूमिका को भी अहम रखा गया है।
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ये अथॉरिटी अगले एक साल के अंदर थल सेना, वायु सेना और नेवी की जरूरतों के अनुसार नई तकनीक को तैयार करने, सेना में इस्तेमाल हो रहीं पुरानी तकनीकों को मौजूदा समय के हिसाब से परखने और उनके अपग्रेडेशन के लिए मानक तय करेगी। कौन सा विमान, यंत्र सेना में रखना है और कौन सा नहीं, इसके लिए भी मानक तय होंगे। ये मानक अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे बड़े देशों के पैटर्न पर तैयार किए जाएंगे। अन्य देशों की कौन सी तकनीक और यंत्र भारतीय सेना में शामिल करना है इसके लिए भी मानक बनाए जाएंगे। खास बात है कि मानक तैयार करने में सेना के तीनों विंग के साथ देश के बड़े वैज्ञानिकों की भूमिका को भी अहम रखा गया है।
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सेना बताएगी खुद की जरूरत
स्टैंडर्ड कमेटी को सेना की तीनों विंग अपने-अपने क्षेत्र की जरूरतें बताएंगी। इसी के आधार पर मानक तैयार किए जाएंगे। मानक में इस बात को भी स्पष्ट कर दिया जाएगा कि कौन सी तकनीक या यंत्र कितने वर्ष तक या कब तक सेना प्रयोग कर सकती है और कब उसे नष्ट कर दिया जाए।
यंत्रों के प्रयोग की तय होगी समयसीमा
स्टैंडर्ड कमेटी सेना को मजबूत बनाने के लिए खाका तैयार करेगी। इसमें ट्रेनिंग से लेकर युद्घ और विभिन्न गोपनीय ऑपरेशन में प्रयोग की जाने वाली तकनीक और यंत्रों को भी शामिल किया जाएगा। तय होगा कि किस तरह के यंत्र या तकनीक कब तक प्रयोग कर सकते हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि ट्रेनिंग के दौरान होने वाले हादसों को रोका जा सके। पुराने फाइटर प्लेन, यंत्रों का प्रयोग कम से कम हो सके।
स्टैंडर्ड कमेटी को सेना की तीनों विंग अपने-अपने क्षेत्र की जरूरतें बताएंगी। इसी के आधार पर मानक तैयार किए जाएंगे। मानक में इस बात को भी स्पष्ट कर दिया जाएगा कि कौन सी तकनीक या यंत्र कितने वर्ष तक या कब तक सेना प्रयोग कर सकती है और कब उसे नष्ट कर दिया जाए।
यंत्रों के प्रयोग की तय होगी समयसीमा
स्टैंडर्ड कमेटी सेना को मजबूत बनाने के लिए खाका तैयार करेगी। इसमें ट्रेनिंग से लेकर युद्घ और विभिन्न गोपनीय ऑपरेशन में प्रयोग की जाने वाली तकनीक और यंत्रों को भी शामिल किया जाएगा। तय होगा कि किस तरह के यंत्र या तकनीक कब तक प्रयोग कर सकते हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि ट्रेनिंग के दौरान होने वाले हादसों को रोका जा सके। पुराने फाइटर प्लेन, यंत्रों का प्रयोग कम से कम हो सके।
एसडीए के गठन को हुई थी सिफारिश, सरकार ने तुरंत मानी
दरअसल प्रो. करंदीकर की अध्यक्षता में ही गठित एक कमेटी ने रक्षा यंत्रों और तकनीक के लिए मानक तैयार करने के लिए एक स्टैंडर्ड डेवलपमेंट अथॉरिटी (एसडीए) के गठन की सिफारिश की थी। यह सिफारिश जनवरी माह में ही की गई थी और सरकार ने तुरंत इसे स्वीकार कर लिया। इस कमेटी में थल सेना के मेजर जनरल स्तर के अधिकारी, एयरफोर्स के वाइस एयर मार्शल रैंक के अधिकारी और नेवी के रियर एडमिरल रैंक के अधिकारियों समेत आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंजन बोस, आईआईटी चेन्नई के प्रो. देविड कोईपिल्लई, आईआईटी कानपुर के डॉ. आदर्श बनर्जी, डीआरडीओ, आईडीएस, भेल, एसआईडीएम, डीडीपी के भी सदस्य हैं।
दरअसल प्रो. करंदीकर की अध्यक्षता में ही गठित एक कमेटी ने रक्षा यंत्रों और तकनीक के लिए मानक तैयार करने के लिए एक स्टैंडर्ड डेवलपमेंट अथॉरिटी (एसडीए) के गठन की सिफारिश की थी। यह सिफारिश जनवरी माह में ही की गई थी और सरकार ने तुरंत इसे स्वीकार कर लिया। इस कमेटी में थल सेना के मेजर जनरल स्तर के अधिकारी, एयरफोर्स के वाइस एयर मार्शल रैंक के अधिकारी और नेवी के रियर एडमिरल रैंक के अधिकारियों समेत आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंजन बोस, आईआईटी चेन्नई के प्रो. देविड कोईपिल्लई, आईआईटी कानपुर के डॉ. आदर्श बनर्जी, डीआरडीओ, आईडीएस, भेल, एसआईडीएम, डीडीपी के भी सदस्य हैं।