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कानपुर: 22 लोगों के खाते में वापस आई 67.56 लाख की रकम, छह माह में इतने लोग बने साइबर ठगी के शिकार
Mon, 05 Jul 2021 08:34 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 05 Jul 2021 08:34 AM IST
सार
सभी पीड़ितों ने 72 घंटे के भीतर संबंधित बैंक, आरबीआई और पुलिस को सूचना दी थी। तय समय के भीतर एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने बैंकों और पेमेंट वॉलेट के अफसरों से संपर्क कर ट्रांजेक्शन पर रोक लगवाई।
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साइबर क्राइम
- फोटो : self
विस्तार
साइबर ठगी के शिकार हुए 22 लोगों की रकम उनके खातों में वापस आई है। साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की टीम ने मिलकर ये कार्रवाई की। पिछले छह महीने के भीतर कुल 67 लाख 56 हजार रुपये पीड़ितों के खातों में वापस आए।
सबसे अधिक काकादेव निवासी एक कारोबारी की रकम वापस हुई। जिनसे पचास लाख की ठगी हुई थी। जनवरी से जून तक शहर में 400 से अधिक साइबर ठगी की घटनाएं हुईं। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि जिन 22 लोगों के खातों में पैसे वापस आए हैं, उनसे साइबर ठगों ने ओटीपी पूछकर, डेबिट व क्रेडिट कार्ड से ठगी की थी।
इन सभी पीड़ितों ने 72 घंटे के भीतर संबंधित बैंक, आरबीआई और पुलिस को सूचना दी थी। तय समय के भीतर एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने बैंकों और पेमेंट वॉलेट के अफसरों से संपर्क कर ट्रांजेक्शन पर रोक लगवाई। साक्ष्य दिए कि ये अवैध तरीके से रकम निकाली गई है। जिसके आधार पर ये रकम उसी खाते या वॉलेट से वापस खाताधारकों के खातों में आई जिसमें ट्रांसफर हुई थी।
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सबसे अधिक काकादेव निवासी एक कारोबारी की रकम वापस हुई। जिनसे पचास लाख की ठगी हुई थी। जनवरी से जून तक शहर में 400 से अधिक साइबर ठगी की घटनाएं हुईं। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि जिन 22 लोगों के खातों में पैसे वापस आए हैं, उनसे साइबर ठगों ने ओटीपी पूछकर, डेबिट व क्रेडिट कार्ड से ठगी की थी।
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इन सभी पीड़ितों ने 72 घंटे के भीतर संबंधित बैंक, आरबीआई और पुलिस को सूचना दी थी। तय समय के भीतर एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने बैंकों और पेमेंट वॉलेट के अफसरों से संपर्क कर ट्रांजेक्शन पर रोक लगवाई। साक्ष्य दिए कि ये अवैध तरीके से रकम निकाली गई है। जिसके आधार पर ये रकम उसी खाते या वॉलेट से वापस खाताधारकों के खातों में आई जिसमें ट्रांसफर हुई थी।
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ये बरतें सावधानी
- किसी लॉटरी या डिस्काउंट के लालच में न आएं
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- खुद को बैंक अफसर बता अगर कोई फोन पर खाते के बारे में जानकारी मांगे तो न दें
- अगर कोई क्यूआर भेज स्कैन करने को कहे तो उसको बिल्कुल भी स्कैन न करें
- फोन पर पेमेंट करने को एनीडेस्क एप डाउनलोड करने को कहे तो कतई न करें
सबसे अधिक इनकी रकम वापस आई
- गिरीश चंद्र पांडेय के 50 लाख
- जय प्रकाश सिंह के 3 लाख
- संतोष कुमार के 1 लाख 67 हजार रुपये
- सतनाम सिंह के 1 लाख 30 हजार रुपये
- प्रशांत शर्मा, सुधीर शर्मा व अलका द्विवेदी के एक-एक लाख रुपये
- सिपाही ज्ञान सिंह के 60 हजार व सिपाही वाहिद खान के एक लाख रुपये
- किसी लॉटरी या डिस्काउंट के लालच में न आएं
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- खुद को बैंक अफसर बता अगर कोई फोन पर खाते के बारे में जानकारी मांगे तो न दें
- अगर कोई क्यूआर भेज स्कैन करने को कहे तो उसको बिल्कुल भी स्कैन न करें
- फोन पर पेमेंट करने को एनीडेस्क एप डाउनलोड करने को कहे तो कतई न करें
सबसे अधिक इनकी रकम वापस आई
- गिरीश चंद्र पांडेय के 50 लाख
- जय प्रकाश सिंह के 3 लाख
- संतोष कुमार के 1 लाख 67 हजार रुपये
- सतनाम सिंह के 1 लाख 30 हजार रुपये
- प्रशांत शर्मा, सुधीर शर्मा व अलका द्विवेदी के एक-एक लाख रुपये
- सिपाही ज्ञान सिंह के 60 हजार व सिपाही वाहिद खान के एक लाख रुपये