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एमबीबीएस कराने के नाम पर 36 लाख ठगे
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 12 Feb 2015 02:59 AM IST
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शहर की मेडिकल यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एडमिशन कराने के नाम पर मणिपुर के दो छात्रों से 36 लाख रुपये की ठगी कर ली गई है।
ठगी का आरोप एमआईजी बर्रा निवासी पंकज दुबे पर लगा है। इस मामले की लिखित शिकायत 9 फरवरी को एसएसपी शलभ माथुर से की गई है। एसएसपी ने बर्रा थानाध्यक्ष को मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा था।
इस बारे में बर्रा एसओ रामबाबू सिंह ने बताया कि जांच मुझे सौंपी गई है। घटनास्थल बैंक दूसरे प्रदेश में है। ऐसे में मैंने प्रार्थना पत्र देने वाले छात्रों और आरोपी पक्ष दोनों को थाने बुलाया था। दोनों नहीं आए।
दोनों पक्ष की बात सुनने के बाद वरिष्ठ अधिकारी की राय लेकर कार्रवाई की जाएगी। मणिपुर के वाई देवला देवी और मयांगलंबम रॉबर्ट ने शैक्षिक सत्र 2013-14 में शहर के एक निजी मेडिकल यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एडमिशन लिया।
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एडमिशन से पहले ही बर्रा निवासी पंकज दुबे ने टेलीफोन के जरिए इन छात्रों से संपर्क साधा। पंकज ने कहा कि वह एडमिशन की गारंटी देता है, लेकिन अच्छा खासा डोनेशन देना होगा।
दोनोें छात्र पंकज के झांसे में आ गए और उसके बैंक अकाउंट नंबर 37840100001589 में 36.09 लाख 500 रुपये भेज दिए। यह धनराशि 14 अगस्त से 11 नवंबर 2013 के बीच भेजी गई है।
सभी धनराशि खाता ट्रांसफर, आरटीजीएस, एनईएफटी और नकद जमा हुई है। सबसे ज्यादा 14 लाख रुपये 19 अगस्त 2013 को जमा हुए हैं। बैंक अकाउंट पंकज दुबे और वंदना मिश्रा के नाम है।
इस ठगी से परेशान छात्र यूनिवर्सिटी की फीस नहीं जमा कर सके हैं। अब यूनिवर्सिटी से फीस जमा करने का दबाव है। कहा जा रहा है कि फीस नहीं जमा हुई तो यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया जाएगा।
इस चक्कर में छात्रों का पूरा परिवार कानपुर में डेरा डाले है। पुलिस से शिकायत भी की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दबाव पड़ने के बाद पंकज दुबे ने 19 सितंबर 2014 को 15 लाख रुपये का एक चेक दिया, जो कि बाउंस हो गया है।
जिस बैंक अकाउंट का चेक था, उसमें पूरा पैसा नहीं था। हस्ताक्षर अधूरे और फर्जी थे। पंकज ने खाते से रुपये निकालने पर रोक भी लगवा रखी थी। बैंक एकाउंट बंद था।
पीड़ित छात्र के पिता वाई. डोरेन सिंह ने बताया कि जालसाजी करके पंकज ने 36 लाख रुपये से ज्यादा की धनराशि हड़प ली है। इस सिलसिले में एसएसपी से मिले थे। थानाध्यक्ष बर्रा को 10 फरवरी को मुलाकात की गई थी , लेकिन उन्होंने मामले को टाल दिया है।
थानाध्यक्ष ने कहा है कि मामले की एफआईआर मणिपुर में ही कराएं। जिस बैंक से पैसा ट्रांसफर किया गया है, वहीं की है। इससे परेशान डोरेन से मुख्य सचिव या फिर डीजीपी से मिलकर शिकायत करने की बात कही है।
हमने इनको काफी पैसा दिया है, जिसका रिकार्ड मेरे पास है। कुछ पैसा बचा है, उसका भुगतान जल्द ही कर दिया जाएगा। एडमिशन के नाम पर छात्रों ने 16 लाख रुपये दूसरे व्यक्ति को दिए हैं। फिर भी मुझे फंसा रहे हैं। मामले की पूरी जानकारी पुलिस को भी दी जाएगी।
- पंकज दुबे, आरोपी
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ठगी का आरोप एमआईजी बर्रा निवासी पंकज दुबे पर लगा है। इस मामले की लिखित शिकायत 9 फरवरी को एसएसपी शलभ माथुर से की गई है। एसएसपी ने बर्रा थानाध्यक्ष को मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा था।
इस बारे में बर्रा एसओ रामबाबू सिंह ने बताया कि जांच मुझे सौंपी गई है। घटनास्थल बैंक दूसरे प्रदेश में है। ऐसे में मैंने प्रार्थना पत्र देने वाले छात्रों और आरोपी पक्ष दोनों को थाने बुलाया था। दोनों नहीं आए।
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दोनों पक्ष की बात सुनने के बाद वरिष्ठ अधिकारी की राय लेकर कार्रवाई की जाएगी। मणिपुर के वाई देवला देवी और मयांगलंबम रॉबर्ट ने शैक्षिक सत्र 2013-14 में शहर के एक निजी मेडिकल यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एडमिशन लिया।
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एडमिशन से पहले ही बर्रा निवासी पंकज दुबे ने टेलीफोन के जरिए इन छात्रों से संपर्क साधा। पंकज ने कहा कि वह एडमिशन की गारंटी देता है, लेकिन अच्छा खासा डोनेशन देना होगा।
दोनोें छात्र पंकज के झांसे में आ गए और उसके बैंक अकाउंट नंबर 37840100001589 में 36.09 लाख 500 रुपये भेज दिए। यह धनराशि 14 अगस्त से 11 नवंबर 2013 के बीच भेजी गई है।
सभी धनराशि खाता ट्रांसफर, आरटीजीएस, एनईएफटी और नकद जमा हुई है। सबसे ज्यादा 14 लाख रुपये 19 अगस्त 2013 को जमा हुए हैं। बैंक अकाउंट पंकज दुबे और वंदना मिश्रा के नाम है।
इस ठगी से परेशान छात्र यूनिवर्सिटी की फीस नहीं जमा कर सके हैं। अब यूनिवर्सिटी से फीस जमा करने का दबाव है। कहा जा रहा है कि फीस नहीं जमा हुई तो यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया जाएगा।
इस चक्कर में छात्रों का पूरा परिवार कानपुर में डेरा डाले है। पुलिस से शिकायत भी की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दबाव पड़ने के बाद पंकज दुबे ने 19 सितंबर 2014 को 15 लाख रुपये का एक चेक दिया, जो कि बाउंस हो गया है।
जिस बैंक अकाउंट का चेक था, उसमें पूरा पैसा नहीं था। हस्ताक्षर अधूरे और फर्जी थे। पंकज ने खाते से रुपये निकालने पर रोक भी लगवा रखी थी। बैंक एकाउंट बंद था।
पीड़ित छात्र के पिता वाई. डोरेन सिंह ने बताया कि जालसाजी करके पंकज ने 36 लाख रुपये से ज्यादा की धनराशि हड़प ली है। इस सिलसिले में एसएसपी से मिले थे। थानाध्यक्ष बर्रा को 10 फरवरी को मुलाकात की गई थी , लेकिन उन्होंने मामले को टाल दिया है।
थानाध्यक्ष ने कहा है कि मामले की एफआईआर मणिपुर में ही कराएं। जिस बैंक से पैसा ट्रांसफर किया गया है, वहीं की है। इससे परेशान डोरेन से मुख्य सचिव या फिर डीजीपी से मिलकर शिकायत करने की बात कही है।
हमने इनको काफी पैसा दिया है, जिसका रिकार्ड मेरे पास है। कुछ पैसा बचा है, उसका भुगतान जल्द ही कर दिया जाएगा। एडमिशन के नाम पर छात्रों ने 16 लाख रुपये दूसरे व्यक्ति को दिए हैं। फिर भी मुझे फंसा रहे हैं। मामले की पूरी जानकारी पुलिस को भी दी जाएगी।
- पंकज दुबे, आरोपी