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Kanpur News: युवाओं के मन का तनाव नापेगा सीएसजेएमयू का थर्मामीटर

Sat, 04 Jul 2026 02:28 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 02:28 AM IST
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CSJMU's 'thermometer' to measure stress levels among the youth.
कानपुर। तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, शैक्षणिक दबाव और भागदौड़ भरी जीवनशैली के बीच युवाओं में बढ़ रही चिंता और तनाव के स्तर को मापने के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के शोधकर्ताओं ने जनरल एंग्जाइटी स्केल विकसित किया है। 17 से 25 आयु वर्ग के युवाओं के लिए तैयार यह थर्मामीटर (स्केल) चिंता के स्तर और उसके प्रकार की सटीक पहचान करने में मदद करेगा जिससे समय रहते उचित काउंसलिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विमल सिंह, शोधार्थी शुभी रस्तोगी, आईसीएसएसआर फेलो देश दीपक तथा इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ की डॉ. दिव्या आर पंजवानी की टीम ने कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में इस स्केल का विकास किया है।
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शोधकर्ताओं के अनुसार यह स्केल पांच प्रमुख आयामों शैक्षणिक (पढ़ाई और परीक्षा से जुड़ा तनाव), संज्ञानात्मक (अत्यधिक सोच और मानसिक थकान), भावनात्मक (नकारात्मक भावनाएं और आत्म-आलोचना), सामाजिक (लोगों के बीच बोलने या प्रस्तुत होने का डर) और व्यावहारिक (भविष्य को लेकर निराशावादी सोच) पर युवाओं की चिंता का आकलन करता है। स्केल विकसित करने के लिए शुरुआत में 65 प्रश्न तैयार किए गए थे। विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद इन्हें घटाकर 35 तक सीमित किया गया। इसके बाद प्रदेश के 800 स्नातक छात्रों पर इसका परीक्षण किया गया। यह 5-प्वाइंट लिकर्ट स्केल पर आधारित है और इसे पूरा करने में लगभग 18 से 20 मिनट लगते हैं।
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डॉ. विमल सिंह ने बताया कि स्केल की विश्वसनीयता 0.94 पाई गई जो इसे अत्यंत भरोसेमंद बनाती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित जीएडी-7 स्केल के साथ इसका 0.62 का सकारात्मक सहसंबंध मिला जिससे इसकी सटीकता और प्रभावशीलता की पुष्टि हुई। इस शोध को प्रसाद साइको प्राइवेट लिमिटेड ने प्रकाशित किया है।



विद्यार्थियों को लाभ

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस स्केल से छात्रों में चिंता के प्रकार व स्तर की जल्द पहचान होगी। इससे शिक्षक और काउंसलर सही समय पर उचित मार्गदर्शन दे सकेंगे। इससे पढ़ाई, सामाजिक दबाव और भावनात्मक समस्याओं का अलग-अलग विश्लेषण कर प्रभावी समाधान हो सकेगा। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित किया जा सकेगा। स्कूलों और कॉलेजों में काउंसलिंग एवं कॅरिअर मार्गदर्शन कार्यक्रम अधिक प्रभावी बन सकेंगे।


शोध और नवाचार में एक और उपलब्धि

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने इसे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध यह स्केल देशभर के शिक्षण संस्थानों के लिए उपयोगी साबित होगा।
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