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आतंकियों को फांसी की सजा: मुझे फैसले की जानकारी नहीं... पिता बोले- मैं कुछ नहीं कहना चाहता, माफ करिये

Fri, 15 Sep 2023 02:38 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 15 Sep 2023 02:38 PM IST
सार

आतंकी संगठन आईएसआईएस के सदस्य आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को एटीएस/एनआईए के विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर करीब 12-12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बीते दिनों कोर्ट ने दोनों को कानपुर के एक शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला के हाथ में बंधे कलेवा से हिंदू पहचान सुनिश्चित कर हत्या करने पर दोषी करार दिया था।

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Death sentence to terrorists Father says I am not aware of decision I dont want to say anything sorry
आतंकी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुझे कोर्ट के फैसले की जानकारी नहीं है। इस विषय में कुछ कहना नहीं चाहता, मुझे माफ करिये...कहते हुए चकेरी के आशियाना रोड तीन खंभा स्थित ताड़ बगिया निवासी बुजुर्ग गेट बंद कर देते हैं। ये बुजुर्ग मास्टर जी के नाम से जाने जाते हैं और आतंकी फैजल के पिता हैं।
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उनका बड़ा बेटा दानिश भी आतंकी घटनाओं के आरोप में जेल में ही बंद है। वहीं बड़ा बेटा इमरान पत्नी और दो बच्चों के साथ इसी घर में रहता है। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि घर के बाहरी हिस्से में बनी तीन दुकानों में बीच की दुकान पहले आतंकी फैसल बैठता था। वह अक्सर शिकार खेलने के लिए जंगल जाता था। वह कभी किसी से कोई मतलब नहीं रखता था। 
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इलाके की एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि यह परिवार हमेशा से सीमित रहा, इसलिए उनके बारे में किसी को कुछ पता नहीं चला। जब अखबारों और टीवी चैनलों में खबरें आईं तब उनकी हकीकत का पता चल सका था। 
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गुरुवार को घर की दुकान भी नहीं खुली थी। परिवार जेल में बंद अपने बेटों से मिलने जाया करता है। लोगों ने बताया कि बीते 11 सितंबर को जब आतंकियों को दोषी करार दिया गया था तो पुलिस फोन उनके घर पहुंचा था, लेकिन परिवार ने दरवाजा नहीं खोला था। दानिश का परिवार करीब 15 सालों से यहां रह रहा है।

गेट खटखटाने के बाद भी मुजफ्फर के घर से नहीं मिला कोई जवाब
दूसरे आतंकी केडीए कॉलोनी जाजमऊ निवासी आतिफ मुजफ्फर के घर पर लगे काले गेट के बाहर संवाद की टीम पहुंची। टीम ने 15-20 बार गेट खटखटाया, लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। आसपास के लोगों ने बताया कि आतंकी का एक भाई और मां रहती हैं, जो कभी कभार ही बाहर निकलते हैं। 

 

यहां रहने वाले लोगों को आतंकियों को मिली फांसी की सजा की जानकारी थी। इनकी गली व आसपास वाहन खड़े थे, लेकिन सन्नाटा पसरा था। कोई कुछ बताने को तैयार नहीं हुआ। जिससे भी बात हुई उसने यही बताया कि वह अभी मोहल्ले में नए आए हैं, उन्हें इस परिवार के विषय में कोई जानकारी नहीं है।

हिंदू पहचान कर हत्या करने वाले दो आतंकियों को फांसी की सजा
आपको बता दें कि आतंकी संगठन आईएसआईएस के सदस्य आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को एटीएस/एनआईए के विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर करीब 12-12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बीते दिनों कोर्ट ने दोनों को कानपुर के एक शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला के हाथ में बंधे कलेवा से हिंदू पहचान सुनिश्चित कर हत्या करने पर दोषी करार दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने भारत की अखंडता, एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पहुंचाने, दूसरे समुदाय के लोगों को मारने व साजिश रचने समेत कई अन्य अपराधों में दोषी पाया था।

 

कोर्ट ने जुर्माने की रकम रमेश बाबू के आश्रितों को देने का आदेश दिया है। इसके पहले आतिफ और फैसल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जेल से कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि दोषियों का अपराध विरलतम से विरल श्रेणी का है। इसे सामान्य हत्या की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कहा कि इनको हाईकोर्ट से पुष्टि हो जाने के बाद फांसी दी जाएगी।

 

कोर्ट में एनआईए ने बताया की मामले कि रिपोर्ट वादी अक्षय शुक्ला ने कानपुर के चकेरी थाने में 24 अक्तूबर, 2016 को दर्ज कराई थी। इसमें बताया था की वादी के पिता व स्वामी आत्मा प्रकाश ब्रह्मचारी जूनियर हाई स्कूल के शिक्षक रमेश बाबू उसी दिन स्कूल से घर आ रहे थे। तभी किसी ने उन्हें गोली मार दी। अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। 

 

7 मार्च, 2017 को एटीएस सूचना मिली कि उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट की साजिश में शामिल आईएस का आतंकी काकोरी रोड के पास एक मकान में है। एटीएस व पुलिस ने दबिश तो मुठभेड़ में सैफुल्लाह मारा गया। सैफुल्लाह के घर से हथियार, गोला-बारूद के साथ ही आपत्तिजनक सामान जब्त किए गए। मामले की विवेचना एनआईए को सौंपी गई। एनआईए को पता चला कि सैफुल्लाह के घर से जो हथियार बरामद हुए थे उनका प्रयोग कानपुर के शिक्षक की हत्या समेत अन्य अपराधों में भी किया गया।
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