{"_id":"57d9832e4f1c1b3c3dd473c0","slug":"killing-large-beleaguered","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां के हत्यारोप से बरी, अब मुश्किलों से घिरी कविता","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मां के हत्यारोप से बरी, अब मुश्किलों से घिरी कविता
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 14 Sep 2016 10:34 PM IST
विज्ञापन
मां के हत्यारोप से बरी कविता
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मां की हत्या के आरोप से बरी होकर मंगलवार को जेल से छूटी कविता की जिंदगी मुश्किलों से भरी है। जेल से बाहर आते ही कविता को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। करीब चार साल बंद रहने के कारण घर खंडहर हो चुका है। घर में चोरी हो चुकी है। कविता को बुधवार को चकेरी थाने में चोरी की शिकायत करने जाना पड़ा। चार सफाईकर्मी घर की सफाई में लगे। बिजली का कनेक्शन कट चुका है, पानी की मोटर भी चोरी हो गई है। बुधवार सुबह उसे पड़ोस में रहने वाले रिश्तेदार के घर नहाने जाना पड़ा। पास में रहने वाले अपनी दिवंगत बहन शिल्पी के ससुर राजेंद्र पाल सिंह को बुलाया और फिर घर की साफ-सफाई करवाई।
कविता तो घर में नहीं मिली। घर में मौजूद उसकी बहन शिल्पी के ससुर राजेंद्र पाल सिंह ने बताया उस घटना के पीड़ित वह भी हैं। घटना के बाद वह भी अपने बेटे-बहू को खो चुके हैं। उनके मुताबिक 7 सितंबर 2012 उनकी समधन रीता (कविता की मां) के साथ हुई दुर्घटना हुई जिसके बाद 11 सितंबर को उनकी मौत हो गई। कविता जेल चली गई। राजेंद्रपाल के मुताबिक मां की मौत और बहन के जेल जाने के चलते उनकी बहू शिल्पी (कविता की बहन) बहुत तनाव में रहती थी। जिसकी वजह से उसने 21 सितंबर 2012 को ट्रेन से कटकर जान दे दी। पत्नी की मौत के बाद उनका बेटा एयरफोर्स का जूनियर वारंट अफसर राजेश सिंह बहुत परेशान था। अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई और कविता की यथासंभव पैरवी में व्यस्त रहता था। 13 नवंबर 2014 को उसकी भी हार्ट अटैक से मौत हो गई।
प्रापर्टी का विवाद हो सकता है
राजेंद्रपाल के मुताबिक कविता के पिता शीलेंद्र सिंह कुशवाहा मूलरूप से जालौन के रहने वाले थे और एचएएल में डिप्टी मैनेजर से रिटायर हुए थे। गांव की जमीन बेचने पर और रिटायरमेंट पर बड़ी रकम मिली थी। कृष्णानगर में जिस मकान में उनका परिवार रहता था, उसकी भी अच्छी कीमत है। 7 सितंबर को घायल रीता सबसे पहले पास में रहने वाले एक व्यक्ति के घर गईं थीं। उसने ही रीता को अस्पताल में भर्ती कराया था। उस समय कविता ने उस व्यक्ति को 75 हजार रुपये रीता के इलाज के लिए दिए थे। रीता की मौत और कविता के जेल जाने के बाद उस व्यक्ति का ही घर पर कब्जा था।
विज्ञापन
12 लाख के किसान विकास पत्र भुनाए गए
राजेंद्रपाल ने बताया जिस दौरान मोहल्ले के उस व्यक्ति का घर पर कब्जा था, उसी दौरान घर से 12 लाख के किसान विकास पत्र गायब हुए और भुना लिए गए। जिसकी शिकायत उनके पुत्र राजेश ने पुलिस से की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। घर से कविता की पासबुक, मार्कशीट, पैन कार्ड, राशन कार्ड समेत तमाम कागजात और जरूरी सामान चोरी हो गए।
पूर्व आईजी ने घर में डलवाया था ताला
घर पर कब्जे की शिकायत तत्कालीन आईजी आशुतोष पांडे से की गई थी। जिसके बाद पुलिस ने उस व्यक्ति का ताला हटवा कर पुलिस का ताला लगवाया।
जेल की मित्र मिलने आई
कविता की रिहाई की जानकारी पर जेल में उसके साथ बंद रही बर्रा निवासी सुनीता उससे मिलने पहुंची। सुनीता ने बताया कि जेल में बंद रहने के दौरान उसकी कविता से दोस्ती हुई थी। कविता ने ही उसे अपने घर का पता दिया था। सुनीता ने बताया कि कविता एचएएल में नौकरी करती थी। जेल में कविता किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी। कुछ दिन तक तो उसके जीजा उससे मिलने जेल आए फिर उन्होंने भी आना बंद कर दिया। सुनीता के मुताबिक कविता का कहना था कि वह जमानत पर बाहर नहीं जाएगी, बरी होने के बाद ही जेल से बाहर आएगी।
विज्ञापन
कविता तो घर में नहीं मिली। घर में मौजूद उसकी बहन शिल्पी के ससुर राजेंद्र पाल सिंह ने बताया उस घटना के पीड़ित वह भी हैं। घटना के बाद वह भी अपने बेटे-बहू को खो चुके हैं। उनके मुताबिक 7 सितंबर 2012 उनकी समधन रीता (कविता की मां) के साथ हुई दुर्घटना हुई जिसके बाद 11 सितंबर को उनकी मौत हो गई। कविता जेल चली गई। राजेंद्रपाल के मुताबिक मां की मौत और बहन के जेल जाने के चलते उनकी बहू शिल्पी (कविता की बहन) बहुत तनाव में रहती थी। जिसकी वजह से उसने 21 सितंबर 2012 को ट्रेन से कटकर जान दे दी। पत्नी की मौत के बाद उनका बेटा एयरफोर्स का जूनियर वारंट अफसर राजेश सिंह बहुत परेशान था। अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई और कविता की यथासंभव पैरवी में व्यस्त रहता था। 13 नवंबर 2014 को उसकी भी हार्ट अटैक से मौत हो गई।
विज्ञापन
प्रापर्टी का विवाद हो सकता है
राजेंद्रपाल के मुताबिक कविता के पिता शीलेंद्र सिंह कुशवाहा मूलरूप से जालौन के रहने वाले थे और एचएएल में डिप्टी मैनेजर से रिटायर हुए थे। गांव की जमीन बेचने पर और रिटायरमेंट पर बड़ी रकम मिली थी। कृष्णानगर में जिस मकान में उनका परिवार रहता था, उसकी भी अच्छी कीमत है। 7 सितंबर को घायल रीता सबसे पहले पास में रहने वाले एक व्यक्ति के घर गईं थीं। उसने ही रीता को अस्पताल में भर्ती कराया था। उस समय कविता ने उस व्यक्ति को 75 हजार रुपये रीता के इलाज के लिए दिए थे। रीता की मौत और कविता के जेल जाने के बाद उस व्यक्ति का ही घर पर कब्जा था।
विज्ञापन
12 लाख के किसान विकास पत्र भुनाए गए
राजेंद्रपाल ने बताया जिस दौरान मोहल्ले के उस व्यक्ति का घर पर कब्जा था, उसी दौरान घर से 12 लाख के किसान विकास पत्र गायब हुए और भुना लिए गए। जिसकी शिकायत उनके पुत्र राजेश ने पुलिस से की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। घर से कविता की पासबुक, मार्कशीट, पैन कार्ड, राशन कार्ड समेत तमाम कागजात और जरूरी सामान चोरी हो गए।
पूर्व आईजी ने घर में डलवाया था ताला
घर पर कब्जे की शिकायत तत्कालीन आईजी आशुतोष पांडे से की गई थी। जिसके बाद पुलिस ने उस व्यक्ति का ताला हटवा कर पुलिस का ताला लगवाया।
जेल की मित्र मिलने आई
कविता की रिहाई की जानकारी पर जेल में उसके साथ बंद रही बर्रा निवासी सुनीता उससे मिलने पहुंची। सुनीता ने बताया कि जेल में बंद रहने के दौरान उसकी कविता से दोस्ती हुई थी। कविता ने ही उसे अपने घर का पता दिया था। सुनीता ने बताया कि कविता एचएएल में नौकरी करती थी। जेल में कविता किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी। कुछ दिन तक तो उसके जीजा उससे मिलने जेल आए फिर उन्होंने भी आना बंद कर दिया। सुनीता के मुताबिक कविता का कहना था कि वह जमानत पर बाहर नहीं जाएगी, बरी होने के बाद ही जेल से बाहर आएगी।