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कानपुर: चोरों के सामने पुलिस की हार, चार महीने में 33 कारें पार
Wed, 18 Dec 2019 04:41 PM IST
शिखा पांडेय
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 18 Dec 2019 04:41 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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अगर आप नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो इसके पहले उसकी चोरों से सुरक्षा की व्यवस्था कर लीजिए। क्योंकि, कानपुर की कारों पर इंटरनेशनल कार चोर गिरोह की नजर है। कार चोरों ने बीते चार महीनों में जिले के 14 थानाक्षेत्रों से 33 कारें पार कर दीं, जिनकी कीमत 3.5 करोड़ से अधिक आंकी गई है।
इनमें से कई कारें लग्जरी थीं, जिन्हें कंपनियों ने एंटी थेफ्ट (चोरी से सुरक्षित) होने का दावा भी किया था। लेकिन, चोरों ने इन कारों को महज पांच से सात मिनट में ही पार कर दिया। शहर में लगातार कार चोरी की घटनाएं हो रही हैं और घटनाओं को रोक पाने में नाकाम पुलिस चोरों के सामने हार मानती नजर आ रही है। यही कारण है कि पुलिस अब तक एक चोरी गई कार बरामद नहीं कर सकी है।
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इनमें से कई कारें लग्जरी थीं, जिन्हें कंपनियों ने एंटी थेफ्ट (चोरी से सुरक्षित) होने का दावा भी किया था। लेकिन, चोरों ने इन कारों को महज पांच से सात मिनट में ही पार कर दिया। शहर में लगातार कार चोरी की घटनाएं हो रही हैं और घटनाओं को रोक पाने में नाकाम पुलिस चोरों के सामने हार मानती नजर आ रही है। यही कारण है कि पुलिस अब तक एक चोरी गई कार बरामद नहीं कर सकी है।
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पहले रेकी फिर उड़ा रहे कारें
पुलिस सूत्रों के अनुसार जिले में चोरी हुई सभी कारों केपीछे एक ही इंटरनेशनल कार चोर गिरोह का हाथ है। गिरोह के सदस्य एक बिना नंबर की स्कार्पियों से पहले शहर में कारों की रेकी करते हैं। बाद में चोरी कर वाहन समेत हाईवे की ओर फरार हो जाते हैं। चोरी की कई घटनाओं में पुलिस को घटनास्थल या आसपास से मिले सीसीटीवी फुटेज में चोर हर बार एक ही कार से रेकी करते नजर आए।
रात 02 से 03 केबीच रहें होशियार
पुलिस ने अपनी जांच पड़ताल में पता लगाया कि चोरों ने वाहन चोरी की सभी घटनाओं को
देर रात 02 बजे से लेकर 03 बजे के बीच ही अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार यही वो समय होता है, जब लोग सबसे ज्यादा गहरी नींद में होते हैं और सड़कों पर भी पूरी तरह से सन्नाटा पसरा होता है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार जिले में चोरी हुई सभी कारों केपीछे एक ही इंटरनेशनल कार चोर गिरोह का हाथ है। गिरोह के सदस्य एक बिना नंबर की स्कार्पियों से पहले शहर में कारों की रेकी करते हैं। बाद में चोरी कर वाहन समेत हाईवे की ओर फरार हो जाते हैं। चोरी की कई घटनाओं में पुलिस को घटनास्थल या आसपास से मिले सीसीटीवी फुटेज में चोर हर बार एक ही कार से रेकी करते नजर आए।
रात 02 से 03 केबीच रहें होशियार
पुलिस ने अपनी जांच पड़ताल में पता लगाया कि चोरों ने वाहन चोरी की सभी घटनाओं को
देर रात 02 बजे से लेकर 03 बजे के बीच ही अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार यही वो समय होता है, जब लोग सबसे ज्यादा गहरी नींद में होते हैं और सड़कों पर भी पूरी तरह से सन्नाटा पसरा होता है।
डिमांड पर चुराते हैं कार
सूत्रों ने बताया कि गिरोह के मास्टरमाइंड ने अपने एजेंट यूपी, बिहार, कोलकाता, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हिमांचल प्रदेश से लेकर नेपाल काठमांडू तक फैला रखे हैं। कार की डिमांड इन्हीं एजेंटों के माध्यम से मास्टरमाइंड तक पहुंचती है। इसके बाद एक टीम दिन केउजाले में पूर्व निर्धारित शहर में पहुंच कर रेकी करती है। जब शिकार मिल जाता है तो देर रात घटना को अंजाम दे दिया जाता है।
इंजीनियरिंग कॉलेज से गिरोह ने ले रखी है ट्रेनिंग
पुलिस ने कार चोरी के अधिकांश केसों को सीसीटीवी फुटेज की मदद से रीड किया, जिसमें चोरों ने हाई सिक्योरिटी वाली लग्जरी कारों को भी 05 से 07 मिनट में ही स्टार्ट करकेपार कर दिया। इस पर पुलिस ने जांच पड़ताल की तो मालूम हुआ कि वाहन चोर गिरोह ने कारों के लॉक तकनीकी की मदद से खोलने के लिए बैंग्लूरू के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से चोरी छिपे ट्रेनिंग ले रखी है। यही कारण है कि वाहनों के एंटी थेफ्ट होने के कंपनियों केदावे खोखले साबित हो रहे हैं।
फॉर्च्यूनर, स्कार्पियो और सफारी टारगेट
पुलिस के अनुसार चोरों के टारगेट में अधिकांश फॉर्च्यूनर, स्कार्पियो एस-10, सफारी और बोलेरो जैसी कारें हैं। इन कारों की डिमांड खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा रहती है। हिमांचल प्रदेश में 70 प्रतिशत कारें स्कार्पियों एस-10 ही हैं। ऐसे में इन कारों की सुरक्षा को लेकर खासा अलर्ट रहने की जरूरत है।
सूत्रों ने बताया कि गिरोह के मास्टरमाइंड ने अपने एजेंट यूपी, बिहार, कोलकाता, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, हिमांचल प्रदेश से लेकर नेपाल काठमांडू तक फैला रखे हैं। कार की डिमांड इन्हीं एजेंटों के माध्यम से मास्टरमाइंड तक पहुंचती है। इसके बाद एक टीम दिन केउजाले में पूर्व निर्धारित शहर में पहुंच कर रेकी करती है। जब शिकार मिल जाता है तो देर रात घटना को अंजाम दे दिया जाता है।
इंजीनियरिंग कॉलेज से गिरोह ने ले रखी है ट्रेनिंग
पुलिस ने कार चोरी के अधिकांश केसों को सीसीटीवी फुटेज की मदद से रीड किया, जिसमें चोरों ने हाई सिक्योरिटी वाली लग्जरी कारों को भी 05 से 07 मिनट में ही स्टार्ट करकेपार कर दिया। इस पर पुलिस ने जांच पड़ताल की तो मालूम हुआ कि वाहन चोर गिरोह ने कारों के लॉक तकनीकी की मदद से खोलने के लिए बैंग्लूरू के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से चोरी छिपे ट्रेनिंग ले रखी है। यही कारण है कि वाहनों के एंटी थेफ्ट होने के कंपनियों केदावे खोखले साबित हो रहे हैं।
फॉर्च्यूनर, स्कार्पियो और सफारी टारगेट
पुलिस के अनुसार चोरों के टारगेट में अधिकांश फॉर्च्यूनर, स्कार्पियो एस-10, सफारी और बोलेरो जैसी कारें हैं। इन कारों की डिमांड खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा रहती है। हिमांचल प्रदेश में 70 प्रतिशत कारें स्कार्पियों एस-10 ही हैं। ऐसे में इन कारों की सुरक्षा को लेकर खासा अलर्ट रहने की जरूरत है।
चोरी से बचाता है जीपीएस डिवाइस
पुलिस का मनना है कि जिन वाहनों में जीपीएस डिवाइस होता है। उनके चोरी होने के बाद भी पुलिस उन्हें जल्द ही बरामद कर लेती है। बाजार में जीपीएस डिवाइस तीन हजार से 4.5 हजार रुपये कीमत में उपलब्ध है। इस डिवाइस को वाहन में किसी गुप्त स्थान पर छिपा दिया जाता है। इस डिवाइस की मदद से आप अपने वाहन को चलते हुए भी ट्रेस कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर मोबाइल की मदद से ही इंजन को बंद या स्टार्ट भी किया जा सकता है।
01 जुलाई से 31 अक्तूबर तक यहां रही चोरों की नजर
थाना चोरी गई कारों की संख्या
चकेरी-----07
नौबस्ता------06
बर्रा-------04
कल्याणपुर-----03
ग्वालटोली-----03
गोविंदनगर-----02
शिवराजपुर-----01
सचेंडी-----01
बिधनू----01
नजीराबाद----01
स्वरूपनगर----01
बजरिया-----01
कलक्टरगंज-----01
रेलबाजार-----01
नोट- पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार।
पुलिस का मनना है कि जिन वाहनों में जीपीएस डिवाइस होता है। उनके चोरी होने के बाद भी पुलिस उन्हें जल्द ही बरामद कर लेती है। बाजार में जीपीएस डिवाइस तीन हजार से 4.5 हजार रुपये कीमत में उपलब्ध है। इस डिवाइस को वाहन में किसी गुप्त स्थान पर छिपा दिया जाता है। इस डिवाइस की मदद से आप अपने वाहन को चलते हुए भी ट्रेस कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर मोबाइल की मदद से ही इंजन को बंद या स्टार्ट भी किया जा सकता है।
01 जुलाई से 31 अक्तूबर तक यहां रही चोरों की नजर
थाना चोरी गई कारों की संख्या
चकेरी-----07
नौबस्ता------06
बर्रा-------04
कल्याणपुर-----03
ग्वालटोली-----03
गोविंदनगर-----02
शिवराजपुर-----01
सचेंडी-----01
बिधनू----01
नजीराबाद----01
स्वरूपनगर----01
बजरिया-----01
कलक्टरगंज-----01
रेलबाजार-----01
नोट- पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार।
चोरी की कारों को बरामद करने के लिए बर्रा इंस्पेक्टर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जल्द ही चोर पुलिस की गिरफ्त में होंगे। - अपर्णा गुप्ता, एसपी साउथ