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Kanpur News: सीएसजेएमयू ने स्नातक में अनिवार्य किया फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स
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कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि (सीएसजेएमयू) ने इस शैक्षणिक सत्र से स्नातक में फाइनेंशियल लिटरेसी का वोकेशनल कोर्स अनिवार्य कर दिया है। इसे बीए, बीएससी, बीकॉम और बीएससी बायोटेक्नोलॉजी के चौथे सेमेस्टर के छात्रों के लिए लागू किया जाएगा। सम सेमेस्टर के छात्रों को सेमेस्टर फीस के साथ इस कोर्स के लिए 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क जमा करना होगा। फीस जमा करने की अंतिम तिथि 14 मार्च है।
विश्वविद्यालय में इससे पहले द्वितीय सेमेस्टर के छात्रों के लिए वोकेशनल कोर्स के रूप में साइबर सिक्योरिटी विषय को अनिवार्य किया गया था। इस विषय के लिए भी छात्रों को 500 रुपये का शुल्क देना पड़ा था। हालांकि, इस निर्णय को लेकर छात्रों में असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत विषयों के चयन की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर पर विषयों को अनिवार्य बनाकर छात्रों पर थोपे जाने का काम किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद भी पाठ्यक्रम में कई बदलाव किए गए हैं। कुछ पेपरों को कम किया गया है, जबकि कुछ में मेजर और माइनर कोर्स के नए संयोजन बनाए गए हैं। इसी क्रम में पिछले वर्ष साइबर सिक्योरिटी के कोर्स को सभी संबद्ध महाविद्यालयों के दूसरे सेमेस्टर के छात्रों के लिए अनिवार्य कर दिया गया था। छात्रों के अनुसार, इस विषय के लिए पहले से पर्याप्त तैयारी नहीं कराई गई थी, जिसके कारण कई छात्र परीक्षा में असफल भी हो गए। चूंकि इस पेपर को पास करना अनिवार्य है, इसलिए असफल छात्रों को अब बैक पेपर भी देना पड़ रहा है।
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इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब चौथे सेमेस्टर के छात्रों के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी को अनिवार्य कर दिया है। छात्र चाहे बीए, बीएससी या किसी अन्य संबंधित पाठ्यक्रम का हो, उसे यह कोर्स पढ़ना और परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। इस पेपर का कुल अंक 100 निर्धारित किया गया है, जिसमें 40 अंक आंतरिक मूल्यांकन और 60 अंक लिखित परीक्षा के होंगे।
छात्रों का कहना है कि वोकेशनल विषय उनकी रुचि के अनुसार होने चाहिए। रुचि न होने के कारण कई छात्र साइबर सिक्योरिटी जैसे विषय में फेल हो गए। उनका मानना है कि यदि विषय अनिवार्य रहेगा, तो भविष्य में भी कई छात्रों को इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने इस अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग की है।
वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि परीक्षा फार्म और शुल्क जमा करने की तिथि को बढ़ा दिया गया है। अब छात्र 14 मार्च तक शुल्क जमा कर सकते हैं।
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विश्वविद्यालय में इससे पहले द्वितीय सेमेस्टर के छात्रों के लिए वोकेशनल कोर्स के रूप में साइबर सिक्योरिटी विषय को अनिवार्य किया गया था। इस विषय के लिए भी छात्रों को 500 रुपये का शुल्क देना पड़ा था। हालांकि, इस निर्णय को लेकर छात्रों में असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत विषयों के चयन की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर पर विषयों को अनिवार्य बनाकर छात्रों पर थोपे जाने का काम किया जा रहा है।
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विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद भी पाठ्यक्रम में कई बदलाव किए गए हैं। कुछ पेपरों को कम किया गया है, जबकि कुछ में मेजर और माइनर कोर्स के नए संयोजन बनाए गए हैं। इसी क्रम में पिछले वर्ष साइबर सिक्योरिटी के कोर्स को सभी संबद्ध महाविद्यालयों के दूसरे सेमेस्टर के छात्रों के लिए अनिवार्य कर दिया गया था। छात्रों के अनुसार, इस विषय के लिए पहले से पर्याप्त तैयारी नहीं कराई गई थी, जिसके कारण कई छात्र परीक्षा में असफल भी हो गए। चूंकि इस पेपर को पास करना अनिवार्य है, इसलिए असफल छात्रों को अब बैक पेपर भी देना पड़ रहा है।
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इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब चौथे सेमेस्टर के छात्रों के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी को अनिवार्य कर दिया है। छात्र चाहे बीए, बीएससी या किसी अन्य संबंधित पाठ्यक्रम का हो, उसे यह कोर्स पढ़ना और परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। इस पेपर का कुल अंक 100 निर्धारित किया गया है, जिसमें 40 अंक आंतरिक मूल्यांकन और 60 अंक लिखित परीक्षा के होंगे।
छात्रों का कहना है कि वोकेशनल विषय उनकी रुचि के अनुसार होने चाहिए। रुचि न होने के कारण कई छात्र साइबर सिक्योरिटी जैसे विषय में फेल हो गए। उनका मानना है कि यदि विषय अनिवार्य रहेगा, तो भविष्य में भी कई छात्रों को इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने इस अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग की है।
वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि परीक्षा फार्म और शुल्क जमा करने की तिथि को बढ़ा दिया गया है। अब छात्र 14 मार्च तक शुल्क जमा कर सकते हैं।