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प्रैक्टिकल में नहीं दे सकेंगे मनमाने मार्क्स
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 30 Dec 2014 02:51 AM IST
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सीएसजेएम यूनिवर्सिटी कैंपस और संबद्ध डिग्री कॉलेजों के प्रैक्टिकल मार्क्स देने में मनमानी अब नहीं चलेगी। जिन स्टूडेंट्स के प्रैक्टिकल मार्क्स 75 फीसदी से ज्यादा होंगे, उनके प्रोजेक्ट वर्क सहित सभी कामकाज का ब्यौरा यूनिवर्सिटी मंगाकर देखेगी।
नई व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2014-15 से लागू होगी। जबकि कॉलेज संचालक प्रैक्टिकल मार्क्स देने का न्यूनतम मानक 90 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि इस मांग को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रैक्टिकल एग्जाम में मार्क्स देने का मानक बदल दिया है। साफ कहा है कि 75 फीसदी से ज्यादा मार्क्स पाने वाले स्टूडेंट्स का ब्यौरा अलग से मंगाया जाएगा। इससे बीएड, बीपीएड, एमएड, एमपीएड, प्रोफेशनल कोर्स और साइंस के कॉलेज संचालकों की मुश्किल बढ़ गई है।
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क्योंकि ज्यादातर कॉलेज संचालक प्रैक्टिकल ूमें मनमानी मार्क्स देते हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन के ही एक अध्ययन से पता चला है कि बीएड के 20 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल में 90 फीसदी या उससे ज्यादा का मार्क्स दिया जा रहा है।
कई मामलों में 96 या 97 फीसदी मार्क्स दिया गया है। इसको लेकर ही यूनिवर्सिटी ने शिकंजा कसने का फैसला किया है। कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने बताया कि जिस स्टूडेंट को थ्योरी में 48 फीसदी मार्क्स मिलते हैं, वह प्रैक्टिकल में 90 फीसदी मार्क्स लेकर घूमता है।
शैक्षिक गुणवत्ता के लिहाज से यह बेहद गलत है। 1 जनवरी से प्रैक्टिकल मार्क्स ऑनलाइन मंगाए जाएंगे। इसका पूरा रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी के पास रहेगा। इस रिकार्ड से स्टूडेंट के प्रोजेक्ट वर्क, टीचिंग वर्क, कक्षा में उपस्थिति और थ्योरी के मार्क्स का मिलान किया जाएगा।
यदि जरूरत से ज्यादा मार्क्स दिए गए हैं तो संबंधित कॉलेज संचालक या फिर बाहरी, आंतरिक परीक्षक से जवाब तलब किया जाएगा।
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नई व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2014-15 से लागू होगी। जबकि कॉलेज संचालक प्रैक्टिकल मार्क्स देने का न्यूनतम मानक 90 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि इस मांग को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है।
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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रैक्टिकल एग्जाम में मार्क्स देने का मानक बदल दिया है। साफ कहा है कि 75 फीसदी से ज्यादा मार्क्स पाने वाले स्टूडेंट्स का ब्यौरा अलग से मंगाया जाएगा। इससे बीएड, बीपीएड, एमएड, एमपीएड, प्रोफेशनल कोर्स और साइंस के कॉलेज संचालकों की मुश्किल बढ़ गई है।
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क्योंकि ज्यादातर कॉलेज संचालक प्रैक्टिकल ूमें मनमानी मार्क्स देते हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन के ही एक अध्ययन से पता चला है कि बीएड के 20 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल में 90 फीसदी या उससे ज्यादा का मार्क्स दिया जा रहा है।
कई मामलों में 96 या 97 फीसदी मार्क्स दिया गया है। इसको लेकर ही यूनिवर्सिटी ने शिकंजा कसने का फैसला किया है। कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने बताया कि जिस स्टूडेंट को थ्योरी में 48 फीसदी मार्क्स मिलते हैं, वह प्रैक्टिकल में 90 फीसदी मार्क्स लेकर घूमता है।
शैक्षिक गुणवत्ता के लिहाज से यह बेहद गलत है। 1 जनवरी से प्रैक्टिकल मार्क्स ऑनलाइन मंगाए जाएंगे। इसका पूरा रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी के पास रहेगा। इस रिकार्ड से स्टूडेंट के प्रोजेक्ट वर्क, टीचिंग वर्क, कक्षा में उपस्थिति और थ्योरी के मार्क्स का मिलान किया जाएगा।
यदि जरूरत से ज्यादा मार्क्स दिए गए हैं तो संबंधित कॉलेज संचालक या फिर बाहरी, आंतरिक परीक्षक से जवाब तलब किया जाएगा।