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मजा आने की बात कहकर डॉक्टर ने एयरगन से किया फायर, सीने में छर्रा धंसने से बच्चे की मौत
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:14 AM IST
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डेमो पिक
डॉक्टर ने अर्पित को अपने पास बुलाया और उसके सीने में एयरगन सटाकर फायर कर दिया। एयरगन के छर्रे ने 8 साल के बच्चे की पसली के बीच से होते हुए हार्ट को पंचर कर दिया, जिससे बच्चे की मौत हो गई। डॉक्टर की तलाश की जा रही है। मृतक के पिता की तहरीर पर उसके खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस एयरगन के मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
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उन्नाव अचलगंज थाने के जमुनीखेड़ा जरगांव के पप्पू का आठ वर्षीय पुत्र अर्पित कुमार रावत गुरुवार को घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान पड़ोस के गांव गगनखेड़ा निवासी पवन सिंह एयरगन लेकर निकला। जमुनीखेड़ा में क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर राम स्वरूप ने पवन को एयरगन देखने के लिए रोका। वह पवन से एयरगन चलाने का तरीका सीखने लगा। तभी डॉक्टर की नजर अर्पित पर पड़ी। उसने अर्पित को पास बुलाकर उसके सीने से एयरगन सटाकर ट्रिगर दबाने से मजा आने की बात कही। अर्पित उसकी बातों में आ गया। इसी दौरान डॉक्टर ने ट्रिगर दबा दिया।
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एयरगन का छर्रा अर्पित के सीने में धंसा और वह गिर पड़ा। सूचना पर आए परिजन अर्पित को पुरवा स्वास्थ्य केंद्र ले गए। यहां से रेफर किए जाने पर परिजन जिला अस्पताल ला रहे थे कि उसने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पिता पप्पू की तहरीर पर पुलिस ने डॉक्टर रामस्वरूप के खिलाफ रिपोर्ट लिखी। पुलिस एयरगन के मालिक पवन से पूछताछ कर रही है। अचलगंज थानाध्यक्ष सुनील सिंह ने बताया कि डाक्टर की डिग्री की भी छानबीन की जा रही है। पोस्टमार्टम सूत्रों की मानें तो एयरगन के छर्रे ने पसली के बीच से होते हुए हार्ट को पंचर कर दिया, जिससे बच्चे की मौत हो गई।
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क्या होती है एयरगन
सीओ सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि एयरगन की अलग-अलग मारक क्षमता होती है। कुछ दो मीटर तक मार करती हैं तो बड़ी नली वाली एयरगन पांच से 10 मीटर तक मार कर सकती हैं। इनमें छर्रा लगता है। आमतौर पर इसे जानवरों को भगाने में इस्तेमाल किया जाता है। नजदीक से अथवा सटाकर मारने से किसी की मौत भी हो सकती है। इसके लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। बच्चे के सीने से सटाकर फायर किए जाने की बात सामने आई है।
माता-पिता की आंखों का तारा था अर्पित
अर्पित माता-पिता की आंखों का तारा था। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां प्रेमा देवी व बहन अर्चना गश खाकर गिर गईं। होश आने पर मां अर्पित का ही नाम रट रही थीं। अर्पित की मौत से परिजनों का बुरा हाल था।
आधार कार्ड बनवाने के लिए नहीं गया था स्कूल
अर्पित बाबाखेड़ा प्राथमिक स्कूल में कक्षा 3 का छात्र था। स्कूल में आधार कार्ड लगना था। गुरुवार को अर्पित को आधार बनवाना था। इससे वह स्कूल नहीं गया था। बिलखती मां रो-रो कर कह रही थीं कि अर्पित स्कूल चला जाता तो उसकी मौत न होती।