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'सरे बाजार चापड़ से हत्या का तरीका', प्रभावित कर रहीं हिंसक फिल्में
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 30 Nov 2017 06:33 PM IST
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'कानपुर मर्डर सीन' स्पेशल क्राइम स्टोरी
फिल्में समाज का आईना जरूर हैं लेकिन जब फिल्में ही समाज की दशा और दिशा तय करने लगें तो कुछ ऐसा ही होता है जैसा इन दिनों यूपी के कानपुर शहर में 'अखबारों की सुर्खियां' बना है। सरेबाजार खून से लथपथ होकर अपनी जान बचाने के लिए भागते और दर-दर मदद की गुहार लगाते लोग आपको सिर्फ साउथ इंडियन फिल्मों में ही नहीं बल्कि कानपुर की सड़कों पर भी नजर आ जाएंगे। भीड़ के बीच में चापड़ और चाकुओं से एक के बाद एक होते वार के बाद भी कोई बचाने नहीं आता है सभी मूकदर्शक बने खड़े रहते हैं और उनकी आंखों के सामने ही घायल तड़प-तड़पकर दम तोड़ देता हैं। ये हम नहीं कह रहे ये साबित कर रहे हैं उन अखबारों के पन्ने जो हर रोज हत्या की खबरों से रंगे होते हैं।
पढ़िए ये पूरी स्पेशल रिपोर्ट...
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कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि हिंसक फिल्मों से सीखा गया हत्या का नया तरीका है
'कानपुर मर्डर सीन' स्पेशल क्राइम स्टोरी
यूपी के सबसे पुराने और भीड़भाड़ वाले शहर के बीचोबीच हो रही हत्यायें साउथ इंडियन फिल्मी तरीकों से की जा रही हैं। ये कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि हिंसक फिल्मों से आया हत्या का नया तरीका है। सकरी गलियां, जान बचाने को खून से लथपथ भागते लोगों को पीछे से चापड़, चाकू और तलवार लेकर दौड़ा रहे बदमाशों की दहशत इस कदर है कि कोई मरने वाले को बचाने के लिए दरवाजा खोलना तो दूर मदद के लिए हाथ भी नहीं बढ़ाता है। हत्या हो जाती है, सड़क पर बिखरा हुआ खून, वहां से गुजरते लोग बिल्कुल तमाशबीन नजर आते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे उनके सामने कुछ हुआ ही नहीं। रील लाइफ से रियल लाइफ में फिल्मों से आने वाला ये असल 'ड्रामा' यहीं खत्म नहीं होता है। कुछ देर बाद शोर मचाते हुए पुलिस की गाड़ियां आती हैं। कुछ बड़े अधिकारी आते हैं फिर फिल्मी अंदाज में शुरू होती है 'हत्या की जांच'। फोरेन्सिक टीम के साथ डॉग स्क्वायड आता है और बेतरतीबी के साथ जांच में जुट जाता है। कुछ देर ये सब चलने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है।
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चार नृशंस हत्याओं की केस स्टडी
'कानपुर मर्डर सीन' स्पेशल क्राइम स्टोरी
केस-1 (डबल मर्डर की लाइव रिपोर्ट )
29 नवंबर 2017 बुधवार को दिनदहाड़े कानपुर के भीड़भाड़ वाले इलाके महेश्वरी मोहाल की सकरी गलियों में कातिल घात लगाये बैठे थे। तभी वहां से प्रॉपर्टी डीलर सतीश कश्यप उर्फ बब्बन (53) गुजरे। हत्यारों ने चापड़ और चाकुओं से एक के बाद एक वार करना शुरू कर दिया। बब्बन के साथ स्कूटी पर उनका एक साथी ऋषभ (14) भी था। पहले तो ऋषभ ने स्कूटी से लपककर कर बब्बन की जान बचाने की कोशिश की। पर एक बाद एक होते वार देखकर वह घबराकर भागा।
हत्यारे बब्बन को बेरहमी से कत्ल करने के बाद इकलौते गवाह 14 साल के ऋषभ को मौत के घाट उतारने के लिए उसके पीछे भागे। ऋषभ को अपनी जान बचाने के लिए एक पतली गली में घुस गया। उसने मदद के लिए गली के शुरुआती छोर से लेकर अाखिरी तक सभी दरवाजे खटखटाये पर मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। आखिर में गली बंद होने से ऋषभ वहां फस गया। हत्यारों को अपनी ओर आता देख वह जोर-जोर से 'बचाओ..., बचाओ.....' चीख रहा था पर किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगा। कुछ देर बाद उसकी आवाज आना बंद हो गई। हत्यारे हवा में चापड़ और चाकू लहराते हुए आराम से निकल गए।
कुछ देर बाद लोगों ने अपने दरवाजे खोले हर तरफ खून ही खून बिखरा था। घटना की सूचना पर पुलिस पहुंची। फोरेन्सिक टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाया गया। अधिकारियों से लोगों से पूछताछ करना शुरू दी पर भीड़ भरे इस इलाके में एक भी ऐसा गवाह नहीं मिला जिसने अपनी आंखों के सामने बेरहमी से दो कत्ल होते हुए देखे हों। लोग वहां से लगातार गुजर रहे थे नजारा बिल्कुल ऐसा था कि जैसे उन लोगों के सामने कुछ हुआ ही नहीं। अपनी शुरुआती जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हालांकि इस मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतकों के घरवालों ने हत्यारोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी।
29 नवंबर 2017 बुधवार को दिनदहाड़े कानपुर के भीड़भाड़ वाले इलाके महेश्वरी मोहाल की सकरी गलियों में कातिल घात लगाये बैठे थे। तभी वहां से प्रॉपर्टी डीलर सतीश कश्यप उर्फ बब्बन (53) गुजरे। हत्यारों ने चापड़ और चाकुओं से एक के बाद एक वार करना शुरू कर दिया। बब्बन के साथ स्कूटी पर उनका एक साथी ऋषभ (14) भी था। पहले तो ऋषभ ने स्कूटी से लपककर कर बब्बन की जान बचाने की कोशिश की। पर एक बाद एक होते वार देखकर वह घबराकर भागा।
हत्यारे बब्बन को बेरहमी से कत्ल करने के बाद इकलौते गवाह 14 साल के ऋषभ को मौत के घाट उतारने के लिए उसके पीछे भागे। ऋषभ को अपनी जान बचाने के लिए एक पतली गली में घुस गया। उसने मदद के लिए गली के शुरुआती छोर से लेकर अाखिरी तक सभी दरवाजे खटखटाये पर मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। आखिर में गली बंद होने से ऋषभ वहां फस गया। हत्यारों को अपनी ओर आता देख वह जोर-जोर से 'बचाओ..., बचाओ.....' चीख रहा था पर किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगा। कुछ देर बाद उसकी आवाज आना बंद हो गई। हत्यारे हवा में चापड़ और चाकू लहराते हुए आराम से निकल गए।
कुछ देर बाद लोगों ने अपने दरवाजे खोले हर तरफ खून ही खून बिखरा था। घटना की सूचना पर पुलिस पहुंची। फोरेन्सिक टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाया गया। अधिकारियों से लोगों से पूछताछ करना शुरू दी पर भीड़ भरे इस इलाके में एक भी ऐसा गवाह नहीं मिला जिसने अपनी आंखों के सामने बेरहमी से दो कत्ल होते हुए देखे हों। लोग वहां से लगातार गुजर रहे थे नजारा बिल्कुल ऐसा था कि जैसे उन लोगों के सामने कुछ हुआ ही नहीं। अपनी शुरुआती जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हालांकि इस मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतकों के घरवालों ने हत्यारोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी।
केस-2ः चापड़ और रिंच से बजरंगदल नेता की हत्या
'कानपुर मर्डर सीन' स्पेशल क्राइम स्टोरी
कानपुर के रावतपुर गांव केशव नगर निवासी राम करन यादव का मंझला बेटा विजय यादव उर्फ इंद्र बहादुर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। 24 नवंबर 2017 शुक्रवार देर शाम इंद्र बहादुर के पास उसकी प्रेमिका का फोन आता है। वह उसे मिलने के लिए अर्मापुर बुलाती है। इंद्र बहादुर आनन-फानन अपनी प्रेमिका से मिलने पहुंच जाता है। अर्मापुर थाने के ठीक पीछे चंद कदमों की दूरी पर झाड़ियों में घात लगाये तीन लोग बैठे होते हैं। इंद्र बहादुर जैसे ही वहां पहुंचता है महिला उसे अपनी बातों में उलझा लेती है। तभी इंद्र बहादुर के सिर पर चापड़ से हमला होता है।
इंद्र बहादुर कुछ समझ पाता इससे पहले ही चापड़ और रिंचों के एक बाद एक प्राणघातक वार ने उसे संभलने का मौका नहीं दिया। आरोपी खून से लथपथ इंद्र बहादुर को मरा समझकर वहां से भाग निकले। वारदात की जगह से गुजर रहे एक अनजान शख्स ने छोटे भाई को फोन करके बताया कि इंद्र बहादुर अर्मापुर थाने के पीछे लहूलुहान हालत में पड़ा हुआ है। घटना की जानकारी पर उसका भाई फौरन मौके पर पहुंचा। अपने बड़े भाई को लहुलुहान हालत में देखकर जैसे ही उसने हाथ लगाया तो उसे होश में पाया। छोटे भाई ने फौरन मोबाइल निकालकर एक वीडियो बनाते हुए इंद्र बहादुर से पूछा कि तुम्हें किसने मारा है। ये वीडियो ही पुलिस के लिए हत्यारों तक पहुंचने का सुराग और पुख्ता सबूत बन गया।
इंद्र बहादुर कुछ समझ पाता इससे पहले ही चापड़ और रिंचों के एक बाद एक प्राणघातक वार ने उसे संभलने का मौका नहीं दिया। आरोपी खून से लथपथ इंद्र बहादुर को मरा समझकर वहां से भाग निकले। वारदात की जगह से गुजर रहे एक अनजान शख्स ने छोटे भाई को फोन करके बताया कि इंद्र बहादुर अर्मापुर थाने के पीछे लहूलुहान हालत में पड़ा हुआ है। घटना की जानकारी पर उसका भाई फौरन मौके पर पहुंचा। अपने बड़े भाई को लहुलुहान हालत में देखकर जैसे ही उसने हाथ लगाया तो उसे होश में पाया। छोटे भाई ने फौरन मोबाइल निकालकर एक वीडियो बनाते हुए इंद्र बहादुर से पूछा कि तुम्हें किसने मारा है। ये वीडियो ही पुलिस के लिए हत्यारों तक पहुंचने का सुराग और पुख्ता सबूत बन गया।
केस-3ः जान बचाने के लिए वह गिड़गिड़ाता रहा, खून से भर गई नाली
'कानपुर मर्डर सीन' स्पेशल क्राइम स्टोरी
30 जुलाई 2017 रात के 9 बजे कानपुर में रायपुरवा की बेहद घनी बस्ती लक्ष्मीपुरवा में सरे बाजारा सैकड़ों लोग अपने कामों में व्यस्त थे। तभी भीड़ को चीरता हुआ खून से लथपथ एक नौजवान जिसका नाम आशीष था। अपनी जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रहा था। आशीष के पीछे 6-7 लोग खून से सने चापड़, चाकू और तलवारें हवा में लहरा रहे थे। आशीष अपनी जान बचाने के लिए कभी किसी के पैर पकड़ता तो किसी के सामने हाथ जोड़ लेता पर हर कोई हत्यारों के डर से वहां मूकदर्शक बना खड़ा था। तभी आशीष अपनी जान बचाने के लिए एक हलवाई की दुकान में घुस गया।
उसने हलवाई के सामने हाथ जोड़ और कहा कि ' भैय्या... मुझे बचा लो' पर उस हलवाई को आशीष पर तनिक भी दया नहीं आई और उसने उसे उठाकर अपनी दुकान से बाहर फेंक दिया तब तक हत्यारे आशीष को चारों ओर से घेर चुके थे। उन्होंने उसे उठाया और बीच चौराहे लिटा दिया। इसके बाद चापड़ के हर वार के साथ आशीष की चीखें निकल रही थीं। उसका पूरा शरीर चापड़ की लगातार मार से छलनी हो गया था। खून पानी की तरह नालियों में बह रहा था और लोग बस तमाशाबीन बने हत्या होते देख रहे थे। हत्यारे उसे तबतक मारते रहे जबतक उसकी चीखें निकलना बंद नहीं हो गईं।
इसके बाद आरोपी हत्यारे हवा में खून से सने खंजर लहराते हुए वहां से ऐसे निकल गए जैसे कि कोई बड़ी जंग जीतकर आये हों। जब मृतक के पिता को घटना की जानकारी हुई तो दौड़ कर मौके पर पहुंचा। पुलिस आ चुकी थी और उस समय शहर की कप्तान रहीं सोनिया सिंह मौके पर मौजूद थीं। बेबस और लाचार मृतक आशीष का पिता अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए दोनों हाथ जोड़कर न्याय दिलाने की गुहार लगाते हुए एसएसपी के सामने घुटनों के बल बैठ गया।
(नोट- तीनों केस स्टडी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पर आधारित हैं नाम न छापने की शर्त पर घटना की पूरी जानकारी लोगों ने हमारे साथ साझा की हैं।)
उसने हलवाई के सामने हाथ जोड़ और कहा कि ' भैय्या... मुझे बचा लो' पर उस हलवाई को आशीष पर तनिक भी दया नहीं आई और उसने उसे उठाकर अपनी दुकान से बाहर फेंक दिया तब तक हत्यारे आशीष को चारों ओर से घेर चुके थे। उन्होंने उसे उठाया और बीच चौराहे लिटा दिया। इसके बाद चापड़ के हर वार के साथ आशीष की चीखें निकल रही थीं। उसका पूरा शरीर चापड़ की लगातार मार से छलनी हो गया था। खून पानी की तरह नालियों में बह रहा था और लोग बस तमाशाबीन बने हत्या होते देख रहे थे। हत्यारे उसे तबतक मारते रहे जबतक उसकी चीखें निकलना बंद नहीं हो गईं।
इसके बाद आरोपी हत्यारे हवा में खून से सने खंजर लहराते हुए वहां से ऐसे निकल गए जैसे कि कोई बड़ी जंग जीतकर आये हों। जब मृतक के पिता को घटना की जानकारी हुई तो दौड़ कर मौके पर पहुंचा। पुलिस आ चुकी थी और उस समय शहर की कप्तान रहीं सोनिया सिंह मौके पर मौजूद थीं। बेबस और लाचार मृतक आशीष का पिता अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए दोनों हाथ जोड़कर न्याय दिलाने की गुहार लगाते हुए एसएसपी के सामने घुटनों के बल बैठ गया।
(नोट- तीनों केस स्टडी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पर आधारित हैं नाम न छापने की शर्त पर घटना की पूरी जानकारी लोगों ने हमारे साथ साझा की हैं।)