फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   सजायाफ्ता को 27 साल बाद पकड़ सकी पुलिस

सजायाफ्ता को 27 साल बाद पकड़ सकी पुलिस

Wed, 20 Jun 2018 11:04 PM IST
Updated Wed, 20 Jun 2018 11:04 PM IST
विज्ञापन
सजायाफ्ता को 27 साल बाद पकड़ सकी पुलिस
हमीरपुर। हत्या के मामले में आजीवन कैद की सजा काट रहा एक सजायाफ्ता पैरोल पर आने के बाद वर्ष 1991 में फरार हो गया।
विज्ञापन


काफी तलाश के बाद भी जब वह गिरफ्त में नहीं आया तो 15 हजार का इनाम घोषित किया गया। मंगलवार रात जिले की स्वाट टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को इलाहाबाद जेल भेजा है।

सुमेरपुर के इंगोहटा गांव निवासी रामसेवक पालीवाल का गांव के रोशन खां सहित चार लोगों से मामूली कहासुनी हुई। इस मामले में वर्ष 1976 में रामसेवक की हत्या कर दी गई।
विज्ञापन


हत्या के मामले में रोशन खां समेत चार के खिलाफ सुमेरपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। न्यायालय में सुनवाई के बाद चारों आरोपियों को वर्ष 1990 में उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


इधर वर्ष 1991 में आरोपी रोशन खां तीन महीने के पैरोल पर घर आया और फिर दोबारा जेल न जाकर फरार हो गया। रोशन खां का पुलिस सुराग नहीं लगा सकी। बीते साल तत्कालीन एसपी ने फरार आरोपी पर 15 हजार रुपये का ईनाम घोषित किया।

स्वाट टीम प्रभारी एमपी त्रिपाठी ने बताया रोशन की तलाश में वह लंबे समय से थे। बताया मंगलवार को आरोपी को इंगोहटा बस स्टैंड के पास गिरफ्तार कर लिया गया।

इसके बाद उसे सुमेरपुर एसओ महेंद्र कुमार वर्मा के सुपुर्द कर दिया गया। सुमेरपुर एसओ ने बताया आरोपी पहले से ही सजायाफ्ता है। इस पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। बताया कार्रवाई कर आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में नैनी जेल भेजा गया है।

परिजनों से गुपचुप मिलने आता था
रोशन खां के फरार होने के बाद जमानत लेने वालों को अदालत के चक्कर लगाने पड़े और वह मुंबई, सूरत जैसे शहरों में रहकर रोजीरोटी चलाता रहा। इधर उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके रोशन एक साल से इंगोहटा स्थित अपने पैतृक घर गुपचुप तरीके से आता था।


फिलहाल परिजन उसे जेल जाने की सलाह देते थे। हत्या के मामले में उसके साथी इकराम व मोहम्मद अली उर्फ छुट्टन सजा काटकर घर आ चुके हैं। चौथे आरोपी जगरूप सिंह की नैनी जेल में बीमारी से मौत हो चुकी है।

तीन महीने की पैरोल पर आने के बाद वर्ष 1991 में हुआ था फरार
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed